Jhabua Bus Stand Shops Notice: झाबुआ नगर पालिका द्वारा शुक्रवार को बस स्टैंड स्थित पुरानी धर्मशाला के नीचे बनी दुकानों को सील किए जाने के बाद से ही शहर का माहौल गरमाया हुआ है। मामले में अब एक नया और बड़ा मोड़ आ गया है। सील की गई इन दुकानों के शटर पर नगर पालिका परिषद ने 15 जून 2026 की तारीख वाले ‘अत्यंत आवश्यक / तत्काल वैधानिक सूचना पत्र’ (नोटिस) चस्पा कर दिए हैं।
दुकानदार पिछले कई दिनों से नगर पालिका और कलेक्टर के चक्कर काट रहे थे, लेकिन अब चस्पा किए गए इन नोटिसों ने साफ कर दिया है कि नगर पालिका इन जर्जर दुकानों को तोड़कर आगे की कार्रवाई करने की तैयारी में है।
Jhabua Bus Stand Shops Notice उज्जैन पॉलीटेक्निक की रिपोर्ट का हवाला
नगर पालिका परिषद, झाबुआ द्वारा जारी इस नोटिस में उच्च न्यायालय इंदौर खंडपीठ के आदेश (दिनांक 12.06.2026) का हवाला दिया गया है। नोटिस में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि यह कार्रवाई ‘शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज उज्जैन’ की स्ट्रक्चरल फिजिबिलिटी रिपोर्ट और नगर पालिका के तकनीकी अमले द्वारा किए गए भौतिक निरीक्षण के आधार पर की जा रही है।
जांच रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष जो नोटिस में दिए गए हैं:
- भवन व्यवसाय के लिए अनुपयुक्त: संरचना पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है और इसके भूतल (Ground Floor) व प्रथम तल (First Floor) का व्यावसायिक या मानवीय उपयोग तकनीकी रूप से योग्य नहीं है।
- खतरनाक स्थिति: दुकानों की छतों का सरिया पूरी तरह से बाहर आ चुका है, कंक्रीट स्लैब का गंभीर क्षरण हो रहा है, जिससे पूरा ढांचा अत्यंत खतरनाक स्थिति में है।

मरम्मत असंभव, जन-सुरक्षा के लिए टूटेंगी दुकानें
नोटिस के अगले पन्ने पर नगर पालिका ने दो-टूक शब्दों में साफ कर दिया है कि इस भवन को किसी भी तरह की मरम्मत (Repair) के माध्यम से सुरक्षित नहीं बनाया जा सकता है।
चूंकि यह बस स्टैंड का अत्यधिक व्यस्त क्षेत्र है, इसलिए इस जर्जर भवन के अचानक गिरने से जान-माल का गंभीर खतरा हमेशा बना हुआ है। इसी खतरे को टालने के लिए नगर पालिका मध्य प्रदेश नपा अधिनियम 1961 की धारा 221 के तहत इन दुकानों को ध्वस्त (Demolish) करने की वैधानिक कार्रवाई प्रस्तावित कर रही है।
व्यापारियों की मांग: लिखित आश्वासन चाहिए
नगर पालिका हादसों का जोखिम नहीं उठाना चाहती और पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर वहां नया कॉम्प्लेक्स बनाने की बात कह रही है; वहीं दूसरी तरफ, दुकानदार इस बात से डरे हुए हैं कि दुकानें टूटने के बाद उन्हें नई दुकानें मिलेंगी या नहीं ।
जब दुकानें सील हुई थी तब व्यापारियों का स्पष्ट कहना था कि जब तक नगर पालिका उन्हें पक्के तौर पर ‘लिखित आश्वासन’ नहीं दे रही कि बिल्डिंग बनने पर दुकानें प्राथमिकता से उन्हें ही आवंटित की जाएंगी , बस इसी बात से व्यापारी डरे हुए हैं । अब देखना यह है कि प्रशासन और दुकानदारों के बीच यह गतिरोध कैसे खत्म होता है।
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