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इंदौर-दाहोद रेलवे लाइन प्रोजेक्ट: प्रगति, चुनौतियां और भविष्य की उम्मीदें

मध्य प्रदेश और गुजरात को जोड़ने वाली इंदौर-दाहोद रेलवे लाइन परियोजना मालवा और आदिवासी बहुल क्षेत्रों के लिए एक महत्वाकांक्षी और महत्वपूर्ण परियोजना है। 204.76 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन न केवल इंदौर को गुजरात और महाराष्ट्र से जोड़ेगी, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में आर्थिक और सामाजिक विकास को भी गति देगी। इस परियोजना का उद्देश्य…

दाहोद इंदौर रेल लाइन


मध्य प्रदेश और गुजरात को जोड़ने वाली इंदौर-दाहोद रेलवे लाइन परियोजना मालवा और आदिवासी बहुल क्षेत्रों के लिए एक महत्वाकांक्षी और महत्वपूर्ण परियोजना है। 204.76 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन न केवल इंदौर को गुजरात और महाराष्ट्र से जोड़ेगी, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में आर्थिक और सामाजिक विकास को भी गति देगी। इस परियोजना का उद्देश्य इंदौर से मुंबई की दूरी को कम करना और रेल नेटवर्क की भीड़भाड़ को कम करना है। इस लेख में हम इस परियोजना की शुरुआत, वर्तमान प्रगति, 2025 के बजट प्रावधान, और इसके पूर्ण होने की संभावित समय-सीमा पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

इंदौर-दाहोद रेलवे लाइन प्रोजेक्ट की शुरूआत


इंदौर-दाहोद रेलवे लाइन प्रोजेक्ट की आधारशिला 8 फरवरी 2008 को तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने झाबुआ में रखी थी। उस समय इस परियोजना को 2011 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। रेल मंत्रालय ने 2007-08 में इस परियोजना को 678.54 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ मंजूरी दी थी। बाद में, जून 2012 में रेलवे बोर्ड ने विस्तृत मूल्यांकन के बाद 1640.04 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी। हालांकि, विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से इस परियोजना में कई बार देरी हुई। कोविड-19 महामारी के दौरान मई 2020 में काम पूरी तरह से ठप हो गया, लेकिन दिसंबर 2021 में रेलवे बोर्ड ने इसे फिर से शुरू करने की अनुमति दी।

दाहोद इंदौर रेल लाइन

परियोजना की गति और 2025 तक प्रगति
पिछले दो वर्षों में इस परियोजना में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। 204.76 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन को विभिन्न खंडों में बांटकर पूरा किया जा रहा है, जैसे कि इंदौर-टिही (29 किमी), टिही-गुणावद (28 किमी), गुणावद-नौगांव (14 किमी), धार-अमझेरा (20 किमी), अमझेरा-सरदारपुर (20 किमी), और सरदारपुर-झाबुआ (60 किमी)।

  • इंदौर-टिही खंड: यह 29 किलोमीटर का खंड जून 2016 और मार्च 2017 में पूरा हो चुका है। इस खंड पर वर्तमान में कंटेनर ट्रेनों का संचालन हो रहा है।
  • टिही-गुणावद-नौगांव खंड: इस खंड में तेजी से काम चल रहा है। टिही के पास 2.9 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, और अब केवल फिनिशिंग का काम बाकी है। गुणावद तक अर्थवर्क और 60% हिस्से में रेलवे ट्रैक बिछाने का काम पूरा हो चुका है। रतलाम मंडल ने मई 2025 तक इस खंड में ट्रेन संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा है।
  • दाहोद-कतवारा खंड: दाहोद से कतवारा तक का काम भी पूरा हो चुका है, और अब झाबुआ से सरदारपुर के बीच काम चल रहा है।
  • सुरंग और अन्य निर्माण: टिही-पिथमपुर के बीच 2.9 किलोमीटर लंबी सुरंग का काम सबसे बड़ी चुनौती थी, जिसे अब तकनीकी समस्याओं (जैसे पानी का रिसाव) को हल करते हुए लगभग पूरा कर लिया गया है। इस सुरंग में वॉटरप्रूफिंग और फिनिशिंग का काम अप्रैल-मई 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है। साथ ही, सागौर, गुणावद, नौगांव, झाबुआ, और पिटोल में नए रेलवे स्टेशन भवनों और प्लेटफार्मों का निर्माण शुरू हो चुका है।

