झाबुआ जिले के करवड़ नगर में प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी लोक देवता तेजाजी महाराज की जयंती तेजा दशमी का पर्व बड़े ही धूमधाम, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।

निशान यात्रा के साथ हुई शुरुआत
तेजा दशमी के पावन अवसर पर सुबह शुभ मुहूर्त में नगर के दोनों मंदिरों से पारंपरिक निशान यात्रा निकाली गई। ढोल-नगाड़ों के साथ निकली यह यात्रा पूरे नगर का भ्रमण करते हुए करवड़ के मुख्य तेजाजी मंदिर पर पहुंची। यात्रा के दौरान नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।
निशान यात्रा के मंदिर पहुंचने के बाद दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा। भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

ताती के धागे की अनोखी परंपरा
तेजा दशमी की सबसे बड़ी मान्यता जहरीले जीव-जंतुओं से जुड़ी है। मान्यता है कि जहरीले जीव के काटने पर तेजाजी महाराज के नाम का धागा बांधा जाता है, जिसे ग्रामीण अंचल में ‘ताती का धागा’ कहा जाता है। परंपरा के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को जहरीले जानवर ने काटा है तो वह तेजा दशमी के दिन ताती का धागा खोलकर अपनी श्रद्धा प्रकट करता है और मंदिर में माथा टेक कर तेजाजी महाराज को नमन करता है। करवड़ में भी सैकड़ों श्रद्धालुओं ने इस परंपरा का निर्वहन किया।
जागरण, नाटक और अखाड़े का आयोजन
करवड़ बस स्टैंड स्थित तेजाजी मंदिर पर शाम को तेजाजी महाराज के जीवन पर आधारित नाटक खेल का आयोजन किया गया। देर रात तक मंदिर पर जागरण चला। वहीं स्थानीय खेल मैदान पर अखाड़े का भी आयोजन हुआ, जिसे देखने के लिए आसपास के गांवों से भारी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। कार्यक्रम के समापन पर तेजाजी महाराज की महाआरती उतारी गई और प्रसादी का वितरण किया गया।

आयोजन को सफल बनाने में मंदिर समिति के सदस्यों ने दिन-रात मेहनत की। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस चौकी प्रभारी प्रहलाद सिंह चुंडावत ने अपने दलबल के साथ मोर्चा संभाले रखा, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।














