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झाबुआ: राज्यपाल मंगुभाई छगनभाई पटेल का भगोरिया नृत्य से भव्य स्वागत, 2047 तक सिकल सेल मुक्त भारत का आह्वान

झाबुआ। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई छगनभाई पटेल गुरुवार को झाबुआ पहुंचे। यहां उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित सिकल सेल एनीमिया जागरूकता और कृषि उपकरण वितरण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उनके आगमन पर झाबुआ की आदिवासी परंपरा के अनुरूप पारंपरिक भगोरिया लोक नृत्य के साथ उनकी भव्य अगवानी की गई। नर्तक दल उन्हें नृत्य करते हुए सम्मानपूर्वक मंच तक लेकर आया। मंच पर मध्य प्रदेश शासन की कैबिनेट मंत्री निर्मला भूरिया, सांसद अनिता चौहान और पूर्व सांसद गुमान सिंह डामोर ने उन्हें तुलसी का पौधा भेंटकर स्वागत किया। प्रशासन की ओर से तीर-कमान और स्मृति चिन्ह देकर उनका पारंपरिक स्वागत किया गया।

विभागीय प्रदर्शनियों का किया अवलोकन

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कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा विकास और उपलब्धियों की प्रदर्शनियां लगाई गई थीं। राज्यपाल ने इन सभी का बारीकी से अवलोकन किया। उद्यानिकी विभाग की प्रदर्शनी में जिले के प्रगतिशील किसानों द्वारा उत्पादित जुकीनी, स्ट्रॉबेरी, पपीता और खीरा जैसी फसलें आकर्षण का केंद्र रहीं। पीएम एफएमई (PMFME) योजना के तहत सरकारी सहायता से तैयार नमकीन, मसाले और अन्य उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसके अलावा ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा हस्तशिल्प कला, आयुष्मान योजना, कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) की प्रदर्शनियों को देखकर राज्यपाल ने किसानों और स्व-सहायता समूहों के प्रयासों की सराहना की।

सिकल सेल की रोकथाम के लिए अधिकारियों की पीठ थपथपाई

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राज्यपाल ने सिकल सेल एनीमिया की रोकथाम के लिए झाबुआ और आलीराजपुर में हुए जमीनी कार्यों की तारीफ की। उन्होंने बताया कि झाबुआ में 8 लाख से अधिक लोगों की सिकल सेल स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसमें 16,000 से अधिक लोग ‘कैरियर’ (वाहक) और 1,787 लोग सिकल सेल से ग्रसित मिले हैं। उन्होंने इस बीमारी की गंभीरता को समझाते हुए कहा कि यह एक आनुवंशिक बीमारी है जिसमें लाल रक्त कणिकाएं हंसिए के आकार की हो जाती हैं, जिससे नसों में रक्त प्रवाह बाधित होता है और हड्डियों में दर्द होता है।

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​उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बीमारी को अगली पीढ़ी में जाने से रोकने के लिए शादी से पहले युवक-युवती दोनों की सिकल सेल जांच अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। सरकार ने 2047 तक इस बीमारी को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है, ताकि भविष्य में एक भी बच्चा इस बीमारी के साथ पैदा न हो।