झाबुआ (Jhabua Post): ‘खेती घाटे का सौदा है’… यह बात आपने कई बार सुनी होगी। लेकिन अगर सही तकनीक, सही मार्गदर्शन और सबसे अहम— सही बीज मिल जाए, तो यही खेती बंपर मुनाफे की गारंटी बन जाती है। झाबुआ जिले में एक महिला किसान ने Pusa Vakula Wheat Jhabua की खेती कर इस बात को सच साबित कर दिखाया है।
झाबुआ विकासखंड के ग्राम बरोड की रहने वाली प्रगतिशील महिला कृषक श्रीमती खेतु पिसु ने कृषि विभाग की मदद से गेहूं की बायोफोर्टिफाइड किस्म ‘पुसा वकुला (HI-1636)’ बोई और ऐसे शानदार परिणाम हासिल किए कि आज वह पूरे इलाके के किसानों के लिए एक बड़ी प्रेरणा (Inspiration) बन गई हैं।
Pusa Vakula Wheat Jhabua: बरोड की खेतु पिसु ने कैसे बदल दी तस्वीर?
श्रीमती खेतु पिसु के पास लगभग 0.90 हेक्टेयर कृषि भूमि है। वे आम किसानों की तरह खरीफ में मक्का, सोयाबीन, कपास और रबी में गेहूं, चना व सब्जियां उगाती थीं। लेकिन इस बार कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में उन्होंने कुछ नया करने की ठानी। विभाग ने उन्हें Pusa Vakula Wheat Jhabua का प्रमाणित बीज उपलब्ध कराया और आधुनिक तरीके से खेती करने की ट्रेनिंग दी। खेतु पिसु ने विभाग की हर बात मानी और अपने एक एकड़ खेत में इस नई किस्म को बो दिया।

क्या है इस Pusa Vakula Wheat Jhabua की खासियत?
झाबुआ जिले में लगभग 1.02 लाख हेक्टेयर में गेहूं बोया जाता है, लेकिन ज्यादातर किसान पुरानी किस्म ही बोते हैं। यह ‘पुसा वकुला’ गेहूं किसी चमत्कार से कम नहीं है। जानिए क्यों:
- भरपूर पोषण (Biofortified): सामान्य गेहूं में जिंक की मात्रा 30-32 पीपीएम होती है, लेकिन इसमें 40.4 पीपीएम जिंक होता है, जो सेहत के लिए वरदान है।
- कम पानी की जरूरत: झाबुआ जैसे इलाके के लिए यह एकदम सही है, क्योंकि इसे सिंचाई की कम जरूरत पड़ती है।
- बीमारियों से बचाव: इस गेहूं में पर्ण रतुआ रोग नहीं लगता, कीटों का प्रकोप कम होता है और फसल आंधी-पानी में जल्दी गिरती भी नहीं है।
- ज्यादा पैदावार: यह किस्म पुरानी किस्मों के मुकाबले 10 से 16 प्रतिशत तक ज्यादा उत्पादन देती है। इसकी चपाती और ब्रेड भी बहुत शानदार बनती है।
Pusa Vakula Wheat Jhabua: लागत और मुनाफे का पूरा गणित
खेतु पिसु ने एक एकड़ में आधुनिक तरीके (संतुलित खाद, उचित पौध संख्या) से इस गेहूं की खेती की। आइए देखते हैं मुनाफे का पूरा हिसाब-किताब:
- कुल खर्च (लागत): जुताई, बुवाई, खाद, कटाई और गहाई सब मिलाकर सिर्फ 17,620 रुपये।
- कुल उत्पादन: 1 एकड़ से 18.10 क्विंटल शानदार गेहूं निकला।
- कुल कमाई: 2,625 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से गेहूं बिका, जिससे कुल 47,512 रुपये की आय हुई।
- शुद्ध मुनाफा: 17,620 रुपये का खर्च निकालकर खेतु पिसु को 31,892 रुपये का सीधा और शुद्ध मुनाफा (Net Profit) हुआ।
लागत और मुनाफे का यह अनुपात 1:1.8 रहा, जो साबित करता है कि यह गेहूं किसानों के लिए फायदे का सौदा है।
महिला किसानों से की खास अपील
इस शानदार सफलता के बाद श्रीमती खेतु पिसु अब आस-पास के किसानों को भी जागरूक कर रही हैं। उनका कहना है कि किसान ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’ (Soil Health Card) के हिसाब से खाद डालें और प्रमाणित बीज का ही इस्तेमाल करें। उन्होंने खास तौर पर गांव की महिलाओं से अपील की है कि वे आगे आएं और कृषि विभाग की सरकारी योजनाओं का पूरा फायदा उठाएं। उनकी इस सक्सेस स्टोरी को देखकर अब गांव के कई किसान अगली बार अपने खेतों में यही गेहूं बोने की तैयारी कर रहे हैं।
ताजा और विस्तृत खबरों के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएं: www.jhabuapost.com
‘झाबुआ पोस्ट’ (Jhabua Post) के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें:
📲 WhatsApp चैनल: यहाँ क्लिक कर फॉलो करें
📘 Facebook पेज: यहाँ क्लिक कर लाइक करें
▶️ YouTube चैनल: यहाँ क्लिक कर सब्सक्राइब करें
🚨 आपके आस-पास भी है किसी किसान की ऐसी सक्सेस स्टोरी?
हमें सीधे WhatsApp पर भेजें: 👉 9407154083 पर मैसेज करने के लिए यहाँ क्लिक करें














