झाबुआ पुलिस ने 12 लाख रूपए के 80 गुम फोन उनके मालिकों को लौटाए । आपरेशन हेलो के तहत गुम मोबाइल फोन को बरामद कर ये फोन लौटाए गए हैं । झाबुआ एसपी देवेन्द्र पाटीदार ने झाबुआ कंट्रोल रूम पर मोबाइल मालिकों के उनके फोन लौटाए । अपने गुम मोबाइल पाकर चेहरों की मुस्कान लौटा आई ।
वर्तमान समय में मोबाइल फोन आमजन के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। इसके गुम होने पर लोगों को न सिर्फ आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि निजी डेटा खोने की परेशानी का भी सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए झाबुआ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन हेलो” (Operation Hello) को एक और बड़ी सफलता मिली है। शुक्रवार (12 जून 2026) को पुलिस अधीक्षक (SP) श्री देवेन्द्र पाटीदार के निर्देशन में साइबर सेल ने कुल 80 गुम मोबाइल फोन ट्रेस कर उनके वास्तविक स्वामी को सौंपें।

झाबुआ पुलिस ने राजस्थान और गुजरात से भी खोज निकाले फोन
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) श्री प्रतिपाल सिंह महोबिया और उप पुलिस अधीक्षक श्री कमलेश शर्मा के मार्गदर्शन में जिला साइबर टीम ने शानदार काम किया है।
- कुल बरामद फोन: 80 मोबाइल फोन
- कुल अनुमानित कीमत: लगभग 12 लाख रुपये
- सबसे महंगा और सस्ता फोन: ट्रेस किए गए मोबाइलों में अधिकतम 40,000 रुपये (Vivo V30 सीरीज़) से लेकर न्यूनतम 7,500 रुपये तक के फोन शामिल हैं। कौन सी कंपनियों के फोन मिले: इनमें सबसे ज्यादा Vivo के 35 और OPPO के 18 फोन हैं। इसके अलावा Realme, Samsung, Tecno और OnePlus कंपनियों के मोबाइल भी शामिल है , खास बात ये है कि पुलिस ने न सिर्फ झाबुआ जिले से, बल्कि सीमावर्ती गुजरात और राजस्थान राज्यों से भी लोकेशन ट्रेस कर इन मोबाइलों को बरामद किया है।
मोबाइल गुम हो जाए तो क्या करें?
झाबुआ पुलिस ने आमजन से अपील की है कि मोबाइल गुम होने की स्थिति में तत्काल अपने निकटतम पुलिस थाने या साइबर सेल से संपर्क करें। इसके अलावा नागरिक स्वयं CEIR Portal (Central Equipment Identity Register) के माध्यम से भी अपने गुम मोबाइल की शिकायत दर्ज कर सकते हैं, जिससे मोबाइल की शीघ्र खोज और उसे ब्लॉक करना सुनिश्चित हो सके।
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साइबर ठगों से बचने के लिए झाबुआ पुलिस की ‘एडवाइजरी’
मोबाइल लौटाने के साथ-साथ पुलिस ने बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण एडवाइजरी (Cyber Advisory) भी जारी की है। पुलिस ने इन तरीकों से होने वाली ठगी से बचने की सलाह दी है:
- टेलीग्राम जॉब फ्रॉड: Telegram के माध्यम से पार्ट-टाइम जॉब और टास्क पूरे करने के नाम पर हो रही ठगी से सावधान रहें।
- WhatsApp APK फाइल: व्हाट्सएप ग्रुप में आने वाली किसी भी अनजान ‘APK File’ को डाउनलोड न करें। इसमें मैलवेयर (वायरस) हो सकता है जो आपका फोन हैक कर बैंक खाता खाली कर सकता है। WhatsApp को ‘Auto Download’ पर न रखें।
- डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest): साइबर अपराधी वीडियो कॉल कर खुद को इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (CBI/Police) का अधिकारी बताकर डराते हैं। ऐसे किसी भी कॉल से न डरें और पैसे न दें।
- AI वॉयस स्कैम (AI Voice Scam): ठग अब AI तकनीक का उपयोग कर आपके किसी परिजन या दोस्त की आवाज में कॉल करते हैं और इमरजेंसी का बहाना बनाकर पैसे मांगते हैं। पैसे देने से पहले हमेशा नंबर और व्यक्ति की जांच करें।
- बच्चों की झूठी गिरफ्तारी: यदि कोई कॉल कर कहे कि दूसरे शहर में पढ़ रहा आपका बच्चा गिरफ्तार हो गया है, तो घबराकर पैसे न भेजें। यह एक नया फ्रॉड है।
- बैंक फ्रॉड: किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना ID, पासवर्ड, ATM नंबर, PIN, CVV या OTP न दें।
शिकायत कहाँ करें? बैंक फ्रॉड या साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें। आप झाबुआ साइबर सेल के हेल्पलाइन नंबर 7049140517 पर भी संपर्क कर सकते हैं।
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