मेघनगर अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए नहीं है कोई जिम्मेदार व्यक्ति, जनसुनवाई में उठी आवाज.

झाबुआ, 15 अप्रैलझाबुआ जिला मुख्यालय पर मंगलवार को हुई जनसुनवाई में मेघनगर निवासी नीरज श्रीवास्तव ने एक अहम और संवेदनशील मुद्दे को उठाया। उन्होंने शिकायत दर्ज कराई कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मेघनगर में पोस्टमार्टम के लिए जिम्मेदार व्यक्ति नहीं है, जिससे आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नीरज श्रीवास्तव ने…

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झाबुआ, 15 अप्रैल
झाबुआ जिला मुख्यालय पर मंगलवार को हुई जनसुनवाई में मेघनगर निवासी नीरज श्रीवास्तव ने एक अहम और संवेदनशील मुद्दे को उठाया। उन्होंने शिकायत दर्ज कराई कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मेघनगर में पोस्टमार्टम के लिए जिम्मेदार व्यक्ति नहीं है, जिससे आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि जब किसी व्यक्ति की संदिग्ध या अचानक मौत होती है, तो उसका पोस्टमार्टम करना जरूरी होता है। यह रिपोर्ट सिर्फ कागज नहीं होती, बल्कि मृत्यु के असली कारण की पहचान करने का एक वैज्ञानिक जरिया होती है। लेकिन मेघनगर अस्पताल में लंबे समय से पोस्टमार्टम करने वाला कर्मचारी नहीं है।

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परिजन को भटकना पड़ता है
पोस्टमार्टम नहीं हो पाने की वजह से मृतकों के परिजन को झाबुआ या अन्य अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे ना केवल मानसिक तनाव बढ़ता है, बल्कि समय और पैसे की भी बर्बादी होती है। कुछ मामलों में तो कानूनी कार्रवाई और बीमा दावों में भी अड़चन आ जाती है क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं बन पाती।

फरियादी नीरज श्रीवास्तव की मांग:

  • स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमार्टम के लिए स्थायी व्यक्ति की नियुक्ति की जाए
  • जब तक पद नहीं भरता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था हो
  • पीड़ित परिवारों को समय पर सेवा मिले ताकि उन्हें इधर-उधर न भटकना पड़े

स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल
इस शिकायत ने एक बार फिर झाबुआ जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक तरफ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे बुनियादी मुद्दे नजरअंदाज हो जाते हैं।


स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लें। आखिर एक व्यक्ति की मौत के बाद उसके परिजनों को सम्मानजनक और सहज प्रक्रिया के तहत न्याय मिलना चाहिए, हालांकि की जनसुनवाई में आए आवेदनो पर त्वरित निराकरण के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन अमल हो नहीं पाता!

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virendra singh rathore
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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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