इंदौर (Indore News): शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का जरिया नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की नींव है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखकर इंदौर के श्री वैष्णव विद्या परिसर में दो दिवसीय “मध्य प्रदेश ज्ञान सभा– विक्रम संवत 2082” का भव्य शुभारंभ हुआ। इस महामंथन में शिक्षाविदों और विचारकों ने शिक्षा के भारतीयकरण और नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना पर जोर दिया।
कार्यक्रम का आयोजन मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग (भोपाल) और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (नई दिल्ली) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
“तकनीक जरूरी, पर नैतिकता उससे भी अहम”
समारोह के मुख्य अतिथि और मध्य प्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को यदि पुन: ‘विश्वगुरु’ के पद पर आसीन होना है, तो शिक्षा को भारतीय मूल्यों से जोड़ना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा, “मध्य प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और मूल्य आधारित पहल के माध्यम से देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। शिक्षा का मूल उद्देश्य संस्कार और राष्ट्र प्रेम होना चाहिए।”
शिक्षा का दायित्व: चरित्रवान नागरिक बनाना
सत्र की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य ने तकनीकी प्रगति और मानवीय मूल्यों के संतुलन पर बात की।
उन्होंने कहा, “आज के दौर में तकनीकी प्रगति अत्यंत आवश्यक है, लेकिन इसका दुष्प्रभाव हमारी नैतिकता और मूल्यबोध पर नहीं पड़ना चाहिए। शिक्षा का असली दायित्व ऐसे नागरिकों का निर्माण करना है जो कर्मप्रधान हों, चरित्रवान हों और समाज के प्रति उत्तरदायी हों।”

NEP: पाठ्यक्रम नहीं, चरित्र निर्माण का दस्तावेज
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर महत्वपूर्ण विचार रखे।
डॉ. कोठारी ने कहा कि “नई शिक्षा नीति को केवल पाठ्यक्रम में बदलाव के रूप में न देखा जाए। यह भारतीय समाज के चरित्र पुनर्निर्माण का एक दस्तावेज है। वर्तमान समय में ‘चरित्र का संकट’ सबसे बड़ी चुनौती है, और इसका समाधान केवल भारतीय ज्ञान परंपरा में ही निहित है।”

ये भी रहे मौजूद
- डॉ. प्रकाश शास्त्री (प्रांत संघ संचालक, RSS) ने शासन-मुक्त और मूल्य आधारित शिक्षा मॉडल की वकालत की।
- श्री वैष्णव विद्यापीठ वि.वि. के कुलगुरु डॉ. योगेश चंद्र गोस्वामी ने स्वागत उद्बोधन दिया और कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा ही ‘विकसित भारत-2047’ की नींव रखेगी।
- श्री ओमप्रकाश शर्मा (राष्ट्रीय सह संयोजक) ने ज्ञान सभा के महत्व पर प्रकाश डाला।
- श्री वैष्णव ट्रस्ट के कुलाधिपति श्री पुरुषोत्तमदास पसारी ने ट्रस्ट की सामाजिक गतिविधियों की जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन डॉ. प्रियदर्शिनी अग्निहोत्री (प्रांत सह संयोजक) द्वारा किया गया। इस दो दिवसीय सभा में शिक्षा के भारतीय दृष्टिकोण पर गहन मंथन जारी रहेगा।






