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फर्जी दस्तावेजों का खेल: सलमान लाला की गिरफ्तारी ने खोली पोल

फर्जी दस्तावेजों का खेल मध्य प्रदेश के नागदा का कुख्यात अपराधी सलमान लाला आखिरकार उज्जैन पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस ने उसे 25 लाख रुपये की एमडी ड्रग्स की तस्करी करते हुए गिरफ्तार किया। सलमान लाला पर मध्य प्रदेश और राजस्थान में कई संगीन अपराध दर्ज थे, और उसके सिर पर कुल 60 हजार…

फर्जी दस्वेजों का खेल, पुलिस की खुली पोल ।

फर्जी दस्तावेजों का खेल

मध्य प्रदेश के नागदा का कुख्यात अपराधी सलमान लाला आखिरकार उज्जैन पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस ने उसे 25 लाख रुपये की एमडी ड्रग्स की तस्करी करते हुए गिरफ्तार किया। सलमान लाला पर मध्य प्रदेश और राजस्थान में कई संगीन अपराध दर्ज थे, और उसके सिर पर कुल 60 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

कैसे पकड़ा गया सलमान लाला? पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सफेद रंग की स्कोडा कार में एक संदिग्ध व्यक्ति मादक पदार्थ लेकर भागने की फिराक में है। उज्जैन पुलिस की क्राइम ब्रांच, साइबर सेल और नागदा मंडी थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर ग्राम बनवाड़ा में उसे दबोच लिया। तलाशी में पुलिस को 25.83 ग्राम एमडी ड्रग्स, एक स्कोडा कार और दो मोबाइल फोन बरामद हुए।

झाबुआ से जुड़े सलमान लाला के तार पुलिस जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ कि सलमान लाला ने झाबुआ के थांदला में खुद को वार्ड क्रमांक 13 का निवासी बताते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इन दस्तावेजों के आधार पर उसने अपने, अपनी पत्नी और बच्चों के लिए फर्जी पासपोर्ट बनवाया और दुबई भाग गया।

झाबुआ में फर्जी दस्तावेजों का खेल, आखिर कैसे बने फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट?

झाबुआ में फर्जी दस्तावेजों के सहारे फरारी काटने के पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं। गोधरा कांड का आरोपी हुसैन सुलेमान 14 साल तक झाबुआ में ऑटो चालक बनकर रह रहा था और यहां से उसने अपना राशन कार्ड तक बनवा लिया था। 2015 में गोधरा पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, लेकिन उसे शरण देने और फर्जी दस्तावेज बनाने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। हाल ही में खाचरोद थाना पुलिस ने अपहरण और फिरौती के मामले में झाबुआ में छिपे अपराधियों को पकड़ा था, लेकिन स्थानीय पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

फर्जी दस्तावेजों का खेल: सलमान लाला की गिरफ्तारी ने खोली पोल

झाबुआ में आखिर कैसे बनते हैं फर्जी दस्तावेज? फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी बनवाने में स्थानीय अधिकारियों और दलालों की संलिप्तता सामने आती रही है। पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया में पुलिस सत्यापन अनिवार्य होता है, लेकिन सवाल उठता है कि आखिर पुलिस की नजरों से यह गड़बड़ी कैसे बच गई?

पुलिस की भूमिका पर सवाल

  • सलमान लाला ने फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट बनवाया, तो क्या पुलिस सत्यापन में लापरवाही हुई?
  • झाबुआ में बार-बार अपराधी कैसे छिपते हैं, क्या स्थानीय पुलिस और प्रशासन इसमें मिलीभगत रखता है?
  • फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट बनाने वालों पर क्या कार्रवाई होगी?

उज्जैन पुलिस अब सलमान लाला के फर्जी दस्तावेजों की जांच कर रही है। झाबुआ में बने आधार कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट कैसे तैयार हुए, इसकी भी तहकीकात होगी। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या जिले की पुलिस इस बार दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी या यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

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virendra singh rathore
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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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