झाबुआ: 40 वर्षों तक शिक्षा की अलख जगाने वाले  किशनलाल बघेल हुए सेवानिवृत्त, किया गया सम्मान!

झाबुआ/रामा। शिक्षक समाज का वह शिल्पकार होता है, जो अपना पूरा जीवन दूसरों का भविष्य संवारने में लगा देता है। झाबुआ जिले के रामा विकासखंड..

img 20260501 wa00125418689117963893034

झाबुआ/रामा। शिक्षक समाज का वह शिल्पकार होता है, जो अपना पूरा जीवन दूसरों का भविष्य संवारने में लगा देता है। झाबुआ जिले के रामा विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पालेड़ी में ऐसा ही एक ऐतिहासिक और भावुक क्षण देखने को मिला, जब गांव के ही बेटे और क्षेत्र के प्रतिष्ठित शिक्षक श्री किशनलाल बघेल अपनी 40 वर्षों की सुदीर्घ और गौरवमयी शासकीय सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।

​शासकीय माध्यमिक विद्यालय पालेड़ी के प्रधान पाठक और शासकीय हाई स्कूल झिरी के प्रभारी प्राचार्य के रूप में अपनी सेवाएं देने वाले श्री बघेल के सम्मान में एक भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें पूरा गांव, उनके पूर्व छात्र और शिक्षा विभाग का अमला उमड़ पड़ा।

आंखें हुईं नम, शिष्यों ने किया गुरु का वंदन

सेवानिवृत्ति के इस शुभ अवसर पर पूरा पालेड़ी गांव उत्सव के माहौल में था। समारोह में न केवल श्री बघेल के परिजन और ग्रामीण उपस्थित थे, बल्कि उन छात्रों की भी भारी भीड़ थी, जिनका भविष्य उन्होंने अपने 40 साल के कार्यकाल में संवारा है।

img 20260501 wa00125418689117963893034

​इस अवसर पर संकुल केन्द्र उमरकोट के सहकर्मियों और शिक्षकों ने उन्हें स्मृति चिह्न और ‘अभिनंदन पत्र’ भेंट कर उनके स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना की। उनके पूर्व छात्रों ने अपने प्रिय ‘मास्साब’ को फूल-मालाओं से लाद दिया।

“अभिनन्दन कांटों का नहीं फूलों का होता है, अभिनन्दन विष का नहीं अमृत का होता है। अभिनन्दन चित्र का नहीं चरित्र का होता है, अभिनन्दन व्यक्ति का नहीं व्यक्तित्व का होता है।” > — (श्री बघेल को भेंट किए गए अभिनंदन पत्र की पंक्तियां)

1986 में शुरू हुआ था सफर: 5 स्कूलों और 5 पदों का शानदार अनुभव

​4 अप्रैल 1964 को श्री देवचंदजी बघेल और माता श्रीमती मोतीबाई बघेल के घर जन्मे श्री किशनलाल बघेल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इसी माटी (पालेड़ी) से पूरी की थी। शासकीय पीजी कॉलेज झाबुआ से स्नातक करने वाले श्री बघेल की शासकीय सेवा यात्रा 31 अगस्त 1986 को शासकीय प्राथमिक विद्यालय धांदलपुरा में उपशिक्षक के रूप में शुरू हुई थी।

अपने 40 वर्षों के सेवाकाल में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं:

  • 5 स्कूलों में दी सेवाएं: उन्होंने प्रा.वि. झिरी, प्रा.वि. पालेड़ी, मा.वि. धांदलपुरा, मा.वि. झिरी और अंत में हाई स्कूल झिरी व मा.वि. पालेड़ी में अपनी सेवाएं दीं।
  • 5 पदों का निर्वहन: अपने कुशल नेतृत्व के दम पर उन्होंने उपशिक्षक से लेकर सहायक शिक्षक, उच्च श्रेणी शिक्षक, प्रधान पाठक और प्रभारी प्राचार्य तक का सफर तय किया।

शिक्षा के साथ समाज को भी दी नई दिशा

​श्री बघेल केवल एक शिक्षक नहीं रहे, बल्कि वे अपनी शैक्षणिक कार्यशैली, क्रीड़ा और लेखन में भी अग्रणी रहे। अपने अल्पकाल में ही उन्होंने अपनी मेहनत, लगन, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से न केवल शिक्षा जगत को बल्कि पूरे समाज को एक नई दिशा देने का कार्य किया। उनकी इसी बहुमुखी प्रतिभा के कारण वे पूरे संकुल और रामा ब्लॉक में एक स्थापित पहचान बन गए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

About the Author

Easy WordPress Websites Builder: Versatile Demos for Blogs, News, eCommerce and More – One-Click Import, No Coding! 1000+ Ready-made Templates for Stunning Newspaper, Magazine, Blog, and Publishing Websites.

BlockSpare — News, Magazine and Blog Addons for (Gutenberg) Block Editor

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed