झाबुआ/पेटलावद: पेटलावद क्षेत्र के किसानों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। हर साल सिंचाई के सीजन में जब भी माही नहर में पानी छोड़ा जाता था, तो कहीं न कहीं से नहर के फूटने, लीकेज होने या खेतों में पानी भर जाने की खबरें आम बात हो गई थीं। नहरों की बदहाली के कारण अंतिम छोर (टेलर) पर बैठे किसानों के खेतों तक पानी पहुंच ही नहीं पाता था और पानी बीच में ही बर्बाद हो जाता था।

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लेकिन अब पेटलावद के किसानों को इस सालाना परेशानी से हमेशा के लिए मुक्ति मिलने वाली है। मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग ने माही परियोजना की नहरों के विशेष कायाकल्प और सुदृढ़ीकरण के लिए 1668.35 lakh रुपये (16 करोड़ 68 लाख 35 हजार रुपये) की भारी-भरकम प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी है। इस राशि से नहरों की नए सिरे से मरम्मत की जाएगी, जिससे पानी की बर्बादी रुकेगी और क्षेत्र के हजारों किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
क्षेत्रीय विधायक और मंत्री निर्मला भूरिया के प्रयासों को मिली सफलता
इस बड़ी सौगात को धरातल पर लाने में क्षेत्र की लोकप्रिय विधायक और महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया के प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पेटलावद क्षेत्र के किसान लंबे समय से नहरों के क्षतिग्रस्त होने, समय पर सफाई न होने और टेल एंड तक पानी न पहुंचने की समस्या को लेकर परेशान थे। कई बार तो स्थिति इतनी खराब हो जाती थी कि सफाई के अभाव में पानी खेतों में घुस जाता था।

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किसानों की इस वाजिब तकलीफ को गंभीरता से लेते हुए मंत्री निर्मला भूरिया ने शासन स्तर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट के समक्ष लगातार यह मांग उठाई थी। उनके इसी सघन प्रयास और पैरवी का नतीजा है कि सरकार ने इतनी बड़ी राशि को अपनी मंजूरी दे दी है।
मुख्य नहर से लेकर खेतों की ‘माइनर’ तक सुधरेगी व्यवस्था
माही मुख्य नहर शाखा और उससे जुड़े पूरे जाल को सुधारने के लिए इस बजट का इस्तेमाल किया जाएगा। काम को इस तरह से प्लान किया गया है कि पानी मुख्य बांध से छूटने के बाद बिना किसी लीकेज के सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचे:
- मुख्य नहर का सुधार: मुख्य नहर के उन हिस्सों को पक्का और दुरुस्त किया जाएगा जहां से हर साल लीकेज या नहर फूटने का खतरा बना रहता था।
- वितरिका (डिस्ट्रीब्यूटरी) का जीर्णोद्धार: मुख्य नहर से निकलने वाली मध्यम नहरों की सफाई और मरम्मत की जाएगी।
- माइनर एवं सब-माइनर का सुदृढ़ीकरण: किसानों के खेतों के ठीक पास से गुजरने वाली छोटी नहरों (माइनर और सब-माइनर) को मजबूत बनाया जाएगा ताकि अंतिम छोर पर बैठे किसान को भी पर्याप्त और पूरे प्रेशर के साथ पानी मिल सके।
पेटलावद की ‘जीवनरेखा’ है माही परियोजना
माही परियोजना को पेटलावद क्षेत्र की जीवनरेखा (लाइफलाइन) माना जाता है। इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण परियोजना को क्षेत्र में लाने और इसे धरातल पर उतारने में पूर्व सांसद स्वर्गीय दिलीप सिंह भूरिया की बहुत बड़ी और ऐतिहासिक भूमिका रही थी।
वर्तमान में माही परियोजना के नहर नेटवर्क की कुल लंबाई लगभग 284 किलोमीटर है। इस विशाल नेटवर्क के जरिए पेटलावद क्षेत्र के 19 हजार से अधिक किसान सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं और इसके माध्यम से करीब 22 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित की जा रही है। नहरों की मरम्मत हो जाने से सिंचाई का यह रकबा और अधिक सुरक्षित एवं समृद्ध हो जाएगा।
”कृषि प्रगति में मील का पत्थर साबित होगा यह निर्णय”
इस बड़ी प्रशासनिक स्वीकृति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार का यह निर्णय क्षेत्र के किसानों के लिए एक ऐतिहासिक उपहार है।
उन्होंने कहा, “लंबे समय से हमारे किसान भाई नहरों के फूटने और पानी बर्बाद होने से परेशान थे। अब इस राशि से नहरों का पूरी तरह से कायाकल्प हो जाएगा। पानी की एक-एक बूंद की बचत होगी और यह सीधे किसान के काम आएगी। यह निर्णय क्षेत्र की कृषि प्रगति में मील का पत्थर साबित होगा।” सुश्री भूरिया ने इस सौगात के लिए पूरे क्षेत्र की जनता और किसानों की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट का आभार जताया है।
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