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झाबुआ क्राइम: जिस दोस्त के साथ अक्सर छलकते थे जाम, उसी ने ‘टॉमी’ से वार कर सुला दी मौत की नींद

झाबुआ/करवड़ (24 मई 2026): दोस्ती, शराब, परिवार से जुड़ी रंजिश और फिर एक खौफनाक कत्ल। झाबुआ जिले के पेटलावद थाने की करवड़ चौकी इलाके में पिछले दिनों हुए एक अंधे कत्ल (Blind Murder) की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। खेत में मिली एक अज्ञात लाश के मामले में शुरू से ही हत्या की आशंका…

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झाबुआ/करवड़ (24 मई 2026): दोस्ती, शराब, परिवार से जुड़ी रंजिश और फिर एक खौफनाक कत्ल। झाबुआ जिले के पेटलावद थाने की करवड़ चौकी इलाके में पिछले दिनों हुए एक अंधे कत्ल (Blind Murder) की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। खेत में मिली एक अज्ञात लाश के मामले में शुरू से ही हत्या की आशंका जताई जा रही थी, जो जांच के बाद सच साबित हुई। पुलिस ने जब इस कत्ल के पीछे से पर्दा उठाया, तो जो कहानी सामने आई उसने सबको चौंका दिया। कातिल कोई और नहीं, बल्कि मृतक का अपना वो दोस्त निकला, जिसके साथ वह अक्सर बैठकर शराब पीया करता था। झाबुआ एसपी देवेन्द्र पाटीदार ने इसका खुलासा किया।

क्या है पूरा मामला?

चंवरापाड़ा के रहने वाले ईश्वर पारगी ने पुलिस को सूचना दी थी कि उसका भाई शांतु पारगी 17 मई 2026 से अचानक लापता है। परिजनों ने हर जगह तलाश की, लेकिन शांतु का कोई सुराग नहीं मिला। अगले ही दिन, 18 मई को बामनझीरी इलाके के एक खेत में शांतु का शव बरामद हुआ। कातिल ने बड़ी ही बेरहमी से उसके चेहरे पर वार किए थे, ताकि उसकी पहचान न हो सके। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, जिसकी रिपोर्ट आते ही साफ हो गया कि यह एक सुनियोजित हत्या है। इसके बाद थाना पेटलावद में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (1) के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू की गई।

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शराब के क्वार्टर और पानी की बोतल ने दिया सुराग

मामले की गंभीरता को देखते हुए झाबुआ एसपी श्री देवेंद्र पाटीदार ने खुद घटनास्थल का मुआयना किया। उन्होंने कातिल तक पहुँचने के लिए जांच के अहम बिंदु तय किए। एएसपी प्रतिपाल सिंह महोबिया और एसडीओपी सुश्री अनुरक्ति साबनानी के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निर्भयसिंह भूरिया ने टीमों का गठन किया। घटनास्थल की बारीकी से जांच करने पर पुलिस को शराब के खाली क्वार्टर, पानी की बोतल और कुछ अन्य सुराग मिले। यहीं से पुलिस को अंदेशा हो गया था कि कत्ल से ठीक पहले यहाँ ‘शराब पार्टी’ हुई थी।

करवड़ के पास मिले शव की सूचना के बाद झाबुआ एसपी मौके पर पहुंचे ।

मुखबिरों का जाल बिछाया गया और तफ्तीश में सामने आया कि घटना वाले दिन शांतु को आखिरी बार उसके जिगरी दोस्त दिनेश उर्फ दितिया मोरी के साथ देखा गया था।

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दोस्त के घर तांक-झांक की कीमत चुकानी पड़ी जान देकर

संदेह पुख्ता होते ही 23 मई 2026 को पुलिस ने दिनेश मोरी को हिरासत में ले लिया। जब खाकी ने अपने अंदाज में पूछताछ की, तो दिनेश टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

​पूछताछ में जो हत्या का कारण सामने आया, वह आपसी रंजिश का था। आरोपी दिनेश ने पुलिस को बताया कि उसकी गैरमौजूदगी में शांतु अक्सर उसके घर आता-जाता था और उसके परिवार वालों को परेशान करता था। दिनेश को अपने ही दोस्त की यह नीयत और हरकतें बिल्कुल रास नहीं आईं और उसने शांतु को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रच डाली।

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कत्ल की वह खौफनाक रात

प्लान के मुताबिक, दिनेश ने शांतु को शराब पार्टी के बहाने बुलाया। दोनों करवड़ चौकी इलाके के बामनझीरी मोड़ के पास एक सुनसान खेत में पहुंचे। वहां दोनों ने जमकर शराब पी। नशे में धुत होने के बाद दिनेश ने परिवार वालों को परेशान करने वाली बात छेड़ी, जिस पर दोनों के बीच तीखी नोकझोंक और झगड़ा शुरू हो गया। इसी दौरान मौके का फायदा उठाकर दिनेश ने लोहे की ‘टॉमी’ (Tommy) निकाली और शांतु के चेहरे और सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। शांतु वहीं खून से लथपथ होकर गिर पड़ा और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

इनकी रही अहम भूमिका

इस अंधे कत्ल का पर्दाफाश करने में पेटलावद थाना प्रभारी निरीक्षक निर्भयसिंह भूरिया, सउनि प्रहलादसिंह चुंडावत, साइबर सेल की टीम सहित पुलिसकर्मियों (आरक्षक हर्ष केमा, अनिल अमलियार, मोतीलाल, कान्तीलाल, विकास, वेरसिंह, राजेन्द्र, राहुल मुझाल्दा, रविन्द्र बर्डे और प्रआर विजेन्द्र यादव) का सराहनीय योगदान रहा।

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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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