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झाबुआ: जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने किया थांदला सिविल अस्पताल का निरीक्षण

झाबुआ/थांदला: ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और सुलभ बनाने के उद्देश्य से झाबुआ के जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) डॉ. देवेन्द्र भायल ने थांदला के सिविल अस्पताल का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं, मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और रिकॉर्ड्स का बारीकी से जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक…

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झाबुआ/थांदला: ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और सुलभ बनाने के उद्देश्य से झाबुआ के जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) डॉ. देवेन्द्र भायल ने थांदला के सिविल अस्पताल का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं, मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और रिकॉर्ड्स का बारीकी से जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सीबीएमओ (CBMO) थांदला डॉ. बी. एस. डावर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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​निरीक्षण की मुख्य बातें और DHO के निर्देश:

​1. ओपीडी (OPD) और मरीजों की सुविधाएं

​निरीक्षण के दिन अस्पताल की ओपीडी में कुल 251 मरीजों का पंजीयन पाया गया। DHO डॉ. भायल ने मरीजों की संख्या बढ़ाने और जनसामान्य तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया।

  • निर्देश: मरीजों को समय पर उचित चिकित्सकीय परामर्श और दवाओं की शत-प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

​2. आयुष्मान भारत योजना: लापरवाही पर होगी कार्रवाई

​अप्रैल माह में अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत 115 प्रकरण पंजीकृत पाए गए। हालांकि, इस योजना के क्रियान्वयन में कुछ कमियां सामने आईं:

  • लापरवाही पर एक्शन: 2 में से 1 ‘आयुष्मान मित्र’ ड्यूटी से नदारद मिला, जिस पर DHO ने तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
  • विशेष अभियान: आयुष्मान कार्ड जनरेशन का लक्ष्य अपेक्षा से कम होने पर नाराजगी जताते हुए, सभी ओपीडी मरीजों के आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।

​3. मातृ-शिशु स्वास्थ्य और सुरक्षित प्रसव (NBSU)

​अप्रैल माह में अस्पताल में 170 प्रसव और 41 महिलाओं को आईयूसीडी (IUCD) लगाने का कार्य सफलतापूर्वक किया गया। इसके अलावा, नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाई (NBSU) में 7 नवजात भर्ती पाए गए।

  • निर्देश: सुरक्षित संस्थागत प्रसव, परिवार नियोजन को बढ़ावा देने और गर्भवती महिलाओं की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए। साथ ही, नवजातों को संक्रमण से बचाने और आवश्यक जीवन रक्षक उपकरणों की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने को कहा गया।

​4. ब्लड स्टोरेज यूनिट की स्थिति चिंताजनक

​ब्लड स्टोरेज यूनिट के निरीक्षण के दौरान एक बड़ी खामी सामने आई। यूनिट में केवल एक यूनिट रक्त ही उपलब्ध पाया गया।

  • निर्देश: आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने और नियमित रूप से रक्तदान शिविर आयोजित कर पर्याप्त ब्लड स्टॉक बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए गए।

​5. हीट स्ट्रोक (लू) वार्ड और पेयजल व्यवस्था

​भीषण गर्मी और लू (Heat Stroke) के खतरे को देखते हुए DHO ने विशेष हीट स्ट्रोक वार्ड का निरीक्षण किया।

  • राहत की बात: अस्पताल परिसर में 2 आरओ (RO) और वाटर कूलर चालू हालत में मिले, जिससे मरीजों और उनके परिजनों के लिए पेयजल की व्यवस्था संतोषजनक पाई गई। अस्पताल में साफ-सफाई की स्थिति भी अच्छी मिली।
  • निर्देश: हीट स्ट्रोक वार्ड में ओआरएस (ORS), आवश्यक दवाएं और वातावरण को शीतल रखने की पुख्ता व्यवस्था 24 घंटे उपलब्ध रहनी चाहिए।

मरीजों से किया सीधा संवाद

निरीक्षण के अंतिम चरण में DHO डॉ. देवेन्द्र भायल ने वार्डों में जाकर मरीजों और उनके परिजनों से सीधा संवाद किया और अस्पताल से मिल रही सुविधाओं का फीडबैक लिया। इस अवसर पर डॉ. प्रदीप भारती, डॉ. मनीष दुबे सहित अस्पताल के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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