झाबुआ: लोकायुक्त मामले में सख्त फैसला, सहकारी संस्था के तत्कालीन प्रबंधक को 4 साल की जेल

झाबुआ। प्रथम अपर सत्र न्यायालय एवं विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) झाबुआ ने रिश्वतखोरी के एक पुराने मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने..

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झाबुआ। प्रथम अपर सत्र न्यायालय एवं विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) झाबुआ ने रिश्वतखोरी के एक पुराने मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने आदिम जाति सेवा सहकारी संस्था मर्यादित, काकनवानी (थाना थांदला) के तत्कालीन प्रबंधक लवलेश कुमार राठौड़ को 4 साल के कारावास और 10,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह निर्णय माननीय न्यायाधीश श्री राजेन्द्र कुमार शर्मा की कोर्ट द्वारा गुरुवार 12 मार्च को पारित किया गया।

सेवा बहाली के बदले मांगी थी 1 लाख की रिश्वत

जिला लोक अभियोजन अधिकारी (सहायक निदेशक) श्री महेश पटेल ने बताया कि शिकायतकर्ता प्रमोद कुमार राठौर ने सेवा में बहाली के लिए 16 अगस्त 2016 को उपायुक्त सहकारी संस्था झाबुआ को आवेदन दिया था। इस पर विचार करते हुए उपायुक्त ने 27 अगस्त 2016 को पूर्व आदेश को निरस्त कर शिकायतकर्ता को पुनः सेवा में लिए जाने का आदेश जारी किया। जब फरियादी यह आदेश लेकर तत्कालीन प्रबंधक लवलेश कुमार (पिता बाबुलाल राठौड़) के पास काकनवानी संस्था पहुंचा, तो उसने आदेश का पालन करने और बहाली पत्र निकालने के एवज में 1,00,000 रुपये की रिश्वत मांगी।

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आदेश रोकने और अपील करने की दी थी धमकी

आरोपी प्रबंधक लवलेश राठौड़ ने फरियादी पर दबाव बनाते हुए स्पष्ट कहा था कि 1 लाख रुपये ही लगेंगे। जब फरियादी ने पैसों की व्यवस्था न होने की बात कही, तो आरोपी ने धमकी दी कि यदि जल्द पैसों की व्यवस्था नहीं की गई, तो वह बहाली का आदेश नहीं निकालेगा और जे.आर. कोर्ट में अपील कर देगा। फरियादी रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त कार्यालय, इंदौर में इसकी शिकायत दर्ज करा दी।

ठोस साक्ष्यों के आधार पर मिली सजा

लोकायुक्त पुलिस ने मामले की जांच कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया और अनुसंधान पूर्ण कर विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। विचारण के दौरान अभियोजन ने मामले को प्रमाणित करने के लिए न्यायालय में अहम साक्ष्य और गवाह पेश किए।

​न्यायालय ने अभियोजन के साक्ष्यों को प्रमाणित मानते हुए आरोपी लवलेश राठौड़ को पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से रिश्वत मांगने का दोषी पाया। न्यायालय ने उसे धारा 7, 13(1)डी सहपठित धारा 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 4 वर्ष की सजा और 10,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। इस प्रकरण में शासन की ओर से सशक्त पैरवी जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री महेश पटेल एवं विशेष लोक अभियोजक (एडीपीओ) श्री राजेन्द्र पालसिंह अलावा द्वारा की गई।

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