नंदर माता का चमत्कारिक मंदिर: जहां मां खुले आकाश तले विराजती हैं, दीवारें नहीं बन पाईं, आस्था में नहीं कोई सीमा

झाबुआ। मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले में आस्था का एक ऐसा अद्भुत केंद्र है, जहां देवी मां खुले आकाश तले विराजती हैं। यह मंदिर है नंदर माता का, जो झाबुआ से करीब 40 किलोमीटर दूर एक घनी पहाड़ियों से घिरी टेकरी पर स्थित है। यह मंदिर जितना चमत्कारी है, उतनी ही रहस्यमयी है इसकी…

नंदर माता मंदिर, मोहनकोट

झाबुआ। मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले में आस्था का एक ऐसा अद्भुत केंद्र है, जहां देवी मां खुले आकाश तले विराजती हैं। यह मंदिर है नंदर माता का, जो झाबुआ से करीब 40 किलोमीटर दूर एक घनी पहाड़ियों से घिरी टेकरी पर स्थित है। यह मंदिर जितना चमत्कारी है, उतनी ही रहस्यमयी है इसकी बनावट और इससे जुड़ी मान्यताएं।

मां विराजती हैं खुले में, नहीं है दीवार और दरवाजा

नंदर माता मंदिर में छत तो है, लेकिन न तो दीवार है और न कोई दरवाजा। कई बार मंदिर के आसपास दीवार बनाने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार रात में वह दीवार अपने आप ढह जाती थी। यही कारण है कि आज भी यह मंदिर बिना दीवारों के ही है। जनसहयोग से मंदिर की छत का काम तो पूरा हो चुका है, लेकिन दीवारें नहीं बनाई जा रही हैं।

भक्तों की मुरादें करती हैं पूरी, चढ़ते हैं चांदी के गहने

यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मान्यता है कि नंदर माता किसी को भी निराश नहीं लौटातीं। नवरात्रि के समय यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। झाबुआ के आसपास के इलाकों के अलावा गुजरात और राजस्थान से भी हजारों लोग मां के दर्शन के लिए आते हैं। भक्तजन जब अपनी मनोकामना पूर्ण होती हुई देखते हैं, तो वे माता को चांदी के गहने चढ़ाते हैं।

श्रद्धालु रेखा कहती हैं, “हमारी मन्नत पूरी हुई तो मां को चांदी की पायल चढ़ाई। यहां सच्चे मन से जो भी मांगो, वो मिलता है।”

संजय, एक अन्य श्रद्धालु का कहना है, “हम कई सालों से आते हैं, हर बार कोई न कोई चमत्कार अनुभव होता है।”

नंदर माता मंदिर, मोहनकोट

मुणिया समाज की कुलदेवी, बहुएं नहीं करती मंदिर में प्रवेश

यह मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि इसके पीछे कई सामाजिक मान्यताएं भी जुड़ी हैं। झाबुआ के आदिवासी समाज की मुणिया जाति इस देवी को अपनी कुलदेवी मानती है। किंवदंती है कि नंदर माता का अपनी भाभी से विवाद हो गया था, तभी से मुणिया समाज की बहुएं मंदिर के भीतर प्रवेश नहीं करतीं। वे मंदिर परिक्षेत्र के बाहर से ही दर्शन करती हैं।

श्रद्धालु राकेश मुणिया बताते हैं, “हमारे समाज में आज भी बहुएं मंदिर के अंदर नहीं जातीं। अगर कोई जबरदस्ती करे, तो अनिष्ट हो जाता है।”

श्रंगार सामग्री त्यागकर करती हैं मन्नतें

नंदर माता की विशेष बात यह भी है कि यहां आने वाली महिलाएं जब मन्नत मांगती हैं, तो उसके पूरा होने तक वे श्रृंगार की सामग्री जैसे काजल, बिंदी, चूड़ी आदि छोड़ देती हैं। जब मनोकामना पूरी होती है, तो फिर से इन्हें धारण कर मंदिर में आकर मां का आशीर्वाद लेती हैं।

पुजारी नारायण बताते हैं, “यह स्थान कई सौ साल पुराना है। यहां आने वाला कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता। मां सबकी झोली भर देती हैं।”


चमत्कारों से भरा नंदर माता का यह मंदिर, श्रद्धा और रहस्य का संगम है।

आज जब दुनिया आधुनिकता की ओर बढ़ रही है, तब भी झाबुआ की इस पहाड़ी पर खुले आकाश तले विराजती नंदर माता का मंदिर यह बताता है कि आस्था की दीवारें ईंटों से नहीं, श्रद्धा से बनती हैं।

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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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