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Jhabua: पलायन पर जयस जिलाध्यक्ष का सरकार से सवाल – “आदिवासियों को वोट बैंक मत समझो”

पलायन

झाबुआ, 23 मई – आदिवासी बहुल जिलों से बढ़ते पलायन को लेकर जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) के झाबुआ जिलाध्यक्ष विजय डामोर ने सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के इंदौर संभाग के झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, धार, खंडवा, खरगोन, देवास जैसे जिलों से सबसे ज़्यादा पलायन हो रहा है, लेकिन सरकार सिर्फ़ वादे करती है, ज़मीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिखता।

महिलाओं और बच्चियों पर हो रहे अत्याचार

विजय डामोर ने कहा कि पलायन करने वाले करीब 80 प्रतिशत आदिवासी परिवार मजदूरी के लिए राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में जाते हैं। वहां उनके साथ अत्याचार, शोषण और महिलाओं-बच्चियों पर यौन उत्पीड़न जैसे मामलों की संख्या बढ़ रही है। गाँवों में सिर्फ बुज़ुर्ग और एक-दो सदस्य ही रह जाते हैं, खेती भी प्रभावित होती है।

स्थानीय रोज़गार ही पलायन रोकने का समाधान

जयस नेता ने स्पष्ट कहा कि अगर सरकार वाकई आदिवासी हितैषी है, तो उसे स्थानीय स्तर पर रोज़गार देना होगा। पढ़े-लिखे युवाओं को नौकरी, स्वरोजगार और जिला स्तर पर रोजगार की योजनाएं चलाई जाएं ताकि किसी को भी बाहर जाने की मजबूरी न हो।

कैबिनेट में उठाया जाए मुद्दा

विजय डामोर ने मांग की कि राज्य सरकार को कैबिनेट की बैठकों में पलायन को प्रमुख मुद्दा बनाना चाहिए। सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया जाए कि वे पलायन रोकने की ठोस कार्ययोजना बनाएं। जब तक स्थानीय रोजगार नहीं मिलेगा, आदिवासी समाज पलायन करता रहेगा और यह समाजिक-सांस्कृतिक रूप से भी घातक होगा।

“आदिवासियों को वोट बैंक मत समझो”

जयस जिलाध्यक्ष ने कहा कि सरकार आदिवासियों को केवल वोट बैंक मानने की मानसिकता छोड़े। अगर सरकार उन्हें उनका अधिकार देगी, तो पलायन अपने आप रुक जाएगा। जब झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, धार, खंडवा जैसे ज़िलों से 12 महीने पलायन रुकेगा, तभी लगेगा कि सरकार वाकई विकास कर रही है।

मुख्य मांगें

  • स्थानीय स्तर पर रोजगार की व्यवस्था
  • शिक्षित युवाओं को सरकारी और निजी क्षेत्र में नौकरी
  • सभी जिलों में रोजगार मेले और योजनाएं
  • महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की गारंटी
  • कैबिनेट में पलायन को गंभीरता से लिया जाए

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