मांस दुकान पर कार्रवाई , तीन होटल किए सील ।

रवाजा बंद करके कब तक भागते रहोगे, सवाल तो पूछो जगह कब मिलेगी।

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झाबुआ शहर में बिना अनुमति बिना लाइसेंसी मांस-मटन दुकानों को लेकर अलग ही लूडो चल रहा है । नगरपालिका को सूचना मिलती है, दांव चलती है, लेकिन उसके पहले दुकानदार सुरक्षित खाने पर जाकर बैठ जाते हैं । क्योंकि नगरपालिका अमले के निकलते ही सूचना पहुंच जाती है । झाबुआ शहर के वार्ड नंबर 7 में एक बार फिर से अवैध रूप से मांस मटन की दुकानें संचालित होने की शिकायत के बाद नगर पालिका- पुलिस का संयुक्त अमला कार्रवाई करने पहुंचा लेकिन इस बार भी अमले को बैरंग और खाली हाथ लौटना पड़ा ।

जैसी ही मांस विक्रेताओं को सूचना पहुंची ताबड़तोड़ सामान समेटने और उसके बाद उसे धोने का सिलसिला चलता है । मौके पर जब तक टीम पहुंचती है ना तो वहां मांस मिलता है ना मटन .लेकिन पानी से धोए हुए चकाचक फर्श जरूर दिखाई देते हैं और आसपास जिंदा मुर्गी-बकरे । अब सीएम साहब ने इन पर कार्रवाई करने की बात कही नही है । बात बिना अनुमति बिक रहे मांस की है , जो मौके पर मिलता नहीं है । नगरपालिका के हरिराम इतने हैं कि पाड़े चाहे कोई भी काटे , इनके लिए तो ये दुधारू पशु है, दुध-पनीर से मतलब ।

मांस दुकान पर कार्रवाई करने पहुंचा अमला, तीन होटल सील ।

मांस दुकान पर कार्रवाई , तीन होटल किए सील  ।

कार्रवाई करने पहुंची टीम में नए-नए प्रभारी सीएमओ बनाए गए इंजीनियर धीरेंद्र रावत, नगर पालिका कर्मचारी और पुलिसकर्मी शामिल थे। हालांकि नगर पालिका की ओर से स्वच्छता प्रभारी दल के साथ नहीं पहुंचे। इसके पहले वार्ड 4 में भी ऐसी सूचना पर जब नगरपालिका कर्मचारी पहुंचे थे, तो वहां विवाद हो गया था, मांस बेचा जा रहा था,

जिसे नगरपालिका कर्मचारियों मौके पर पकड़ा और वीडियो बना लिया, बाद में विवाद हुआ। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक बार फिर सूचना मिलने के बाद अमला कार्रवाई करने पहुंचा लेकिन इधर से तो खाली हाथ ही लौटा ।

बस स्टैंड पहुंचे ने जरूर तीन दुकानों पर कार्रवाई की है । बस स्टैंड पर मटन-चिकन-बिरयानीि बनाकर बेचा जाता है, जो नियम विरूद्ध है । प्रभारी सीएमओ ने पहली बार में ही बड़ी कार्रवाई करते हुए दुकानों को सील करके सामान जब्त किया है । जिसकी शहर भर में प्रशंसा हो रही है ।

दरवाजा बंद करके कब तक भागोगे, जगह कब मिलेगी सवाल तो पूछो!
अमला जब कार्रवाई करने पहुंचा तो पूरे वार्ड में अफरा तफरी का माहौल बन गया। जैसे हीअमला आगे बढ़ता जा रहा था वैसे-वैसे हलचल तेज होती जा रही थी।

इधर मांस विक्रेताओं कहना है कि नगरपालिका ने अब तक स्लॉटरहाउस के लिए जमीन पर कोई व्यवस्था नहीं की, ऐसे में मांस व्यापारी जाए तो जाए कहां।
एक मांस व्यापारी ने अमले के सामने ही कहा कि दरवाजा बंद करके कब तक भागते रहोगे, सवाल तो पूछो जगह कब मिलेगी।

स्लाटर हाउस के लिए मौजीपाडा पर जमीन चिन्हित की थी। एडीएम साहब ने बैठक करके 7 दिन के भीतर नगर पालिका से वहां अस्थाई शेड निर्मित कर व्यवस्थाएं बनाने के लिए कहा था। लेकिन अब तक वहां पर किसी तरह की व्यवस्था नहीं हुई। कहा जा रहा है की वहां ग्रामीण विरोध कर रहे हैं, विरोध कर रहे हैं या विरोध करवा रहे हैं ये अलग मसला है, और पुलिस चाहे तो अलग से इस मामले में पूछताछ कर सकती है ।

लेकिन ऐसा होने से रहा । सवाल ये है कि नगरपालिका स्थायी हल निकालने की बजाय लुकाछिपी का खेल खेलकर मुद्दे को भुलवाना क्यों चाहती है। शहर के बीच में सकरी गलियों में बिना अनुमति संचालित होने वाली दुकानों के संचालकों को अपने व्यापार संचालन के लिए जगह की आवश्यकता है। लेकिन जगह को लेकर कोई सहमति नहीं बन पा रही है। या बनने नहीं दी जा रही है ।

दूसरा शहर के बाहर स्लॉटर हाऊस का विरोध करने वाले भी सोचे की शहर के बीच में एक रास्ते के किनारे मांस की दुकान लगने से बेहतर शहर के बाहर ही होगा । दारू और मटन तो बिना मार्केटिंग का बिजनेस है। जहां आडियंस को टारगेट नहीं करना पड़ता, आंडियंस खुद टारगेट ढूंढ लेती है ।

बताने वाले बताते हैं यहां मांस दुकानों को यहां से हटाने के लिए 80 फीसदी रहवासी, 80 फीसदी दुकानदार, तैयार हैं, मसला 20 प्रतिशत का है, जो नहीं चाहते हैं । इसके पीछे की कहानी बड़े पशुओं के मांस विक्रय को लेकर है ।

क्योंकि एक बार यहां से मटन मार्केट बाहर हुआ तो फिर ऐसा सुरक्षित ठिकाना मुश्किल होगा । क्योंकि अभी कार्रवाई की सूचना पर सब समेट लिया जाता है । छूपा लिया जाता है । लेकिन स्लॉटर हाऊस में दबे-छुपे तो कुछ काम हो नहीं सकता । और यहां से मटन मार्केट हटने के बाद कही और दबे-छूपे बड़े पशुओं का मांस बेचा जाएगा तो खबर तो लग जाएगी । इस लिए बड़े पशुओं का मांस बेचने वाली लॉबी चाहती है किसी भी तरह स्लॉटर हाऊस के लिए जगह में अड़ंगे आते रहे, काम चलता रहे, तारीख पर तारीख मिलती रहे ।

खबरी बताते हैं कि इस पूरे खेल सब शामिल है, पार्टी के नेता क्या , पब्लिक सर्वेंट क्या, जनता के सेवक क्या । क्योंकि भैया कटेगा तभी तो सब में बंटेगा । स्माईल प्लीज सर ।

बाकी तो जो है सो है ही ।

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