, ,

झाबुआ में सरकार के दो साल  कैसे, पता नहीं , जी राम जी भी वेटिंग में!

झाबुआ।  मोहन सरकार के दो साल पूरे होने पर हर जिले में ‘उत्सव’ रूपी प्रेस वार्ताएं हुई, वहां के प्रभारी मंत्री ने मीडिया को, लोगों दो साल की उपलब्धियों की जानकारी दी । झाबुआ में भी इंतजार था कि प्रभारी मंत्री खुद माइक संभालकर प्रेस के सामने अपनी उपलब्धियों का ‘पहाड़ा’ पढ़ेंगे। भोपाल में तो…

inshot 20260125 1716105207830856852588318179

झाबुआ।  मोहन सरकार के दो साल पूरे होने पर हर जिले में ‘उत्सव’ रूपी प्रेस वार्ताएं हुई, वहां के प्रभारी मंत्री ने मीडिया को, लोगों दो साल की उपलब्धियों की जानकारी दी । झाबुआ में भी इंतजार था कि प्रभारी मंत्री खुद माइक संभालकर प्रेस के सामने अपनी उपलब्धियों का ‘पहाड़ा’ पढ़ेंगे। भोपाल में तो खूब लड्डू बंटे, लेकिन झाबुआ में विकास का पहाड़ा भूले हर कोई नजर आ रहा है! सरकार के इस जश्न को जैसे ‘नज़र’ लग गई।

मंत्री जी को ‘फुर्सत’ नहीं या कोई और वजह है ।

तय हुआ था कि प्रभारी मंत्री अपने-अपने जिलों में रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे। लेकिन झाबुआ के प्रभारी मंत्री कुंवर विजय शाह शायद झाबुआ का रास्ता ही भूल गए। झाबुआ की जनता आज भी उस प्रेस वार्ता का इंतजार कर रही है, जो सरकारी फाइलों में तो ‘होनी थी’, लेकिन हकीकत में जिसका ‘मुहूर्त’ ही नहीं निकल पा रहा है ।

inshot 20260125 1716105207830856852588318179

जब ‘रिपोर्ट कार्ड’ ही रिश्वत लेते पकड़ा जाए!

लोग चुटकी ले रहे हैं कि मंत्री जी आएँ भी तो क्या मुँह लेकर आएँ? जिस जनजातीय कार्य विभाग के वे खुद सर्वेसर्वा हैं, उसी विभाग का बाबू जब कलेक्ट्रेट परिसर में 14,500 की रिश्वत लेते ‘लाइव’ पकड़ा जाए, तो प्रेस वार्ता में क्या बताते? क्या ये कि विकास की गंगा बह रही है, या ये कि विभाग में ‘वसूली’ का चक्का जाम नहीं हुआ है? ‘एसी मैडम’ के नाम पर मांगी गई उस रिश्वत ने मंत्री जी के रिपोर्ट कार्ड पर वो स्याही पोती है कि अब उसे दिखाने की हिम्मत शायद ही कोई जुटा पाए।

26 जनवरी भी आ गई, पर आतदन ‘साहब’ को नहीं आना था सो नहीं आए!

गनीमत देखिये, प्रभारी मंत्री बनने के बाद पिछले साल एक बार झंडा फहराने आए थे। इस बार तो गणतंत्र दिवस पर भी झाबुआ के नसीब में मंत्री जी के दर्शन नहीं हैं। झाबुआ की बेरुखी का आलम ये है कि घोषणाएं तो ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ दर्शन और ‘टॉय ट्रेन’ जैसी बड़ी-बड़ी होती हैं, लेकिन हकीकत में दिखता कुछ नहीं ।

झाबुआ का रिपोर्ट कार्ड और ‘जी राम जी’ अभी ‘वेटिंग’ में है !

भोपाल में लड्डू बंट गए, जश्न मन गया और फाइलें बंद हो गईं। लेकिन झाबुआ का रिपोर्ट कार्ड आज भी उतना ही ‘कोरा’ है, जितना मंत्री जी का दौरा। इधर सुप्रीम कोर्ट ने सोफिया कुरैशी वाले मामले मे तल्ख टिप्पणी कर दी, आगे क्या होगा , ये तो जी राम जी की जाने । पर माहौल बना हुआ है । अब फरवरी आ गई है, शायर क्या खूब कहा है कि-

जाने कितनों का दिल तोड़ती है फरवरी , यूं ही नहीं किसी ने इसके दिन घटाएं हैं ।

झाबुआ का दिल तो जनवरी में ही टूट चुका है।

बाकी तो जो है, सो है ही!

लेखक के बारे में

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

About the Author

virendra singh rathore
virendra singh rathore

virendra singh rathore

संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports