Jhabua: झाबुआ में भैंस चोरी का मामला इन दिनों चर्चाओं में है । बावड़ी माफी गांव से करीब 11 से ज्यादा जानवर चोरी हुए , पुलिस के बजाय किसान ने खुद ही अपनी भैंस ढूंढ निकाली । आरोपी बालू ने ये स्वीकार भी कर लिया किया उनसे भैंस बेच दी । लेकिन झाबुआ कोतवाली पुलिस अब तक ये पता नहीं लगा पाई है कि ये भैंस किसे बेची । फरियादी किसान ने अब जनसुनवाई में आवेदन देकर चोरी की भैंस खरीदने वाले को भी आरोपी बनाने की मांग की है । साथ उनकी भैंस का पूरा रूपया दिलाने की मांग की है ।
2023 का विधानसभा चुनाव लड़ चुके और 3600 वोट लाने वाले ‘नेताजी’ बालू द्वारा की गई भैंस चोरी के मामले में अब खरीदार पर कार्रवाई की मांग की जा रही है । मैथु ने बताया कि आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने भैंस बेच दी । मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचे फरियादी किसान मैथु ने पुलिस अधीक्षक (SP) के आवेदन में चोरी का माल खरीदने वाले व्यक्ति को भी आरोपी बनाने की सख्त मांग की है।

1 लाख की ‘मुर्रा’ नस्ल की भैंस, आरोपी ने कबूला बेचने का जुर्म
ग्राम बावड़ी माफी के फरियादी महतू ने को बताया कि उसकी सामान्य नहीं, बल्कि ‘मुर्रा’ (Murrah) नस्ल की भैंसें चोरी हुई थीं, जिनकी बाजार में कीमत 1 लाख रुपये से भी ज्यादा है।
- कोतवाली पुलिस द्वारा आरोपी बालू (निवासी टिकड़ी मोती) को गिरफ्तार करने के बाद महतू की एक भैंस तो बरामद हो गई थी।
- लेकिन मुख्य मामला दूसरी भैंस का है। पुलिस पूछताछ में आरोपी बालू ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है और कुबूल किया है कि उसने किसान की दूसरी भैंस को आगे किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया है।
किसान को सता रहा खौफ: “कहीं बूचड़खाने में तो नहीं काट दी गई मेरी भैंस?”
आरोपी के इस कबूलनामे के बाद किसान मैथु को शंका है कि “मुझे डर है कि मेरी 1 लाख रुपये कीमत की कीमती भैंस को कहीं कटने के लिए किसी बूचड़खाने (Slaughterhouse) में तो नहीं बेच दिया गया है!” पुलिस को इसका पता लगाना चाहिए कि आखिर बालू ने भैंस किसको बेची । किसान ने गुहार लगाई है कि अगर उसकी भैंस नहीं मिलती है, तो उसे उस भैंस की पूरी कीमत मुआवजा राशि दिलाई जाए।
Jhabua के बावड़ी माफी गांव से 11 से ज्यादा पशुओं की चोरी का ,कहीं ये गिरोह तो नहीं
यह मामला सिर्फ महतू की एक भैंस तक सीमित नहीं है। जनसुनवाई में पहुंचे अन्य ग्रामीणों ने भी शिकायत दर्ज कराई है कि बाबरी/बावड़ी माफी गांव से पिछले एक महीने के भीतर 11 से ज्यादा पशु (भैंस और बैल) चोरी हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बालू अकेला नहीं है, बल्कि यह एक पूरा गिरोह है जो किसानों की कीमती संपत्तियों पर डाका डाल रहा है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि पुलिस ‘चोरी का माल खरीदने वाले’ उस अज्ञात व्यक्ति को कब गिरफ्तार करती है।
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