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झाबुआ: पेट्रोल पंप की अनूठी पहल, जहाँ पेट्रोल के साथ मुफ्त मिला ‘जीवन सुरक्षा कवच’

“नियमों की सख्ती अपनी जगह है, लेकिन कभी-कभी ‘अपनापन’ वो काम कर जाता है जो चालान नहीं कर पाता।”

झाबुआ (Jhabua): जहाँ एक तरफ देश  में कई जगहों  “बिना हेलमेट, पेट्रोल नहीं” (No Helmet, No Petrol) के बोर्ड नजर आते हैं, वहीं झाबुआ में मानवता और जिम्मेदारी की एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने सभी का दिल जीत लिया। यहाँ एक पेट्रोल पंप संचालक ने व्यवसाय से ऊपर उठकर समाजसेवा की नई लकीर खींची है—जहाँ नियम तोड़ने वालों को सजा नहीं, बल्कि सुरक्षा का उपहार दिया गया।

व्यापार से आगे समाजसेवा: 25 चालकों को मिले निशुल्क हेलमेट

झाबुआ स्थित मनोहर फ्यूल (नायरा पेट्रोल पंप) ने सड़क सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया। पंप संचालक चंद्रशेखर कटारा ने एक विशेष पहल करते हुए हेलमेट बांटे!

26 जनवरी गणतंत्र दिवस के मौके पर पंप पर पेट्रोल भरवाने ने आए ऐसे 25 बाइक सवार, जिन्होंने हेलमेट नहीं पहना था। पंप संचालक ने उन्हें निशुल्क हेलमेट पहनाए और भविष्य में अपनी सुरक्षा के लिए हमेशा हेलमेट पहनने का ‘वचन’ लिया।

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हेलमेट: महज एक वस्तु नहीं, परिवार की खुशियों की चाबी

​इस प्रेरक पहल के साथ-साथ यह संदेश भी दिया गया कि हेलमेट पहनना पुलिस से बचने के लिए नहीं, बल्कि खुद को बचाने के लिए जरूरी है।

जानिए, आखिर क्यों जरूरी है हेलमेट?

  1. सिर है तो सब है: सड़क दुर्घटनाओं में सबसे घातक चोट सिर पर लगती है। हेलमेट एक मजबूत ढाल बनकर आपके मस्तिष्क (Brain) की रक्षा करता है।
  2. परिवार का सहारा: याद रखें, घर से निकलते वक्त आप अकेले नहीं होते; आपके साथ आपके माता-पिता, पत्नी और बच्चों की उम्मीदें भी जुड़ी होती हैं। एक हेलमेट आपके परिवार को अनाथ होने से बचा सकता है।
  3. स्पष्ट दृश्य और सुरक्षा: अच्छी गुणवत्ता वाला हेलमेट धूल, बारिश, तेज हवा और कीड़ों से आँखों को बचाता है, जिससे बाइक चलाते समय आपका ध्यान नहीं भटकता।
  4. जिम्मेदार नागरिक: हेलमेट पहनना यह दर्शाता है कि आप एक शिक्षित और जिम्मेदार नागरिक हैं जो अपनी और दूसरों की सुरक्षा की परवाह करता है।

एक छोटी सी कोशिश, बड़ा बदलाव

​पंप संचालक चंद्रशेखर कटारा का मानना है कि उनका उद्देश्य केवल ईंधन बेचना नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी है। वहां मौजूद राहगीरों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यदि हर सक्षम व्यवसायी ऐसी जागरूकता दिखाए, तो सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।