पेटलावद (झाबुआ)। पेटलावद की माननीय अपर सत्र न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए बामनिया के बहुचर्चित नर्मदाबाई हत्याकांड के तीनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है। करीब 5 साल तक चले इस मामले में मृतक महिला के सगे बेटे, बहू और एक अन्य साथी पर हत्या और साजिश रचने का गंभीर आरोप था। न्यायालय ने सबूतों के अभाव और बचाव पक्ष के तर्कों से सहमत होकर यह फैसला सुनाया।
क्या है पूरा मामला? (Case Background)
घटना 8 जून 2021 की है। अभियोजन के अनुसार, सुबह करीब 8:30 बजे बामनिया निवासी नर्मदाबाई की उनके ही घर में घुसकर अज्ञात हमलावर ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। दिनदहाड़े हुई इस वारदात से पूरा बामनिया कस्बा सहम गया था।

पुलिस की थ्योरी और प्रेम विवाह का एंगल
हत्या के बाद मृतिका के पति और छोटे बेटे राहुल ने हत्या का शक अपने ही बड़े भाई रवि कहार और उसकी पत्नी राखी पर जताया था। पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि रवि ने रिश्ते में अपनी मौसी लगने वाली राखी से प्रेम विवाह (Love Marriage) किया था। इस रिश्ते से मां नर्मदाबाई खुश नहीं थीं और उन्होंने रवि-राखी को घर से निकाल दिया था।
पुलिस ने अपनी चार्जशीट में दावा किया था कि इसी रंजिश के चलते रवि और राखी ने अमझेरा निवासी हेमराज केवट के साथ मिलकर हत्या की साजिश (120B) रची। पुलिस का आरोप था कि हेमराज ने ही घर में घुसकर पिस्टल से गोली मारी थी। पुलिस ने तीनों के खिलाफ धारा 302, 120बी और आर्म्स एक्ट की धारा 25, 27 के तहत प्रकरण (क्रमांक 24/2021) दर्ज किया था।
बचाव पक्ष की दलीलें और फैसला
माननीय अपर सत्र न्यायालय पेटलावद में यह विचारण करीब 5 साल तक चला। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अभिभाषक (Advocate) नरेंद्र सिंह सोलंकी ने पैरवी की।
एडवोकेट सोलंकी ने न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि पुलिस की कहानी में विरोधाभास है और आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। गवाहों के बयानों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि हत्या इन तीनों ने ही की है।
अंततः दिनांक 5 फरवरी 2026 को न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए आरोपी रवि कहार, राखी कहार (निवासी बामनिया) और हेमराज केवट (निवासी अमझेरा) को हत्या के आरोपों से दोषमुक्त (Acquitted) कर दिया।
ये रहे केस के मुख्य बिंदु:
- घटना दिनांक: 08/06/2021
- फैसले की दिनांक: 05/02/2026
- कोर्ट: अपर सत्र न्यायालय, पेटलावद
- आरोपी: रवि कहार, राखी कहार और हेमराज केवट (सभी बरी)
- बचाव पक्ष के वकील: एडवोकेट नरेंद्र सिंह सोलंकी






