,

झाबुआ: डीएपी-यूरिया के बजाय अपनाएं ये मिश्रित खाद, कृषि विभाग की सलाह

झाबुआ, 27 मई 2026: खरीफ फसलों की बोनी का समय नजदीक आते ही झाबुआ जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों के लिए जरूरी गाइडलाइन जारी की है। इस बार विभाग का मुख्य फोकस पारंपरिक खाद (जैसे यूरिया और डीएपी) पर निर्भरता कम करके मिश्रित उर्वरकों (कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर) के उपयोग को बढ़ावा देने पर है।…

झाबुआ खाद को लेकर कृषि विभाग की सलाह

झाबुआ, 27 मई 2026: खरीफ फसलों की बोनी का समय नजदीक आते ही झाबुआ जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों के लिए जरूरी गाइडलाइन जारी की है। इस बार विभाग का मुख्य फोकस पारंपरिक खाद (जैसे यूरिया और डीएपी) पर निर्भरता कम करके मिश्रित उर्वरकों (कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर) के उपयोग को बढ़ावा देने पर है। कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसाट के निर्देशन में जिले में खाद का पर्याप्त स्टॉक जुटा लिया गया है और किसानों से ‘ई-विकास पोर्टल’ के माध्यम से सुगमता से खाद का उठाव करने की अपील की गई है।

पारंपरिक खाद के मुकाबले मिश्रित खाद के फायदे और बचत

विगत वर्षों में देखा गया है कि किसान मुख्य रूप से यूरिया, डीएपी (DAP) और सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) का ही ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। कृषि विभाग के अनुसार, केवल इन खादों पर निर्भर रहने के बजाय यदि किसान 12:32:16 और 20:20:0:13 जैसे मिश्रित उर्वरकों को अपनाते हैं, तो उन्हें निम्नलिखित बड़े फायदे और आर्थिक बचत होती है:

  • संतुलित पोषण (Balanced Nutrition): मिश्रित खादों में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश के साथ-साथ सल्फर जैसे आवश्यक सूक्ष्म तत्व एक ही दाने में सटीक अनुपात में मिल जाते हैं।
  • लागत में कमी (Cost Saving): अलग-अलग पोषक तत्वों के लिए यूरिया, डीएपी और पोटाश की अलग-अलग बोरियां खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। एक ही मिश्रित खाद की बोरी से कई तत्वों की पूर्ति हो जाती है, जिससे खेती की कुल लागत घटती है।
  • श्रम और समय की बचत: खेत में अलग-अलग समय पर अलग-अलग खाद छिड़कने की मेहनत बचती है। सिंगल एप्लीकेशन से ही फसल को शुरुआती मजबूती मिल जाती है।

प्रमुख खरीफ फसलों के लिए कृषि विभाग का ‘सटीक फॉर्मूला’

उप संचालक (किसान कल्याण तथा कृषि विकास) श्री एन.एस. रावत के अनुसार, विभिन्न खरीफ फसलों के लिए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से अनुशंसित मिश्रित खाद का गणित इस प्रकार है:

1. सोयाबीन फसल हेतु विकल्प

सोयाबीन के लिए प्रति हेक्टेयर 30:60:50 किलोग्राम नत्रजन, फास्फोरस एवं पोटाश की आवश्यकता होती है। इसकी पूर्ति के लिए किसान नीचे दिए गए दो विकल्पों में से कोई एक चुन सकते हैं:

  • विकल्प ए: 188 किलोग्राम मिश्रित उर्वरक (12:32:16) के साथ 16 किलोग्राम यूरिया का उपयोग करें।
  • विकल्प बी: सीधे 150 किलोग्राम मिश्रित उर्वरक (20:20:0:13) का प्रति हेक्टेयर उपयोग करें।

2. मक्का फसल हेतु विकल्प

मक्के की अच्छी पैदावार के लिए प्रति हेक्टेयर 120:50:30 किलोग्राम पोषक तत्वों की जरूरत होती है।

