झाबुआ सर्किल में 770 आउटसोर्स बिजलीकर्मियों को एरियर नहीं देने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग

झाबुआ।पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के उज्जैन रीजन के अंतर्गत झाबुआ सर्किल व उसके अधीन झाबुआ और अलीराजपुर में कार्यरत करीब 770 आउटसोर्स ठेका बिजलीकर्मियों को न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण के बाद बढ़े हुए वेतन के रूप में करीब 1.60 करोड़ रुपये की बकाया एरियर राशि अब तक नहीं दी गई है। यह राशि इंदौर हाईकोर्ट…

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झाबुआ।
पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के उज्जैन रीजन के अंतर्गत झाबुआ सर्किल व उसके अधीन झाबुआ और अलीराजपुर में कार्यरत करीब 770 आउटसोर्स ठेका बिजलीकर्मियों को न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण के बाद बढ़े हुए वेतन के रूप में करीब 1.60 करोड़ रुपये की बकाया एरियर राशि अब तक नहीं दी गई है। यह राशि इंदौर हाईकोर्ट बेंच के आदेश और श्रम आयुक्त इंदौर के निर्देश के बावजूद पांच माह से लंबित है।

बकाया भुगतान न होने से नाराज बिजली आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के प्रांतीय संयोजक मनोज भार्गव और महामंत्री दिनेश सिसोदिया ने इस मामले में एमडी इंदौर, चीफ इंजीनियर उज्जैन, कलेक्टर झाबुआ और सहायक श्रम आयुक्त को पत्र लिखकर ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने और पेनाल्टी लगाने की मांग की है।

बताया गया कि अप्रैल 2024 से सितंबर 2024 तक झाबुआ सर्किल में ब्रॉडकास्टर्स कंपनी नोएडा का ठेका रहा, और इसके बाद अक्टूबर 2024 से फरवरी 2025 तक मोहाली स्थित टीडीएस मैनेजमेंट कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड का ठेका लागू रहा। दोनों ही कंपनियों ने 11 माह की बढ़ी हुई वेतन की एरियर राशि अब तक नहीं दी है।

संयोजक मनोज भार्गव ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि बिजली कंपनी के इंजीनियर चहेते ठेकेदारों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, और केवल खानापूर्ति वाले पत्र लिखकर जिम्मेदारी से बच रहे हैं। ठेकेदार बजट की कमी का बहाना बनाकर पांच माह से बकाया राशि रोक रहे हैं।

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भार्गव ने सवाल उठाया है कि यदि ठेकेदारों के पास बढ़े हुए वेतन की एडवांस राशि नहीं थी तो उन्होंने टेंडर की शर्तें क्यों स्वीकार कीं? उन्होंने स्पष्ट किया कि टेंडर शर्तों के अनुसार ठेकेदार को पहले अपने खर्च पर एरियर का भुगतान करना होता है, बाद में बिल प्रस्तुत कर बिजली कंपनी से भुगतान लिया जा सकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारों द्वारा हाईकोर्ट के आदेश और श्रम आयुक्त के निर्देशों की अवहेलना की जा रही है, परंतु बिजली कंपनी दोषी ठेकेदारों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर रही।

मनोज भार्गव ने यह भी कहा कि दो साल पहले बिजली आउटसोर्स कर्मियों की हड़ताल के दौरान अधिकारियों ने कर्मियों को ब्लैकलिस्ट कर नौकरी से बाहर कर दिया था, पर अब जब ठेकेदार नियम तोड़ रहे हैं, तब कोई कठोर कार्रवाई नहीं हो रही। इससे स्पष्ट होता है कि अधिकारियों का झुकाव ठेकेदारों के पक्ष में है।

उन्होंने मांग की है कि बिजली कंपनी को प्रिंसिपल नियोक्ता के रूप में खुद आगे आकर एरियर राशि का भुगतान करना चाहिए, यदि ठेकेदार देने में असफल रहे हैं।

एरियर राशि का वर्गीकरण इस प्रकार है:

अकुशल श्रमिक: ₹17,085

अर्द्धकुशल श्रमिक: ₹18,546

कुशल श्रमिक: ₹22,174

उच्च कुशल श्रमिक: ₹26,116

यह राशि ग्यारह माह की एरियर अवधि की है, जिसमें बोनस का अंतर भी शामिल है। इसे न देना न केवल संविदा शर्तों का उल्लंघन है बल्कि यह मानवाधिकारों का हनन और न्यायिक आदेशों की अवमानना भी है।

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virendra singh rathore
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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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