Mukhymantri Dairy Plus: मध्य प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना’ झाबुआ जिले के आदिवासी (ST) परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने में अहम भूमिका निभा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देकर किसानों और युवाओं की आय में वृद्धि करना है। योजना के तहत राज्य सरकार अनुसूचित जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को 75 प्रतिशत की भारी सब्सिडी पर उच्च गुणवत्ता वाली दो मुर्रा भैंसें उपलब्ध करा रही है। हालांकि ये योजना सभी वर्गों के लिए है, लेकिन आदिवसी किसानों के लिए सरकार 75 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है ।
Mukhymantri Dairy Plus yojana: लागत और सब्सिडी: हितग्राही को देने होंगे मात्र 25 प्रतिशत
झाबुआ जिले में मुख्य रूप से निवासरत भील और भिलाला आदिवासी समुदायों के लिए यह योजना बेहद लाभकारी साबित हो रही है। पशुपालन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत दी जाने वाली दो मुर्रा भैंसों की अनुमानित कुल लागत लगभग ₹2,95,000 आती है।
इसमें एसटी (ST) वर्ग के लाभार्थियों को सरकार की ओर से 75 प्रतिशत का भारी अनुदान (सब्सिडी) दिया जा रहा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि लाभार्थी को अपनी जेब से अंशदान के रूप में केवल 25 प्रतिशत (लगभग ₹73,700) ही जमा करने होंगे, जबकि शेष पूरी राशि का भुगतान मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किया जाएगा।

सामान्य (General) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए:
- 50% सरकारी अनुदान: सामान्य और ओबीसी वर्ग के लाभार्थियों को 2 मुर्रा भैंसों की कुल कीमत (लगभग ₹2,95,000) पर 50% की सब्सिडी दी जाती है।
- 50% हितग्राही अंशदान: इन वर्गों के हितग्राहियों को अपनी ओर से 50% (लगभग ₹1,47,500) का योगदान देना होता है।
अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए:
25% हितग्राही अंशदान: इन्हें अपनी जेब से केवल 25% (लगभग ₹73,700) ही जमा करने होते हैं।
75% सरकारी अनुदान: अनुसूचित जाति (SC) के आवेदकों को एसटी (ST) वर्ग के समान ही 75% की भारी सब्सिडी का लाभ मिलता है।
Mukhymantri Dairy Plus yojana के लिए पात्रता
इस योजना को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि जरूरतमंद और इच्छुक व्यक्ति आसानी से इसका लाभ ले सकें:
- मूल निवासी: आवेदक अनिवार्य रूप से मध्य प्रदेश (और झाबुआ जिले) का मूल निवासी होना चाहिए।
- जाति प्रमाण पत्र: आवेदक के पास अनुसूचित जनजाति (ST) का वैध जाति प्रमाण पत्र होना आवश्यक है।
- बुनियादी ढांचा: पशुपालन में रुचि रखने वाले किसी भी ग्रामीण युवा या किसान के पास पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए एक हवादार शेड, साफ पानी और चारे की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।
मुर्रा भैंसों की खासियत और योजना की मुख्य शर्तें
सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि लाभार्थियों को व्यवसाय में घाटा न हो, इसके लिए विभाग ने कुछ कड़े मापदंड और शर्तें तय की हैं:
- 8 से 10 लीटर दूध: योजना के तहत केवल वही मुर्रा भैंसें दी जाती हैं, जिनकी दुग्ध उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 8 से 10 लीटर हो।
- गाभिन पशु: लाभार्थी की आय जल्द से जल्द शुरू हो सके, इसके लिए 5 महीने या उससे अधिक समय की गाभिन भैंसें ही चुनी जाती हैं।
- बीमा और टैगिंग: वितरित किए जाने वाले सभी पशु पूरी तरह से रोगमुक्त होते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से पशुओं का बीमा (Insurance) किया जाता है और पहचान के लिए उनके कानों में टैग लगाए जाते हैं।
- अनिवार्य प्रशिक्षण: पशु सौंपने से पहले हितग्राहियों को डेयरी प्रबंधन, चारे-पानी की व्यवस्था और पशुओं की देखभाल का बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाता है।
कैसे करें आवेदन?
झाबुआ पशु कल्याण डेयरी योजना विभाग के प्रभारी उपसंचालक डॉ. अमरसिंह दिवाकर का कहना है जो भी आदिवासी परिवार या युवा इस योजना का लाभ उठाकर अपना खुद का डेयरी व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, वे झाबुआ में अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय (Veterinary Hospital) या उप संचालक, पशुपालन विभाग कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
आवेदन पत्र के साथ आधार कार्ड, मूल निवासी प्रमाण पत्र, एसटी जाति प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक की फोटोकॉपी और पशु रखने के स्थान (शेड/जमीन) का विवरण जमा करना अनिवार्य है।
डॉ. दिवाकर बताते हैं कि ‘मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना’ न केवल झाबुआ अंचल में श्वेत क्रांति (दुग्ध उत्पादन) को नई रफ्तार देगी, बल्कि रोजगार के अभाव में होने वाले पलायन को रोकने और स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी एक बड़ा कदम साबित होगी। ये योजना केवल आदिवासी किसान भाईयो , पशुपालकों के लिए वरदान है, बल्कि सामान्य, ओबीसी, अजा वर्ग के किसान और पशुपालक भी इस योजना का लाभ उठा सतते हैं ।
Mukhymantri Dairy Plus : ST को 75% की भारी सब्सिडी पर मिलेंगी उच्च नस्ल की दो मुर्रा भैंसें
Mukhymantri Dairy Plus: मध्य प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना’ झाबुआ जिले के आदिवासी (ST) परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने में अहम भूमिका निभा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देकर किसानों और युवाओं की आय में वृद्धि करना…
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