खबर का असर: उमरकोट पंचायत में एसडीएम पहुंचे, पंचनामे में खुली ‘महिला आरक्षण’  की पोल!

@jhabua post! झाबुआ जिले की रामा तहसील की उमरकोट ग्राम पंचायत में ‘सरपंच पति’ की मनमानी और उन पर  वसूली के आरोप लगे थे।  एक..

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@jhabua post! झाबुआ जिले की रामा तहसील की उमरकोट ग्राम पंचायत में ‘सरपंच पति’ की मनमानी और उन पर  वसूली के आरोप लगे थे।  एक लाचार पति से उसकी पत्नी के मृत्यु प्रमाण पत्र के बदले रिश्वत मांगने की खबर को ‘झाबुआ पोस्ट’ ने प्रमुखता से उठाया था। खबर के प्रकाशन के बाद सिस्टम हरकत में आया और प्रशासनिक अमले ने सीधे गांव में जाकर दस्तक दी। गांव वालों ने भी प्रशासन के सामने खुलकर अपनी भड़ास निकाली और एक ‘पंचनामा’ सौंपकर ‘सरपंच पति’ के रबर-स्टैंप राज की कलई खोल दी।

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एसडीएम की अचानक पहुंचे, गायब मिलीं महिला सरपंच

  मंगलवार को जनसुनवाई में कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने मामले गंभीरता से जांच कर कार्रवाई के निर्देश अफसरों को दिए थे। बुधवार, 13 मई 2026 को झाबुआ एसडीएम महेश मंडलोई, रामा तहसीलदार और जनपद सीईओ ने दल-बल के साथ उमरकोट ग्राम पंचायत  पहुंचे । जब अधिकारी पंचायत भवन पहुंचे, तो वहां चुनी हुई महिला सरपंच मौजूद ही नहीं थीं। हालात तो तब और हास्यास्पद हो गए, जब पंचायत सचिव द्वारा बुलावे और सूचना के बावजूद महिला सरपंच मुख्यालय पर उपस्थित नहीं हुईं।

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ग्रामीणों का ‘पंचनामा, सरपंच पति पर पंचायत चलाने का आरोप!

इतने बड़े अधिकारियों को अपने बीच पाकर ‘सरपंच पति’ के खौफ में जी रहे ग्रामीणों और पंचायत के पंचों को हिम्मत मिली। गांव के  दिनेश, भेरूलाल, रमेश, सुनील, अरुण सहित कई अन्य लोगों ने एकजुट होकर अधिकारियों को एक लिखित ‘पंचनामा’ सौंपा ।

इस पंचनामे में साफ तौर पर लिखा गया है कि पंचायत में महिला सरपंच  नहीं आतीं और उनकी अनुपस्थिति में उनका पति ही पंचायत के सारे काम करता है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब भी कोई ग्रामीण किसी सरकारी कागज़, आवेदन या प्रमाणीकरण (जैसे बद्रीनारायण का मृत्यु प्रमाण पत्र) के लिए जाता है, तो यह ‘सरपंच पति’ सीधे तौर पर रुपयों की डिमांड करता है।

‘नारी शक्ति’ के दावों की खुली पोल

यह मामला सिर्फ एक पंचायत के भ्रष्टाचार का नहीं है, बल्कि उस सिस्टम पर भी करारा तमाचा है जो महिलाओं के सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे करता है। मध्य प्रदेश में पंचायतों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू है। केंद्र सरकार ‘नारी शक्ति वंदन’ जैसे अभियान चला रही है, लेकिन उमरकोट की ज़मीनी हकीकत बता रही है कि महिला जनप्रतिनिधि आज भी केवल एक ‘रबर स्टैंप’ हैं। असली सत्ता की चाबी और  हंटर उनके पतियों के हाथों में है।

अब कार्रवाई का इंतज़ार

अब गेंद प्रशासन के पाले में है। पूरे गांव को इस बात का इंतज़ार है कि एसडीएम महोदय इस पंचनामे के आधार पर ‘सरपंच पति’ की मनमानी पर क्या कार्रवाई करते हैं। क्या कोई सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी, या यह मामला भी सिस्टम की भूल-भुलैया में खो जाएगा?

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