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रतलाम की विरासत गुलाब चक्कर गुलाबी रोशनी में नहाया, जीर्णोद्धार के साथ आमजन के लिए खोला गया

रतलाम। रतलाम शहर की ऐतिहासिक और भावनात्मक पहचान गुलाब चक्कर अब एक नए, आकर्षक रूप में शहरवासियों के सामने है। कलेक्टर श्री राजेश बाथम की पहल और जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के सहयोग से इसका जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण पूर्ण किया गया। रविवार शाम इसका भव्य शुभारंभ किया गया, जहां एसएएफ इंदौर के सुप्रसिद्ध…

रतलाम की विरासत गुलाब चक्कर गुलाबी रोशनी में नहाया

रतलाम। रतलाम शहर की ऐतिहासिक और भावनात्मक पहचान गुलाब चक्कर अब एक नए, आकर्षक रूप में शहरवासियों के सामने है। कलेक्टर श्री राजेश बाथम की पहल और जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के सहयोग से इसका जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण पूर्ण किया गया। रविवार शाम इसका भव्य शुभारंभ किया गया, जहां एसएएफ इंदौर के सुप्रसिद्ध पुलिस बैंड की प्रस्तुतियों ने ऐतिहासिक यादों को जीवंत कर दिया।

गुलाबी रोशनी में दमका गुलाब चक्कर

कार्यक्रम की शुरुआत पुलिस बैंड की धुनों से हुई, जिसके बाद गुलाब चक्कर की लाइट एंड साउंड प्रणाली का संगीतमय प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में नागरिक, अधिकारी और विशिष्टजन उपस्थित रहे।

अब हर शाम सूर्यास्त के 10 मिनट बाद और रात 9:30 बजे, लाइट एंड साउंड शो नियमित रूप से होगा। परिसर को शुरुआती महीनों तक लगभग निःशुल्क उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि आगे भी किराया अन्य स्थलों की तुलना में कम रखा जाएगा।

रतलाम की विरासत गुलाब चक्कर गुलाबी रोशनी में नहाया

सांस्कृतिक गतिविधियों का बनेगा केंद्र

गुलाब चक्कर परिसर में जल्द ही दो ओपन एयर रेस्टोरेंट भी शुरू किए जाएंगे। साथ ही आगामी दिनों में पतंजलि योगपीठ की शाखा द्वारा योग कक्षाएं, गीत-संगीत के कार्यक्रम, आर्केस्ट्रा, कला और साहित्यिक आयोजन, पेंटिंग, फोटोग्राफी, फ्लावर शो, खादी ग्रामोद्योग, हस्तशिल्प प्रदर्शनियां, पुस्तक मेले और आनंद उत्सव जैसे आयोजन किए जाएंगे।

रतलाम की विरासत गुलाब चक्कर गुलाबी रोशनी में नहाया

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

गुलाब चक्कर का निर्माण सन् 1879 में महाराजा रणजीत सिंह ने अपनी पुत्री गुलाब कंवर की स्मृति में करवाया था। इस गोलाकार संरचना के चारों कोनों पर मीनारों जैसी आकृतियां हैं, जिन पर फूलों की नक्काशी की गई है। यह चतुष्कोणीय संरचना किसी भी कोण से देखने पर एक समान दृश्य प्रदान करती है।

पहले यहां शाम को रोशनी होती थी और महाराजा जब टेनिस खेलते थे, तो पास ही सरकारी बैंड की मधुर ध्वनि गूंजा करती थी। परिसर में कभी गुलाब की खुशबू वाले फव्वारे, चिड़ियाघर, और अन्य मनोरंजक सुविधाएं हुआ करती थीं।

प्रसिद्ध पत्थर की कहानी

इस परिसर में रखा साढ़े चार क्विंटल वजनी पत्थर भी रतलाम की खास विरासत है, जिसे पंजाब के पहलवान गुलाम मोहम्मद ने 1900 में रणजीत विलास पैलेस से मित्र निवास भवन तक ले जाने का प्रयास किया था। यह पत्थर आज भी गुलाब चक्कर में विराजमान है।

सहयोग और भागीदारी

इस परियोजना को साकार करने में मध्यप्रदेश शासन, जन भागीदारी मद, इप्का के CSR फंड, और जन सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में कलेक्टर श्री राजेश बाथम के साथ डीआईजी श्री मनोज सिंह, सीईओ जिला पंचायत श्री श्रृंगार श्रीवास्तव, एसडीएम श्री अनिल भाना, समाजसेवी श्री गोविंद काकानी सहित बड़ी संख्या में अधिकारी और आमजन उपस्थित रहे।

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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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