2025 तक इस परियोजना का लगभग 70% काम पूरा हो चुका है, खासकर टिही, गुणावद, और धार में। हालांकि, सरदारपुर-झाबुआ खंड में खरमोर पक्षी अभयारण्य के कारण काम रुका हुआ है, और इसके लिए नए संरेखण (alignment) का सर्वे शुरू किया जा रहा है।

2025 के बजट में प्रावधान
2025-26 के वित्तीय वर्ष के लिए इस परियोजना के लिए 600 करोड़ रुपये का बजट आवंटन किया गया है। यह राशि सुरंग के फिनिशिंग कार्य, ट्रैक बिछाने, और स्टेशन निर्माण जैसे कार्यों को गति देने के लिए उपयोग की जा रही है। हालांकि, कुछ स्रोतों के अनुसार, यह राशि अपेक्षाकृत कम है, जिसके कारण परियोजना की गति पर सवाल उठ रहे हैं।

चुनौतियां
इस परियोजना को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है:

  1. जमीन अधिग्रहण: पिथमपुर, सुलावट, और एकलदोना गांवों में किसानों के विरोध के कारण जमीन अधिग्रहण में देरी हुई है। रेलवे ने धार कलेक्टर को पत्र लिखकर इस मुद्दे को हल करने का अनुरोध किया है।
  2. खरमोर पक्षी अभयारण्य: सरदारपुर-झाबुआ खंड में खरमोर पक्षी अभयारण्य के कारण पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी में देरी हो रही है। इसके लिए रेलवे ने संरेखण बदलने का फैसला किया है, जिसके लिए नया सर्वे मई 2025 में शुरू होगा।
  3. तकनीकी समस्याएं: टिही-पिथमपुर सुरंग में पानी का रिसाव और कोविड-19 के दौरान काम बंद होने से प्रगति प्रभावित हुई।
  4. बढ़ती लागत: परियोजना की शुरुआती लागत 678.54 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 2000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। कुछ अनुमानों के अनुसार, यह लागत 6500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।

कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट?
रेलवे ने इस परियोजना को 2026 तक पूरी तरह से पूरा करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, कुछ स्रोतों और एक्स पोस्ट्स के अनुसार, सरदारपुर-झाबुआ खंड में देरी और पर्यावरण मंजूरी जैसे मुद्दों के कारण इसे 2027 तक पूरा करने की संभावना जताई जा रही है। रतलाम मंडल ने मई 2025 तक इंदौर-नौगांव खंड में ट्रेन संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा है, जो इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।

प्रोजेक्ट का महत्व
यह रेल लाइन मध्य प्रदेश के धार, झाबुआ, और गुजरात के दाहोद जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ेगी, जिससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। यह परियोजना इंदौर से मुंबई की दूरी को 830 किलोमीटर से घटाकर लगभग 774-775 किलोमीटर कर देगी, जिससे यात्रा समय में कमी आएगी। इसके अलावा, यह रेल लाइन पिथमपुर के औद्योगिक क्षेत्र को वडोदरा और मुंबई जैसे व्यापारिक केंद्रों से जोड़ेगी, जिससे माल ढुलाई को गति मिलेगी।

गेम चेंजर साबित हो सकता प्रोजेक्ट, सवाल वहीं कि कब पूरा होगा ।
इंदौर-दाहोद रेलवे लाइन प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश और गुजरात के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। हालांकि, इसकी शुरुआत से लेकर अब तक कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, लेकिन हाल के वर्षों में काम में आई तेजी ने उम्मीद जगाई है। 2025 में इस परियोजना का एक बड़ा हिस्सा, विशेष रूप से इंदौर-नौगांव खंड, पूरा होने की संभावना है। 600 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान के साथ, रेलवे इस परियोजना को 2026-27 तक पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह परियोजना न केवल यात्रियों के लिए सुविधाजनक होगी, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों के विकास और इंदौर-मुंबई कनेक्टिविटी को नया आयाम देगी।

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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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