झाबुआ (Jhabua Post): झाबुआ बस स्टैंड की खस्ताहाल यातायात व्यवस्था किसी से छिपी नहीं है। कुछ दिन सुधार की कवायद होती है और फिर हालात उसी पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं। सबसे बड़ी समस्या अवैध पार्किंग की है, और जब यह पार्किंग सत्ता पक्ष के नेताओं और खुद पुलिस विभाग की तो ट्राफिक जवान भी बेबस नजर आते हैं,आम जनता का परेशान होती है।
मंगलवार शाम झाबुआ बस स्टैंड पर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जिससे ये बात तो साफ है कि यातायात पुलिस बस स्टैंड पर अवैध पार्किंग रोकने में नाकाम साबित हो रही है ।
मंगलवार शाम को बस स्टैंड स्थित यात्री प्रतीक्षालय के ठीक सामने रास्ते के बीचों-बीच दो वाहन पार्क कर दिए गए। वाहन चालक गाड़ियां बीच रास्ते में खड़ी करके वहां से चले गए। युवा मोर्चे के वाहन में एक शख्स आराम भी फरमा रहा था । व्यस्त समय होने के कारण बस स्टैंड से गुजरने वाले अन्य वाहनों और यात्रियों को 30 मिनट से भी ज्यादा समय तक भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

एक वाहन सत्ताधारी नेता का, दूसरा खुद पुलिस का
जब ‘झाबुआ पोस्ट’ (Jhabua Post) के कैमरे ने इस अव्यवस्था की तस्वीरें कैद कीं, तो सच्चाई सामने आई। रास्ते में जाम लगाने वाला पहला वाहन भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष कुलदीप चौहान का था।उसी के ठीक पीछे नियम तोड़कर खड़ी दूसरी गाड़ी कुंदनपुर पुलिस चौकी की थी। उसके पास में ही कुछ और वाहन भी पार्क किए हुए, ये बसों के लिए निर्धारित जगह है ।
ट्रैफिक पुलिस की बेबसी: अपने और सत्ता के आगे नतमस्तक!
मीडिया का कैमरा देख बस स्टैंड पर तैनात एक ट्रैफिककर्मी मौके पर पहुंचा। उसने वहां बेतरतीब खड़े कुछ अन्य सामान्य वाहनों को तो तुरंत हटा दिया। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि ट्रैफिक जवान के बार-बार कहने के बावजूद युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष की गाड़ी वहां से टस से मस नहीं हुई।
रही-सही कसर कुंदनपुर चौकी के पुलिस वाहन ने पूरी कर दी। चूँकि वह वाहन भी उसी वीआईपी गाड़ी के पीछे खड़ा था, तो पुलिस का एक जवान अपनी ही पुलिस की गाड़ी को हटाने के लिए भला कैसे सख्ती दिखाता? यह बेबसी और अव्यवस्था का सिलसिला काफी देर तक यूं ही चलता रहा और जनता परेशान होती रही।

यातायात विभाग के जिम्मेदारों से उठते हैं ये सवाल:
क्या युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष और पुलिस वाहन के चालकों को यह बुनियादी बात नहीं पता कि बस स्टैंड पहले से ही वाहनों की आवाजाही काफी होती है, ऐसे रास्ते के बीच वाहन पार्क करने से जनता को कितनी परेशानी होगी?
क्या नियम-कानून सिर्फ आम जनता के लिए बने हैं ,अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या झाबुआ यातायात पुलिस (Jhabua Traffic Police) के अधिकारी सत्ता के इन रसूखदारों और अपने ही विभाग के वाहन पर कोई चालानी कार्रवाई करने की हिम्मत जुटा पाएंगे?
यातायात सुधार की तमाम कवायदें झाबुआ में चल रही हैं, लेकिन जब तक सत्ता के समर्थकों और खाकी को नियमों के दायरे में नहीं लाया जाएगा, तब तक सुधार की ये बातें सिर्फ खोखले दावे ही साबित होंगी।
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