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रावण दहन : इस गांव में है अनुठी परंपरा ।

रावण दहन धमनार

धमनार गांव में रावण वध की अनूठी परंपरा: अंगारा युद्ध और रावण की नाक पर मुक्का मारकर होता है वध

रावण दहन को धमनार गांव अनूठी और रोमांचक परंपरा है। इस गांव में रावण दहन नहीं होता, बल्कि रावण की प्रतिमा पर मुक्का मारकर उसका वध किया जाता है। यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है और इसे देखने के लिए हर साल हजारों लोग यहां इकट्ठा होते हैं।

रावण दहन की अनूठी परंपरा : मुक्का मारकर वध

धमनार गांव में रावण वध का तरीका बाकी स्थानों से बिल्कुल अलग है। गांव के चबूतरे पर रावण की एक स्थायी प्रतिमा बनी हुई है, जिसे हर साल दशहरे के दिन एक विशेष कार्यक्रम के दौरान ‘मुक्का मारकर’ वध किया जाता है। रावण की प्रतिमा पर मुक्का मारने का जिम्मा राम की सेना के एक सैनिक को दिया जाता है, जिसे इस वीरता के कार्य के लिए ग्राम पंचायत और दशहरा उत्सव समिति द्वारा सम्मानित भी किया जाता है।

अंगारा युद्ध: रावण वध से पहले का रोमांचक युद्ध

रावण दहन : इस गांव में है अनुठी परंपरा ।

रावण की नाक पर मुक्का मारने से पहले एक अनूठी परंपरा निभाई जाती है जिसे “अंगारा युद्ध” कहा जाता है। यह युद्ध राम और रावण की सेनाओं के बीच होता है। इस युद्ध में बांस की बनी टोकरियों में आग लगाई जाती है, और फिर जलती हुई टोकरियां दोनों सेनाएं एक-दूसरे पर फेंकती हैं। यह दृश्य बेहद रोमांचक होता है और ग्रामीण परंपरा का अद्भुत उदाहरण पेश करता है।

रावण की सेना चबूतरे के ऊपर खड़ी होती है और राम की सेना चबूतरे के नीचे। रावण की सेना का उद्देश्य होता है कि वह किसी भी कीमत पर राम की सेना को चबूतरे पर चढ़ने से रोके। वहीं, राम की सेना का लक्ष्य होता है कि वह रावण की सेना को हराकर चबूतरे पर चढ़ाई करे और रावण का वध करे। लंबे संघर्ष के बाद राम की सेना अंततः जीत हासिल करती है, और राम की सेना का एक योद्धा चबूतरे पर चढ़कर रावण की प्रतिमा पर मुक्का मारकर उसका वध करता है।

ग्राम पंचायत और दशहरा उत्सव समिति का आयोजन

इस अद्वितीय परंपरा का आयोजन धमनार गांव की ग्राम पंचायत और दशहरा उत्सव समिति द्वारा किया जाता है। रावण की नाक पर मुक्का मारने वाले सैनिक को विशेष सम्मान दिया जाता है, जो गांव के युवाओं के लिए गर्व का विषय होता है।

दशहरे से पहले पूरे गांव में विशेष तैयारियाँ की जाती हैं। गांव की सफाई की जाती है और प्रत्येक घर के सामने रंगोली बनाई जाती है। पंचायत की टीम गांव का निरीक्षण करती है और सफाई व सजावट के आधार पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार भी देती है। इससे गांव के लोग न केवल धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं, बल्कि स्वच्छता और सुंदरता को भी बढ़ावा देते हैं।

हजारों की संख्या में दर्शक और प्रशासनिक तैयारी

धमनार की इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए हजारों लोग यहां आते हैं। आसपास के गांवों से लोग दशहरे के दिन इस विशेष आयोजन का आनंद लेने के लिए धमनार पहुंचते हैं। प्रशासन की ओर से भी इस अवसर पर विशेष इंतजाम किए जाते हैं। पुलिस की टीम सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात रहती है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। इसके साथ ही, डॉक्टरों की टीम भी मौजूद रहती है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित इलाज की सुविधा दी जा सके।

धमनार की अनूठी पहचान

धमनार गांव की यह अनूठी दशहरा परंपरा न केवल इस क्षेत्र में बल्कि पूरे राज्य में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी है। यहां का अंगारा युद्ध और रावण की नाक पर मुक्का मारकर वध करने की परंपरा एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर है जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी संजोकर रखा गया है।

गांव के लोग इस परंपरा से गहरे जुड़े हुए हैं और इसे अपनी सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मानते हैं। दशहरे के इस आयोजन के जरिए न केवल रावण वध की धार्मिक परंपरा को जीवित रखा जाता है, बल्कि सामूहिकता, एकता और साहस का भी अद्भुत प्रदर्शन होता है।

धमनार गांव की यह परंपरा दशहरे को एक नए और रोचक रूप में प्रस्तुत करती है। रावण की नाक पर मुक्का मारकर वध करने और अंगारा युद्ध की यह परंपरा गांव की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा बन चुकी है। इस आयोजन में गांव के लोग पूरे उत्साह और समर्पण के साथ हिस्सा लेते हैं, और बाहर से आने वाले दर्शक इसे एक अद्वितीय अनुभव के रूप में देखते हैं। प्रशासन और ग्राम पंचायत की सक्रिय भूमिका इस आयोजन को सफल और सुरक्षित बनाने में मदद करती है, जिससे यह परंपरा साल-दर-साल और भी भव्य होती जा रही है।

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