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CJP : कोकरोच पसंद ना पसंद से ऊपर मुद्दों की आवाज़ बन गया

CJP कोकरोच जनता पार्टी की शुरुआत एक तरह से देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की उस टिप्पणी के बाद हुई, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। इंस्टाग्राम पर शुरू हुई यह पहल देखते ही देखते जंतर-मंतर तक पहुंच गई। जिस मांग को लेकर अनशन शुरू हुआ, वह आखिरकार मान भी ली गई। यानी यह…

cjp cockroach janata party

CJP कोकरोच जनता पार्टी की शुरुआत एक तरह से देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की उस टिप्पणी के बाद हुई, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। इंस्टाग्राम पर शुरू हुई यह पहल देखते ही देखते जंतर-मंतर तक पहुंच गई। जिस मांग को लेकर अनशन शुरू हुआ, वह आखिरकार मान भी ली गई। यानी यह सिर्फ सोशल मीडिया का शोर नहीं था, बल्कि आंदोलन ने नतीजा भी दिया। आगे आने वाले समय में दूसरे मुद्दों पर भी सीजेपी मैदान में नजर आए, तो हैरानी नहीं होगी।

सच कहूं तो शुरुआत से ही कोकरोच जनता पार्टी CJP नाम कुछ खास जंचा नहीं। भले ही इसे मजाक या व्यंग्य में रखा गया हो, लेकिन पहली नजर में यह आकर्षित करने वाला नाम नहीं लगता। हालांकि पब्लिक रिलेशंस और ब्रांडिंग की दुनिया में यह भी माना जाता है कि कई बार नेगेटिव नाम या नेगेटिव मार्केटिंग भी लोगों का ध्यान खींचने का बड़ा जरिया बन जाती है। लेकिन इसकी भी एक सीमा होती है।

जिस कॉकरोच को घर में देखते ही अक्सर लोग घबरा जाते हैं, कई महिलाएं और लड़कियां तो चीख पड़ती हैं, उसी कॉकरोच के नाम पर एक आंदोलन खड़ा हो गया। यह अपने आप में दिलचस्प बात है। यहां मामला पसंद या नापसंद का नहीं रहा, बल्कि मुद्दा बड़ा हो गया। जब लोग किसी मुद्दे से जुड़ते हैं, तो नाम पीछे छूट जाता है।

वैसे, सीजेआई की टिप्पणी से अलग हटकर एक और पहलू भी दिखता है। आज की जेन ज़ी कार्टून देखते हुए बड़ी हुई है। Oggy and the Cockroaches शायद ही ऐसा कोई बच्चा हो जिसने न देखा हो। आज भी जेन अल्फा और जेन ज़ी के बीच यह कार्टून काफी लोकप्रिय है। इसलिए यह भी संभव है कि नाम रखने का विचार कहीं न कहीं इस कार्टून से प्रभावित रहा हो। हिंदी डबिंग में फिल्मी सितारों की आवाजों की मिमिक्री और मजेदार संवादों ने इसे भारत में अलग ही पहचान दिलाई। ओगी और कॉकरोच के बीच चलने वाली रोज की जंग, उनकी शरारतें और अजीबोगरीब हरकतें इस कार्टून की सबसे बड़ी पहचान हैं।

cjp cockroach janata party

जो भी हो, इस नाम ने देश के युवाओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। सोशल मीडिया से शुरू हुई बात सड़क तक पहुंची और आंदोलन ने नतीजा भी हासिल किया। किसी भी लोकतंत्र में यह दिखाता है कि अगर मुद्दा लोगों से जुड़ जाए और उसे सही तरीके से उठाया जाए, तो असर पैदा किया जा सकता है।

CJP के अभिजीत दीपके हैं पब्लिक रिलेशन में मास्टर्स

एक बात और ध्यान देने वाली है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके कोई सामान्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नहीं हैं। उन्होंने अमेरिका की Boston University से Master of Science in Public Relations की पढ़ाई की है। यानी जनसंपर्क, संचार, ब्रांडिंग और लोगों तक संदेश पहुंचाने की पेशेवर समझ उनके पास है। ऐसे में आंदोलन के नाम, उसकी पैकेजिंग, सोशल मीडिया रणनीति और लोगों का ध्यान खींचने के तरीके को केवल संयोग मान लेना शायद जल्दबाजी होगी।

आगे उनकी क्या रणनीति है, किन मुद्दों को लेकर वे जनता के बीच पहुंचेंगे सभी की इस पर नज़र है । क्योंकि इस आंदोलन के बाद उनकी जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है । लोग उनसे उम्मीद कर रहे हैं । अब इस आंदोलन के बाद उनके कामों कई पैमानों पर तोला जाएगा । विरोधी उनकी कमी या गलती को लपकने के लिए तैयार हैं ।

इससे भी ज्यादा उम्मीद है कि जिस पेपर लीक के मुद्दे पर युवा एकजुट और उनके पीछे बाकी लोग नजर ऐसे ही देश के दूसरे मुद्दे जिससे आम जनता प्रभावित हो रही है लेकिन वे मुद्दे खामोश हैं, उन्हें भी आवाज मिलेगी । ये विपक्ष के लिए भी सोचने का विषय है कि सीजेपी के साथ जो युवा जुड़ा वो उनके साथ क्यों नहीं । विपक्ष उनकी च्वाइस क्यों नहीं बन सका ।

बाकी तो जो है सो है ही ।

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virendra singh rathore
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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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