,

रतलाम से झाबुआ के मेघनगर पहुंच रहा था ‘सफेद जहर’, जावरा में नकली दूध का भांडाफोड़

रतलाम/झाबुआ : हम अपने बच्चों को यह सोचकर दूध पिलाते हैं कि इससे उन्हें ताकत मिलेगी और उनका शारीरिक विकास होगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस दूध को आप ‘अमृत’ समझकर अपने परिवार को पिला रहे हैं, वह दरअसल बीमारियों का एक ‘सफेद जहर’ हो सकता है? मध्य प्रदेश के रतलाम जिले…

रतलाम जावरा में नकली दूध का भांडाफोड़

रतलाम/झाबुआ : हम अपने बच्चों को यह सोचकर दूध पिलाते हैं कि इससे उन्हें ताकत मिलेगी और उनका शारीरिक विकास होगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस दूध को आप ‘अमृत’ समझकर अपने परिवार को पिला रहे हैं, वह दरअसल बीमारियों का एक ‘सफेद जहर’ हो सकता है? मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के जावरा के भीमाखेड़ी गांव में जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने एक ऐसे ही खौफनाक सच से पर्दा उठाया है ।

ग्राम भीमाखेड़ी स्थित ‘यश डेयरी’ (Yash Dairy) पर पड़े छापे ने यह साबित कर दिया है कि मुनाफे की अंधी दौड़ में मिलावटखोर अब लोगों की जान से खेलने में भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। आइए, इस पूरे गोरखधंधे को तथ्यों और आंकड़ों के साथ विस्तार से समझते हैं।

रतलाम जावरा में नकली दूध का भांडाफोड़

पुलिस की कार्रवाई तो खाद्य सुरक्षा विभाग क्या कर रहा था

जावरा पुलिस को विश्वसनीय सूत्रों से सफेद दूध के काले कारोबार की सूचना मिली थी । जिसके बाद आईए प्रकाश गाडरिया ने रतलाम एसपी को पूरे मामले की जानकारी दी और उसके पुलिस प्रशासन की टीम के साथ कार्रवाई करने पहुंची । जिसमें तहसीलदार, खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी भी शामिल थे ।

जब इस टीम ने ग्राम भीमाखेड़ी में यश दायम (प्रोपराइटर) द्वारा संचालित ‘यश डेयरी’ पर अचानक दबिश दी, तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए। वहां शुद्ध दूध का नहीं, बल्कि रसायनों और पाउडर का एक बड़ा कारखाना चल रहा था।

5000 लीटर की BMC मशीन और रसायनों का कॉकटेल

रतलाम जावरा में नकली दूध का भांडाफोड़

डेयरी के अंदर सबसे चौंकाने वाली चीज थी 5000 लीटर क्षमता वाली विशाल बीएमसी (Bulk Milk Cooler) मशीन। आमतौर पर इस मशीन का उपयोग गांवों से इकट्ठा किए गए शुद्ध दूध को ठंडा रखने और उसे खराब होने से बचाने के लिए किया जाता है।

लेकिन ‘यश डेयरी’ में इस बीएमसी का उपयोग एक विशाल ‘मिक्सिंग टैंक’ (मिश्रण मशीन) के रूप में किया जा रहा था। जांच में सामने आया कि इसी 5000 लीटर की मशीन में पानी, डब्ल्यूपी (WP) पाउडर, लेक्टोज स्प्रे ड्राइड (Lactose Spray Dried) और सबसे खतरनाक रसायन ‘कास्टिक सोडा’ (Caustic Soda) को मिलाकर हजारों लीटर नकली दूध तैयार किया जा रहा था।

  • कास्टिक सोडा क्यों? मिलावटखोर दूध को फटने से बचाने और उसकी लाइफ (Shelf Life) बढ़ाने के लिए कास्टिक सोडा जैसे खतरनाक डिटर्जेंट केमिकल का इस्तेमाल करते हैं।
  • लेक्टोज पाउडर क्यों? दूध में फैट (Fat) और एसएनएफ (SNF – Solid Not Fat) की मात्रा को कृत्रिम रूप से संतुलित दिखाने के लिए इस पाउडर का भारी मात्रा में उपयोग किया जाता था, ताकि जांच मशीनों (लैक्टोमीटर) को भी धोखा दिया जा सके।

2400 किलो से ज्यादा पाउडर और 6 अहम सैंपल

प्रशासन की टीम ने मौके से मिलावट की सामग्री का भारी जखीरा बरामद किया है। अधिकारियों ने डेयरी से लेक्टोज स्प्रे ड्राइड पाउडर के 97 पैकेट जब्त किए हैं। एक पैकेट का वजन 25 किलो है, जिसका सीधा अर्थ है कि मौके से कुल 2425 किलोग्राम (लगभग 24 क्विंटल) संदिग्ध पाउडर जब्त हुआ है। इतने पाउडर से रोजाना हजारों लीटर सिंथेटिक दूध तैयार किया जा सकता था।

खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 के तहत मौके से जांच के लिए कुल 6 अहम नमूने (Samples) लिए गए हैं:

  • 3 सैंपल – गाय के दूध के
  • 2 सैंपल – लेक्टोज स्प्रे ड्राइड पाउडर के
  • 1 सैंपल – कास्टिक सोडा का

रतलाम में बन रहा था जहर, झाबुआ के मेघनगर में हो रही थी सप्लाई

इस पूरे भंडाफोड़ का सबसे चिंताजनक पहलू इसका ‘सप्लाई नेटवर्क’ है। यश डेयरी में तैयार होने वाला यह 5000 लीटर ‘सफेद जहर’ केवल जावरा या रतलाम तक ही सीमित नहीं रहता था।

सूत्रों और जांच के अनुसार, इस सिंथेटिक दूध की रोजाना एक बड़ी खेप रतलाम जिले की सीमाओं को पार करते हुए झाबुआ जिले के मेघनगर और अन्य आस-पास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में सप्लाई की जा रही थी। मेघनगर एक बड़ा औद्योगिक और रिहायशी कस्बा है, जहां दूध की भारी खपत है। मिलावटखोर इसी मांग का फायदा उठाकर वहां के लोगों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ कर रहे थे।

लाइसेंस का बड़ा फर्जीवाड़ा: व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल

इस मामले ने स्थानीय प्रशासन और फूड सेफ्टी विभाग की नियमित मॉनिटरिंग पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

  1. सिर्फ कलेक्शन का लाइसेंस: यश डेयरी के पास ‘भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण’ (FSSAI) का जो लाइसेंस मिला है, वह केवल दूध को इकट्ठा करने (Collection) और आगे सप्लाई करने के लिए था।
  2. मैन्युफैक्चरिंग की इजाजत नहीं: लाइसेंस में ‘मैन्युफैक्चरिंग यूनिट’ (निर्माण इकाई) या प्रोसेसिंग का कोई जिक्र नहीं था।
  3. सिस्टम की नाकामी: बड़ा सवाल यह है कि बिना मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस के 5000 लीटर की बीएमसी मशीन, हजारों किलो पाउडर और कास्टिक सोडा का यह पूरा कारखाना इतने लंबे समय से किसकी नाक के नीचे और किसके संरक्षण में चल रहा था? क्या विभाग को इसकी भनक तक नहीं थी?

सेहत पर क्या होता है सिंथेटिक दूध का असर?

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, कास्टिक सोडा और डब्ल्यूपी पाउडर से बना सिंथेटिक दूध शरीर के लिए बेहद घातक है। इसके नियमित सेवन से:

  • बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास रुक सकता है।
  • आंतों में अल्सर और फूड पॉइजनिंग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
  • लंबे समय तक सेवन करने से लीवर और किडनी फेल होने जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं।
  • इसमें मौजूद केमिकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकते हैं।

कार्रवाई: डेयरी सील, अब लैब रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल प्रशासन ने भारी अनियमितताओं और मिलावट की पुख्ता शंका के आधार पर ‘यश डेयरी’ को आगामी आदेशों तक के लिए पूरी तरह से सील (Seal) कर दिया है। जब्त किए गए सभी 6 नमूनों को राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला (Lab) में भेज दिया गया है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लैब से नमूनों की रिपोर्ट फेल आते ही डेयरी संचालक यश दायम और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है ।

इस घटना ने रतलाम और झाबुआ दोनों जिलों के उपभोक्ताओं को सतर्क कर दिया है। यह समय है कि आम जनता अपने घरों में आने वाले दूध की गुणवत्ता के प्रति जागरूक हो और प्रशासन दूध माफियाओं के इस पूरे नेक्सस (गठजोड़) को जड़ से खत्म करे।

ताजा और त्वरित अपडेट्स के लिए ‘झाबुआ पोस्ट’ (Jhabua Post) से जुड़ें:

📲 WhatsApp चैनल: यहाँ क्लिक कर फॉलो करें

📘 Facebook पेज: यहाँ क्लिक कर लाइक करें

▶️ YouTube चैनल: यहाँ क्लिक कर सब्सक्राइब करें

🚨 आपके आस-पास भी है कोई वारदात, समस्या या सूचना?

हमें सीधे WhatsApp पर भेजें: 👉 9407154083 पर मैसेज करने के लिए यहाँ क्लिक करें

लेखक के बारे में

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

About the Author

virendra singh rathore
virendra singh rathore

virendra singh rathore

संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports