झाबुआ झूला कांड: ‘पहले नहीं दिखा फ्रेक्चर , अब ऑपरेशन की तैयारी’, मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट कहां?

ऑटो चालक पिता का दर्द- ‘इलाज में धोखे में रखा, अब 10 दिन से रोजी-रोटी बंद’। प्रशासन की जांच रिपोर्ट और मुआवजे पर अब भी सन्नाटा। झाबुआ (Jhabua News): 19 जनवरी को सांदीपनि विद्यालय मैदान में हुए झूला हादसे का दर्द अभी थमा नहीं है। इस हादसे में घायल 10वीं की छात्रा सुहानी के मामले…

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ऑटो चालक पिता का दर्द- ‘इलाज में धोखे में रखा, अब 10 दिन से रोजी-रोटी बंद’। प्रशासन की जांच रिपोर्ट और मुआवजे पर अब भी सन्नाटा।

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झाबुआ (Jhabua News): 19 जनवरी को सांदीपनि विद्यालय मैदान में हुए झूला हादसे का दर्द अभी थमा नहीं है। इस हादसे में घायल 10वीं की छात्रा सुहानी के मामले में एक ऐसा पेच फंसा है जिसने परिजनों को आक्रोशित और चिंतित कर दिया है। जिस छात्रा को पैर में टांके आए थे और इलाज के  बाद  घर भेज दिया गया था, 10 दिन बाद उसके पैर में टखने का फैक्चर (Ankle Fracture) सामने आया है। अब डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह दे रहे हैं।

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इस नए खुलासे ने न केवल सरकारी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं!

पिता का आरोप: ‘हमें अंधेरे में रखा गया’

​सुहानी के पिता नरेंद्र, जो पेशे से एक ऑटो चालक हैं, का कहना है कि वे ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

“पहले पैर में 5 टांके आए थे, इलाज के बाद छुट्टी  मिल गई थी, बाद में पैर में सुजन आने लगी और दर्द होने लगा, जब हमने दोबारा एक्स-रे करवाया तो फैक्चर निकला। अगर पहले दिन जांच और इलाज मिलता  तो आज मेरी बच्ची की यह हालत नहीं होती।”

मेडिकल पड़ताल: क्या वाकई एक्स-रे में छिप सकता है फैक्चर?

परिजनों का गुस्सा जायज है, इस मामले के मेडिकल पहलू की पड़ताल की। हमने यह जानने की कोशिश की कि क्या डॉक्टर का यह दावा सही हो सकता है कि “पहले एक्स-रे में फैक्चर नहीं दिखा”?

​मेडिकल साइंस के अनुसार, ऐसा संभव है। इसे ‘Occult Fracture’ (छिपा हुआ फैक्चर) कहा जाता है।

  1. हेयरलाइन फैक्चर: कई बार हड्डी में बाल के बराबर बारीक दरार (Hairline Fracture) होती है, जो ताजी चोट और भारी सूजन (Swelling) के कारण शुरुआती एक्स-रे में पकड़ में नहीं आती।
  2. 7-10 दिन का नियम: चोट लगने के 7 से 10 दिन बाद जब हड्डी जुड़ने की प्रक्रिया शुरू होती है (Bone Resorption), तब वह दरार एक्स-रे में साफ दिखाई देने लगती है।. संभव है कि सुहानी को बारीक फैक्चर था जो जख्म या सूजन के कारण छिप गया।

सिस्टम भी टूटा: न मुआवजा, न रिपोर्ट

हादसे का शिकार सिर्फ सुहानी का पैर नहीं, बल्कि प्रशासन की संवेदनाएं भी हुई हैं।

  • आजीविका ठप: नरेंद्र पिछले 10 दिनों से ऑटो नहीं चला पाए हैं। बेटी के इलाज और दौड़-भाग में काम पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
  • मुआवजा सिफर: प्रशासन ने अब तक घायलों के लिए किसी मुआवजे की घोषणा नहीं की है।
  • जांच रिपोर्ट गायब: घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए थे। जनता सवाल पूछ रही है कि रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं हुई?
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मदद की गुहार

नरेंद्र और उनका परिवार डरा हुआ है। ऑपरेशन का खर्च और घर का खर्च कैसे चलेगा, यह चिंता उन्हें खाए जा रही है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और मदद की गुहार लगाई है।

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virendra singh rathore
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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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