झाबुआ: अगर आप भी अपनी गाड़ी बिना नंबर प्लेट के, या फिर नंबर छुपाकर धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ा रहे हैं, तो अब सावधान हो जाइए। झाबुआ में अब ऐसी गाड़ियों का सिर्फ चालान नहीं कटेगा, बल्कि उन्हें सीधे राजसात (ज़ब्त) कर लिया जाएगा। सड़क हादसों में जा रही बेकसूरों की जान बचाने और यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए जिला प्रशासन ने अब बेहद सख्त रवैया अपना लिया है।
शुक्रवार को कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति की एक अहम बैठक हुई। एसपी देवेन्द्र पाटीदार और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस बैठक में सड़क दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत तक की कमी लाने का बड़ा लक्ष्य तय किया गया है, और इसी कड़ी में बिना नंबर वाले वाहनों पर सबसे बड़ी गाज गिरने वाली है।
बिना नंबर की गाड़ियां क्यों हैं रडार पर? सीधे ज़ब्त करने के आदेश
बैठक में आंकड़ों की समीक्षा के दौरान सामने आया कि पुलिस अब तक बिना नंबर प्लेट वाले 396 वाहनों के चालान काट चुकी है, लेकिन हादसों और अपराधों को रोकने के लिए यह काफी नहीं है। कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिए हैं कि ऐसी गाड़ियों को सीधे ज़ब्त करने की कार्रवाई की जाए।
दरअसल, बिना नंबर की गाड़ियां पुलिस और प्रशासन के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द हैं:
- हादसा करके भागना आसान: ‘हिट एंड रन’ के मामलों में बिना नंबर वाली गाड़ियां पलक झपकते ही गायब हो जाती हैं। नंबर न होने से न तो मौके पर मौजूद लोग गाड़ी की पहचान कर पाते हैं और न ही सीसीटीवी (CCTV) कैमरे उन्हें पकड़ पाते हैं।
- अपराधियों की पहली पसंद: शातिर अपराधी लूट, चोरी और शराब तस्करी जैसी वारदातों को अंजाम देने के लिए इन्हीं गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं।
- कैमरों को चकमा देना: हाईवे और चौराहों पर लगे ऑटोमैटिक ई-चालान कैमरे इन्हें ट्रैक नहीं कर पाते, जिससे ये बेखौफ होकर ओवरस्पीडिंग करते हैं।
अब ऐसे वाहन चालकों पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ₹5,000 तक का भारी जुर्माना तो लगेगा ही, साथ ही गाड़ी भी थाने में खड़ी कर ली जाएगी।

डराने वाले हैं हादसे के आंकड़े, 50% कमी लाने का लक्ष्य
बैठक में पिछले साल बारिश के मौसम (जून, जुलाई और अगस्त) में हुए हादसों की रिपोर्ट पेश की गई, जो बेहद डराने वाली है। इन तीन महीनों में जिले में 229 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 63 लोगों की जान चली गई और 280 लोग घायल हुए। इन मौतों पर गहरी चिंता जताते हुए कलेक्टर ने इस साल इन हादसों और मौतों के आंकड़े को कम से कम 50 प्रतिशत तक नीचे लाने का टारगेट सेट किया है।
जिले में अब तक अलग-अलग नियमों को तोड़ने पर 11,712 चालान काटे जा चुके हैं (जिनमें 7,200 बिना हेलमेट और 737 बिना सीट बेल्ट के हैं)। अब हेलमेट पहनने को लेकर एक बड़ा जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
ब्लैक स्पॉट पर 7 दिन का अल्टीमेटम, अस्पताल नहीं कर सकेंगे इलाज से मना
हादसों को रोकने के लिए प्रशासन ने सिर्फ चालान तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि सड़कों की इंजीनियरिंग और मेडिकल सुविधाओं पर भी कड़े फैसले लिए हैं:
- फूलमाल फाटा (ब्लैक स्पॉट): यहां सड़क किनारे हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए 7 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। दाहोद की ओर से आने वाले वाहनों की रफ्तार कम करने के लिए तुरंत रम्बल स्ट्रिप (स्पीड ब्रेकर) लगाए जाएंगे।
- पारा फाटा टी-जंक्शन: इसे भी दुर्घटना संभावित क्षेत्र मानते हुए यहां गति अवरोधक बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
- NHAI को निर्देश: नेशनल हाईवे अथॉरिटी को झाबुआ क्षेत्र में पेट्रोलिंग बढ़ाने और सही जगह पर चेतावनी बोर्ड लगाने को कहा गया है।
- गोल्डन ऑवर (Golden Hour) का नियम: कलेक्टर ने सभी अस्पतालों को दो टूक चेतावनी दी है कि हादसे के बाद शुरुआती एक घंटा (गोल्डन ऑवर) जान बचाने के लिए सबसे अहम होता है। कोई भी अस्पताल घायल व्यक्ति को तुरंत इलाज देने से मना नहीं करेगा। प्रधानमंत्री कैशलेस उपचार योजना के तहत क्लेम समय पर पास किए जाएंगे।
इसके अलावा, बसों में ओवरलोडिंग रोकने के लिए बस ऑपरेटरों की क्लास लगाई जाएगी। बैठक में राणापुर बस स्टैंड से अतिक्रमण हटाने के लिए वहां की नगर पालिका की तारीफ की गई और झाबुआ बस स्टैंड से भी जल्द अतिक्रमण साफ करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
इस अहम बैठक में अपर कलेक्टर सी.एस. सोलंकी, सहायक कलेक्टर आयुषी बंसल, SDM महेश मण्डलोई और जिला परिवहन अधिकारी कृतिका मोहटा सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
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