लघुव्यथा- घर की मुर्गी दाल बराबर । 

घर की मुर्गी दाल बराबर : चौराहे पर चाय पीते-पीते किसी के हाथ में अखबार आया । खबर पढ़ कर वे बहुत प्रसन्न हुए ।..

घर की मुर्गी दाल बराबर

घर की मुर्गी दाल बराबर : चौराहे पर चाय पीते-पीते किसी के हाथ में अखबार आया । खबर पढ़ कर वे बहुत प्रसन्न हुए । बात उनके पसंदीदा नेताजी की थी । प्रतापगढ़ से आने वाले मादक पदार्थ पर पुलिस की कार्रवाई , प्रतापगढ़ का ही आरोपी हुआ गिरफ्तार  । 

चाय की सुड़की मारते हुए एक प्यादा बोला- देखा भाई साहब ने परसो ही कहा था, और हमारे यहां 30 g. पकड़ी है ना , उसको साबित करके दिखा दिया । 

क्या कहा था भाई साहब ने ।

यही कि शांति के टापू में नशा का कारोबार राजस्थान के प्रतापगढ़ से हो रहा है । ये साबित हो गया । 

कितना पकड़ाया –
30 ग्राम । 

अब क्या होगा . 

होना क्या है जी  जलसा होगा, उत्सव होगा, प्रशस्ति पत्र लिखें जाएंगे, मंगल गीत गाए जाएंगे, बधाईयां होंगी और क्या । मोबाइल फोन और अखबार नहीं देख रहे हो क्या । 

तो , जो अभी अपने इधर ही 112 कि.ग्रा. मिला उसका क्या । 168 करोड़ कीमत थी, जो ये पकड़ा है वो तो महज 3 लाख रूपए का है । 

घर की मुर्गी दाल बराबर

घर की मुर्गी दाल बराबर

अरे …….वो तो अपने इधर का ही था ना, अपने घर की बात है, आपने कहावत नहीं सुनी घर की मुर्गी दाल बराबर । 168 क्या है 1 हजार करोड़ की भी हो तो उसकी कोई वैल्यू नहीं । पकड़ नहीं पाए तो किसी का फैलियर भी नहीं है । घर की बात है । 

एक और कहावत है घर का जोगी जोगड़ा, आन गांव का सिद्ध । मतलब अपने की घर की बात हो तो उसकी कोई वखत नहीं , लेकिन बाहर का मामला हो तो उसकी बात ही अलग होती है । उसकी वैल्यू बढ़ जाती है । घर में रोज लोग झगड़ते हैं, घर की बात कोई करता है क्या, नहीं करता,…. लेकिन पड़ोसी के यहां झगड़ा हो तो लोग ढिंढोरा पिटते फिरते है. । 

हां पर ये भी तो है कि बाहर के लोगों ने  ही आकर पकड़ा इस 168 करोड़ के मामले को, तो वो भी फिर आन गांव के सिद्ध हुए, अपने यहां वाले…… 

फिर वहीं बात घर की बात कौन उजागर करता है, सबकों मालूम है, किसी क्या बात छुपी, अपने को बताने वाला इसमें लोकल बागड़ बिल्ले भी शामिल थे, लेकिन कोई उनको पूछ रहा है, नहीं, आरोपी कहां के पकड़े गुजरात के ।  हिसाब बराबर हो गया , बाहर की टीम बाहर के लोग ।  मतलब  कि घर का जोगी जोगड़ा आन गांव का सिद्ध । 

आप समझ नहीं पा रहे हो,  लो चाय पियो । 

जी  मैं चाय नहीं पीता, ये भी आन गांव की सिद्ध है, चीन से आई है, मैं काढ़ा पीना पसंद करता हूं । वोकल फॉर लोकल वाला हूं । 

वीडियो खबर देखने के लिए हमारे चैनल को सबस्क्राइब करें । और अधिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए WWW.jhabuapost.com । लोकल भी ग्लोबल भी 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

About the Author

Easy WordPress Websites Builder: Versatile Demos for Blogs, News, eCommerce and More – One-Click Import, No Coding! 1000+ Ready-made Templates for Stunning Newspaper, Magazine, Blog, and Publishing Websites.

BlockSpare — News, Magazine and Blog Addons for (Gutenberg) Block Editor

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed