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झाबुआ में कृषि नवाचार: मिली सौगातें, ब्लूबैरी में संभावनाएं, कुलपति  बोले- ‘कमरे से शुरू हुआ KVK आज कृषि महाविद्यालय के लायक’

झाबुआ। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय (RVSKVV), ग्वालियर के कुलपति प्रो. ए. के. शुक्ला ने झाबुआ कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्र..

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झाबुआ। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय (RVSKVV), ग्वालियर के कुलपति प्रो. ए. के. शुक्ला ने झाबुआ कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्र के किसानों के लिए कई बड़े कृषि नवाचारों की जानकारी दी। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई छगनभाई पटेल के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति ने जहां नई कृषि तकनीकों के बारे में बताया, वहीं झाबुआ केवीके के ऐतिहासिक विस्तार की भी सराहना की।

1984 में एक कमरे से शुरू हुआ केवीके, आज विशाल परिसर में तब्दील

कुलपति डॉ. ए.के. शुक्ला ने झाबुआ केवीके के सफर का जिक्र करते हुए बताया कि इसकी स्थापना वर्ष 1984 में हुई थी। महज एक छोटे से कमरे से शुरू हुआ यह कृषि विज्ञान केंद्र आज काफी फैल गया है। इसके विशाल परिसर और उपलब्ध जगह की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में केवीके के पास इतना बड़ा स्थान है कि यहां एक कृषि महाविद्यालय (Agriculture College) भी संचालित किया जा सकता है।

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हवा में आलू और बिना मिट्टी के ब्लूबेरी

कृषि नवाचारों पर बात करते हुए कुलपति प्रो. शुक्ला ने कहा कि झाबुआ और आलीराजपुर की उथली और कंकरीली-पथरीली जमीन को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने एरोपोनिक्स और हाइड्रोपोनिक्स जैसी तकनीकों पर काम शुरू कर दिया है। उन्होंने एक बड़ी उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि अब हवा में आलू उगाने की तकनीक विकसित कर ली गई है। इसके अलावा, विदेशी फसल ब्लूबेरी का प्रोजेक्ट भी यहां सफल रहा है और भविष्य में बिना मिट्टी के भी ब्लूबेरी उगाने की तैयारी है।

मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट और इंटीग्रेटेड फार्मिंग

उन्होंने जानकारी दी कि आलीराजपुर में एक नए बीज गोदाम और इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम का उद्घाटन किया गया है, ताकि किसानों को हर दिन कुछ नया मिले और उनकी आय के स्रोत बढ़ें। आईआईएमआर (IIMR) हैदराबाद के सहयोग से आलीराजपुर में एक मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट भी लगाई जा रही है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक केवीके में 2 हेक्टेयर में मिलेट्स (श्री अन्न) उगाए जा रहे हैं।

​कार्यक्रम के दौरान आईएआरआई (IARI) नई दिल्ली के सहयोग से करीब 300 किसानों को विभिन्न कृषि आदान (इनपुट्स) भी प्रदान किए गए। कुलपति ने जोर देते हुए कहा कि केवीके का मुख्य फोकस अब बिना रासायनिक खाद की खेती और पेस्टिसाइड का उपयोग कम करने पर है, जिससे किसानों की आय बढ़े और आम जनता का स्वास्थ्य भी बेहतर रहे।

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