2 दिन तक गहरी खाई में पड़ी रहीं 21 लाशें, मौत को मात देकर लौटे मजदूर ने बतायी खौफनाक दास्तां

अरुणाचल प्रदेश की सुरम्य लेकिन दुर्गम पहाड़ियों में एक ऐसी दुर्घटना घटी है जिसने हर किसी को सन्न कर दिया है। चीन सीमा से सटे अंजाव जिले में एक ट्रक के गहरी खाई में गिर जाने से 21 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे की सबसे भयावह बात यह रही कि दो दिनों…

अरुणाचल के अंजाव में दिल दहला देने वाला हादसा

अरुणाचल प्रदेश की सुरम्य लेकिन दुर्गम पहाड़ियों में एक ऐसी दुर्घटना घटी है जिसने हर किसी को सन्न कर दिया है। चीन सीमा से सटे अंजाव जिले में एक ट्रक के गहरी खाई में गिर जाने से 21 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे की सबसे भयावह बात यह रही कि दो दिनों तक किसी को भी इसकी भनक नहीं लगी। 48 घंटे तक शव और घायल मजदूर गहरी खाई में पड़े रहे। घटना का खुलासा तब हुआ जब इस हादसे में चमत्कारिक रूप से जिंदा बचा एकमात्र मजदूर, बुरी तरह घायल होने के बावजूद, खाई से बाहर निकला और रेंगते हुए सेना के कैंप तक पहुंचा।

अरुणाचल के अंजाव में दिल दहला देने वाला हादसा

मजदूरों से भरा ट्रक खाई में गिरा, 21 लोगों की मौत ।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना 8 दिसंबर (सोमवार) की रात की है। असम के तिनसुकिया जिले से 22 मजदूरों को लेकर एक ट्रक अरुणाचल के चागलागाम इलाके में एक निर्माण कार्य के लिए जा रहा था। हायुलियांग-चागलागाम रोड पर, जो कि बेहद दुर्गम और संकरी है, ड्राइवर ने नियंत्रण खो दिया और ट्रक लगभग 200-300 मीटर गहरी खाई में जा गिरा।

इलाका इतना सुनसान और जंगल घना था कि ट्रक के गिरने की आवाज किसी ने नहीं सुनी। वहां मोबाइल नेटवर्क न होने के कारण किसी से संपर्क भी नहीं हो सका।

मौत के मुंह से वापसी: बुद्धेश्वर दीप का संघर्ष

इस ट्रक में सवार 22 लोगों में से 21 की मौके पर या कुछ समय बाद मौत हो गई। केवल 22 वर्षीय बुद्धेश्वर दीप जिंदा बचे। बुद्धेश्वर ने बताया कि गिरने के बाद वह बेहोश हो गए थे। जब होश आया तो हर तरफ साथियों की लाशें बिखरी थीं।

घायल अवस्था में, बिना खाने-पीने के, बुद्धेश्वर ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अदम्य साहस दिखाते हुए गहरी खाई से ऊपर चढ़ाई शुरू की। लगभग 4 किलोमीटर तक पैदल चलकर और रेंगकर वह बुधवार (10 दिसंबर) की रात को BRO (सीमा सड़क संगठन) के एक कैंप (GREF Camp) तक पहुंचे। जब खून से लथपथ बुद्धेश्वर ने जवानों को आपबीती सुनाई, तब जाकर दुनिया को इस त्रासदी का पता चला।

रेस्क्यू ऑपरेशन में खराब मौसम और खड़ी ढलान बनी अड़चन ।

बुद्धेश्वर की सूचना पर भारतीय सेना, ITBP और स्थानीय पुलिस ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। लेकिन घना जंगल, खड़ी ढलान और खराब मौसम के कारण शवों को निकालने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। सेना के जवानों को रस्सियों के सहारे खाई में उतरना पड़ा है। अब तक ज्यादातर शवों को लोकेट कर लिया गया है।

मौत का समाचार मिलने के बाद शोक की लहर ।

सभी मजदूर असम के तिनसुकिया जिले के रहने वाले थे और दिहाड़ी मजदूरी के लिए सीमावर्ती इलाके में जा रहे थे। इस घटना ने सुरक्षा मानकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में संचार व्यवस्था की कमी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को सहायता का आश्वासन दिया है, वहीं घायल बुद्धेश्वर का इलाज डिब्रूगढ़ में चल रहा है।

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virendra singh rathore
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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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