  • विकल्प ए: 220 किलोग्राम यूरिया और 156 किलोग्राम मिश्रित उर्वरक (12:32:16) का कॉम्बिनेशन अपनाएं।
  • विकल्प बी: 204 किलोग्राम यूरिया, 130 किलोग्राम मिश्रित उर्वरक (20:20:0:13) और साथ में 150 किलोग्राम एसएसपी (SSP) खाद का इस्तेमाल करें।

3. कपास फसल हेतु विकल्प

कपास की फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 150:75:40 किलोग्राम पोषक तत्व आवश्यक हैं।

  • विकल्प ए: 265 किलोग्राम यूरिया के साथ 235 किलोग्राम मिश्रित उर्वरक (12:32:16) का प्रयोग करें।
  • विकल्प बी: 261 किलोग्राम यूरिया, 150 किलोग्राम मिश्रित उर्वरक (20:20:0:13) तथा 130 किलोग्राम एसएसपी खाद का खेत में छिड़काव करें।

4. अरहर (तुअर) फसल हेतु विकल्प

अरहर के लिए प्रति हेक्टेयर 30:50:30 किलोग्राम पोषक तत्वों की जरूरत होती है।

  • विकल्प ए: 25 किलोग्राम यूरिया और 155 किलोग्राम मिश्रित उर्वरक (12:32:16) का इस्तेमाल करें।
  • विकल्प बी: 150 किलोग्राम मिश्रित उर्वरक (20:20:0:13) के साथ 25 किलोग्राम एसएसपी का उपयोग करें।

5. मूंग और उड़द फसल हेतु विकल्प

दलहनी फसलों (मूंग/उड़द) के लिए प्रति हेक्टेयर 20:50:40 किलोग्राम पोषक तत्वों की अनुशंसा की गई है।

  • विकल्प ए: केवल 156 किलोग्राम मिश्रित उर्वरक (12:32:16) का उपयोग ही पर्याप्त है।
  • विकल्प बी: 150 किलोग्राम मिश्रित उर्वरक (20:20:0:13) के साथ 125 किलोग्राम एसएसपी खाद का प्रयोग करें।

ई-विकास पोर्टल से घर बैठे बुक करें खाद

जिले में खाद के वितरण को सुगम बनाने के लिए ई-विकास पोर्टल व्यवस्था लागू है। किसान अपनी सुविधा अनुसार खाद बुक कर अपनी पसंदीदा सहकारी समिति या अधिकृत निजी डीलर से इसे उठा सकते हैं। इस प्रणाली में सामान्य किसानों के अलावा राजस्व पट्टाधारी, वन पट्टाधारी, बटाईदार (सिकमी) किसान, वृद्ध व शारीरिक रूप से अक्षम किसान तथा मृतक किसान के वारिसों को भी आसानी से खाद उपलब्ध कराने का विशेष प्रावधान किया गया है।

जिले में उर्वरकों का वर्तमान स्टॉक (मीट्रिक टन में):

  • यूरिया: 13,410 MT
  • एनपीके (NPK): 2,318 MT
  • डीएपी (DAP): 1,436 MT
  • एसएसपी (SSP): 1,324 MT
  • एमओपी (MOP): 462 MT

कृषि विभाग की सख्त चेतावनी: पक्का बिल जरूर लें

कृषि विभाग ने सभी किसानों से आग्रह किया है कि वे बीज, खाद या कीटनाशक खरीदते समय अधिकृत विक्रेताओं से ही लेनदेन करें और खरीद का पक्का बिल अवश्य प्राप्त करें। वहीं, निजी डीलरों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित एमआरपी (MRP) से अधिक दाम वसूलने पर उनके खिलाफ वैधानिक व दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। किसी भी प्रकार की दुविधा या अधिक जानकारी के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के मैदानी अमले से संपर्क कर सकते हैं।

और अधिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए Jhabua Post.Com, आपके पास भी है कोई सूचना या जानकारी तो 9407154083 नंबर पर वाट्सएप करें।

लेखक के बारे में

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

About the Author

virendra singh rathore
virendra singh rathore

virendra singh rathore

संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports