दिव्य नक्षत्र वाटिका:  नक्षत्र वाटिका को और भव्य बनाने का संकल्प, वार्षिक बैठक में रुद्राक्ष-चंदन और दुर्लभ वनस्पतियों के संरक्षण पर हुई चर्चा

सभंवत: प्रदेश की प्रथम और अद्वितीय झाबुआ की ‘दिव्य नक्षत्र वाटिका’ के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्यरत ‘दिव्य नक्षत्र वाटिका बहुउद्देशीय समिति’ की वार्षिक बैठक 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के शुभ अवसर पर संपन्न हुई। इस बैठक में समिति के सदस्यों ने वाटिका को और अधिक विकसित, सुंदर और भव्य बनाने का संकल्प लिया।…

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सभंवत: प्रदेश की प्रथम और अद्वितीय झाबुआ की ‘दिव्य नक्षत्र वाटिका’ के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्यरत ‘दिव्य नक्षत्र वाटिका बहुउद्देशीय समिति’ की वार्षिक बैठक 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के शुभ अवसर पर संपन्न हुई। इस बैठक में समिति के सदस्यों ने वाटिका को और अधिक विकसित, सुंदर और भव्य बनाने का संकल्प लिया।

​उल्लेखनीय है कि यह समिति प्रदेश की इस पहली नक्षत्र वाटिका की जनक है। समिति ने ही अथक प्रयासों से इस वाटिका का रोपण किया है और अब इसके संरक्षण का जिम्मा भी बखूबी निभा रही है।

विकास और रखरखाव पर बनी नई रणनीति

बैठक में बड़ी संख्या में समिति के सदस्यों ने भाग लिया। इस दौरान वाटिका के वर्तमान स्वरूप, पौधों के स्वास्थ्य और भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सदस्यों ने एक स्वर में प्रण लिया कि वे इस प्राकृतिक धरोहर को सहेजने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देंगे। चर्चा का मुख्य केंद्र वाटिका का रखरखाव और इसे आम जनमानस के लिए और अधिक उपयोगी बनाना रहा।

एक ही जगह मौजूद है दुर्लभ वनस्पतियों का खजाना

यह नक्षत्र वाटिका केवल नाम के लिए नहीं, बल्कि अपनी जैव विविधता (Biodiversity) के लिए पूरे प्रदेश में एक मिसाल है। यहाँ ज्योतिष और आयुर्वेद के लिहाज से अत्यंत दुर्लभ माने जाने वाले पौधे एक साथ देखे जा सकते हैं।

वाटिका में मुख्य रूप से रुद्राक्ष, कदम्ब, चंदन, नागेश्वर और पारस पीपल जैसे पवित्र वृक्ष लहलहा रहे हैं। इसके अलावा यहाँ कपूर, सिंधु, गूगल, कुचला, बकुल, सफेद पलाश, शमी और स्वर्ण चंपा जैसी औषधीय वनस्पतियां भी संरक्षित हैं।

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पुष्पों और रंगों का अद्भुत संगम

समिति ने बताया कि वाटिका की सुंदरता में चार चांद लगाने के लिए यहाँ पांच रंगों के कमल, लैवेंडर, हजारी गुलाब और दुर्लभ सफेद गुलाब भी रोपित किए गए हैं। फलों में नींबू, संतरा और अनार के पौधे भी यहाँ की शोभा बढ़ा रहे हैं।

अध्यात्म और पर्यावरण का केंद्र

झाबुआ की यह वाटिका अध्यात्म और पर्यावरण का अनूठा संगम है। यहाँ नवग्रह वृक्ष, पंचपल्लव और कुश जैसी पवित्र वनस्पतियां भी मौजूद हैं, जिनका धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष महत्व है। समिति का उद्देश्य इस वाटिका को न केवल पर्यावरण संरक्षण का केंद्र बनाना है, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय वनस्पति शास्त्र और नक्षत्रों के महत्व से परिचित कराना भी है।

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virendra singh rathore
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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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