​झाबुआ के ये स्कूली बच्चे छुट्टियों में सीख रहे भविष्य की तकनीक

​झाबुआ: शिक्षा अब केवल किताबी ज्ञान और चार दीवारी तक सीमित नहीं रह गई है। आज का युग कौशल (Skill) और नवाचार (Innovation) का है। इसी बात को सच कर दिखाया है झाबुआ के केशव इंटरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों ने। ​जहाँ एक तरफ ज़्यादातर बच्चे अपनी छुट्टियों में खेल-कूद या मोबाइल में समय बिताते हैं,…

71 लाख की अवैध शराब और ट्रक जब्त राणा 20260603 151515 0000

झाबुआ: शिक्षा अब केवल किताबी ज्ञान और चार दीवारी तक सीमित नहीं रह गई है। आज का युग कौशल (Skill) और नवाचार (Innovation) का है। इसी बात को सच कर दिखाया है झाबुआ के केशव इंटरनेशनल स्कूल के विद्यार्थियों ने।

​जहाँ एक तरफ ज़्यादातर बच्चे अपनी छुट्टियों में खेल-कूद या मोबाइल में समय बिताते हैं, वहीं इस स्कूल की रोबोटिक्स एवं इनोवेशन लैब में नन्हें वैज्ञानिक रियल लाइफ (Real Life) समस्याओं के तकनीकी समाधान खोजने में जुटे रहे। कम उम्र में ही इन बच्चों का यह तकनीकी ज्ञान और आत्मविश्वास शिक्षा के क्षेत्र में एक नई और प्रेरणादायी मिसाल पेश कर रहा है।

71 लाख की अवैध शराब और ट्रक जब्त राणा 20260603 151515 0000

युवा इनोवेटर्स और उनके प्रोजेक्ट्स

​विद्यालय के रोबोटिक्स प्रशिक्षक पवनेंद्र सिंह सिसोदिया के मार्गदर्शन में इन स्कूली बच्चों ने अपनी सोच को हकीकत का रूप दिया है। कक्षा 5वीं से लेकर 10वीं तक के इन युवा इनोवेटर्स— अविरल टवली (कक्षा 8), अमोघ भारद्वाज (कक्षा 10), नैतिक सोनी (कक्षा 9), विरम मोदी (कक्षा 8), भाविक खतेड़िया (कक्षा 5) और रुद्र लोखंडे (कक्षा 8)— ने मिलकर कई शानदार और भविष्योन्मुखी प्रोजेक्ट तैयार किए हैं।

​इनकी रचनात्मक सोच से निकले प्रमुख प्रोजेक्ट्स में शामिल हैं:

  • पर्यावरण के अनुकूल गैजेट्स: सोलर फैन और रिचार्जेबल हैंडी फैन।
  • स्मार्ट मोबिलिटी: ब्लूटूथ कंट्रोल स्मार्ट कार और बाधाओं से खुद को बचाने वाली ‘ऑब्स्टेकल अवॉइडिंग कार’ (Obstacle Avoiding Car)।
  • कृषि और स्वास्थ्य तकनीक: ऑटोमैटिक फॉगर सिस्टम (Automatic Fogger System) और ड्रोन।

आकर्षण का केंद्र: बच्चों की बनाई ‘मोटराइज्ड साइकिल’

​इन सभी प्रोजेक्ट्स में सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है बच्चों द्वारा खुद से विकसित की गई एक ‘मोटराइज्ड साइकिल’ ने। यह सामान्य साइकिल की तरह पैडल से भी चलती है, लेकिन कठिन और चढ़ाई वाले रास्तों पर इसमें लगा इंजन इसे एक मोटर-वाहन में तब्दील कर देता है। यह इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि बच्चे सिर्फ तकनीक सीख नहीं रहे, बल्कि उसे आम जिंदगी की सहूलियत के लिए इस्तेमाल भी कर रहे हैं।

​बच्चे बेहतर सीखें, छुट्टियों का सही उपयोग

​इस इनोवेशन लैब का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को रटंत विद्या से निकालकर ‘प्रॉब्लम सॉल्विंग’ (Problem Solving) अप्रोच की तरफ ले जाना है।

​🗣️ विद्यालय संचालक अथर्व शर्मा का विजन है कि “हाथों से सीखना, दिमाग से सोचना और समाज के लिए समाधान बनाना — यही भविष्य की वास्तविक शिक्षा है।”

​🗣️ प्राचार्य शालू जैन का कहना कि “आने वाले समय में विद्यालय में और भी कई रियल-लाइफ प्रॉब्लम सॉल्विंग प्रोजेक्ट्स पर कार्य किया जाएगा। हमारा लक्ष्य विद्यार्थियों को उद्योगों की मांग और भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप पूरी तरह तैयार करना है।”

​🗣️ उपप्राचार्य जितेंद्र खतेडिया मानते हैं कि जहाँ सभी बच्चे छुट्टियाँ मना रहे थे, वहीं हमारे युवा इनोवेटर्स भविष्य की तकनीक गढ़ रहे थे। यही लगन इन्हें कल का सफल लीडर बनाएगी।”

​आज जब पूरी दुनिया कौशल आधारित शिक्षा (Skill-Based Education) की ओर तेजी से बढ़ रही है, केशव इंटरनेशनल स्कूल का यह प्रयास अन्य विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। यह साबित करता है कि अगर बच्चों को सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलें, तो वे किसी भी समस्या का समाधान खोज सकते हैं।

ताजा और त्वरित अपडेट्स के लिए ‘झाबुआ पोस्ट’ (Jhabua Post) से जुड़ें:

📲 WhatsApp चैनल: यहाँ क्लिक कर फॉलो करें

📘 Facebook पेज: यहाँ क्लिक कर लाइक करें

▶️ YouTube चैनल: यहाँ क्लिक कर सब्सक्राइब करें

🚨 आपके आस-पास भी है कोई खबर, इनोवेशन या सूचना?

हमें सीधे WhatsApp पर भेजें: 👉 9407154083 पर मैसेज करने के लिए यहाँ क्लिक करें

लेखक के बारे में

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

About the Author

virendra singh rathore
virendra singh rathore

virendra singh rathore

संस्थापक और संपादक

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports