Jhabua : दफ्तरों की खाक छान रहा गरीब ‘मकना’; प्रभारी मंत्री से भी लगाई गुहार, आखिर कब होगी रसूखदारों पर कार्रवाई ?

Jhabua : सरकार गरीब आदिवासियो के लिए काम करने की बात भले ही कहती हो लेकिन सिस्टम रसूखदारों के साथ है । इसकी एक बानगी पेटलावद के मांडन गांव में देखने को मिल रही है । बुजुर्ग मकना अपनी जमीन की फर्जी रजिस्ट्री को रद्द करवाने और जो इस फर्जीवाड़े खेल में शामिल है उनकी…

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Jhabua : सरकार गरीब आदिवासियो के लिए काम करने की बात भले ही कहती हो लेकिन सिस्टम रसूखदारों के साथ है । इसकी एक बानगी पेटलावद के मांडन गांव में देखने को मिल रही है । बुजुर्ग मकना अपनी जमीन की फर्जी रजिस्ट्री को रद्द करवाने और जो इस फर्जीवाड़े खेल में शामिल है उनकी गिरफ्तारी को लेकर दफ्तरों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर है ।

गरीब आदिवासी मकना दिसंबर 2025 से अपनी जमीन को लेकर दफ्तरों की चौखट पर माथा टेक रहे हैं । सुनवाई नहीं हो पा रही है । पहले एफआईआर के लिए चक्कर लगाए अब फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और इस फर्जीवाड़े में शामिल लोगों पर कार्रवाई के लिए चक्कर लगा रहे हैं । इस पूरी कवायद में मकना के जानवर तक बिक गए । आसपास के लोग उनके लिए दाने पानी का इंतजाम कर रहे हैं । लेकिन सुनवाई नहीं हो पा रही है ।

10 जुलाई को जब प्रभारी मंत्री कुंवर विजय शाह के झाबुआ आने की खबर मकना को लगी तो वे भी अपनी फरियाद लेकर उनके पास पहुंचे और पुलिस को कार्रवाई करने निर्देश देने की गुहार लगाई । प्रभारी मंत्री ने उनका आवेदन तो रख लिया लेकिन मकना की आस और उम्मीद अब भी अधूरी है ।

प्रभारी मंत्री जी ने इस गरीब की फरियाद सुनी जरूर, लेकिन क्या इस ‘सुनने’ से भ्रष्ट सिस्टम की जंग लगी मशीनरी में कोई हरकत हुई? जवाब है- नहीं! एक गरीब आदिवासी अपनी ही 2 बीघा जमीन वापस पाने के लिए दिसंबर 2025 से प्रशासन के हर छोटे-बड़े दफ्तर के चक्कर काट रहा है।

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Jhabua में दिसंबर 2025 से : मकना के संघर्ष अब भी जारी

  • इस पूरे फर्जीवाड़े में दलालों, सरकारी कर्मचारियों और प्रापर्टी से जुड़े कैसे काम करते हैं सामने आया । सरकारी डॉक्टर नरसिंह डाबी और प्रॉपर्टी ब्रोकर ने ‘माला’ नाम के व्यक्ति को फर्जी मकना बनाया। सेवा प्रदाता, गवाह और तत्कालीन उप पंजीयक ने आंखें मूंदकर फर्जी रजिस्ट्री कर दी। असली मकना को भनक तक नहीं लगी। दिसंबर 2025 में जब मकना को इस जालसाजी का पता चला, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह पटवारी से लेकर तहसील कार्यालय पेटलावद तक दौड़ा। चक्कर पर चक्कर काटे, लेकिन रसूखदार डॉक्टर के सामने किसी छोटे अफसर ने उसकी एक न सुनी।
  • जनसुनवाई और पुलिस की चौखट (जनवरी 2026 – मई 2026): थक-हारकर मकना जनसुनवाई में पहुंचा। कलेक्टर और एसपी के दर पर माथा टेका। जांच बैठी, जांच में फर्जीवाड़ा 100% सही पाया गया। आखिरकार पुलिस ने धोखाधड़ी की एफआईआर (अपराध क्रमांक 68/2026) दर्ज की, लेकिन रसूखदार डॉक्टर को गिरफ्तार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई।
  • : सुप्रीम कोर्ट से तमाचा और इनामी ‘फरार’ (जून 2026):आरोपियों की चालाकी देखिए, वे न्याय से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक गए, लेकिन वहां से भी अपील खारिज हो गई। झाबुआ एसपी ने आरोपियों पर 5-5 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया। लेकिन अब तक वे फरार ही हैं ।
  • प्रभारी मंत्री के दरबार में (10 जुलाई 2026):हारकर मकना फिर झाबुआ पहुंचा और प्रभारी मंत्री कुंवर विजय शाह के सामने धरने पर बैठ गया। मंत्री जी से मिलकर अपनी पूरी पीड़ा बताई।

अब सबसे बड़ा सवाल: कार्रवाई कब और कब मिलेगा मकना को उसका हक ?

प्रभारी मंत्री के संज्ञान में मामला आने के बाद भी पेटलावद पुलिस और जिला प्रशासन की सुस्ती जस की तस है।

  1. कार्रवाई कब? एक इनामी फरार आरोपी (डॉ. नरसिंह डाबी) पुलिस की पकड़ से बाहर कैसे हो सकता है? उन गवाहों और रजिस्ट्री करने वाले अफसरों पर एफआईआर कब होगी, जिनकी मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा हुआ?
  2. हक कब मिलेगा? मकना ने केस लड़ने के लिए अपने मवेशी बेच दिए हैं। अब उसे केस वापस लेने के लिए धमकाया जा रहा है। शासन-प्रशासन सिर्फ एफआईआर का झुनझुना पकड़ा कर शांत क्यों है? इस फर्जी रजिस्ट्री को शून्य (Cancel) घोषित करवाकर मकना को उसकी जमीन का मालिकाना हक वापस कब दिलाया जाएगा?

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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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