​Jhabua Crime: जिसे कुदरती मौत समझा, वो निकली हत्या; पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला राज, भाई ही निकला कातिल

झाबुआ। कहते हैं ‘जर, जोरू और जमीन’ अच्छे-अच्छे रिश्तों में दरार डाल देती है। झाबुआ जिले के राणापुर में एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ जमीन के एक टुकड़े के लिए खून के रिश्ते का ही खून हो गया। राणापुर पुलिस ने एक ‘अंधे कत्ल’ (Blind Murder) की गुत्थी…

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झाबुआ।

कहते हैं ‘जर, जोरू और जमीन’ अच्छे-अच्छे रिश्तों में दरार डाल देती है। झाबुआ जिले के राणापुर में एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ जमीन के एक टुकड़े के लिए खून के रिश्ते का ही खून हो गया। राणापुर पुलिस ने एक ‘अंधे कत्ल’ (Blind Murder) की गुत्थी को महज 5 दिनों में सुलझाते हुए खुलासा किया है कि मृतक का हत्यारा कोई और नहीं, बल्कि उसका सगा भाई ही है।

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क्या था मामला?

​घटना 3 जनवरी 2026 की है। पुलिस को सूचना मिली थी कि दुला मचार नामक व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। शुरुआत में यह मामला सामान्य लग रहा था। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

पीएम रिपोर्ट ने पलट दी कहानी

​मामले में नया मोड़ तब आया जब डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि दुला की मौत सामान्य नहीं थी, बल्कि उसका गला दबाकर (Strangulation) हत्या की गई थी। इस रिपोर्ट के आधार पर थाना राणापुर पुलिस ने तत्काल हत्या का मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की।

जमीन का विवाद बना काल

​पुलिस ने जब कड़ियां जोड़ीं और परिजनों से सख्ती से पूछताछ की, तो शक की सुई मृतक के सगे भाई हिमता मचार पर जाकर रुकी।

पूछताछ में सामने आया कि घटना वाले दिन (3 जनवरी) दोनों भाइयों के बीच जमीन के बंटवारे को लेकर तीखा विवाद हुआ था। इसी रंजिश को पालकर बैठे हिमता मचार ने रात के अंधेरे में अपने ही भाई दुला का गला घोंट दिया और उसे मौत की नींद सुला दिया।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

​अपराध कबूलने के बाद पुलिस ने आरोपी भाई हिमता मचार को गिरफ्तार कर लिया है। इस अंधे कत्ल का पर्दाफाश करने में थाना प्रभारी राणापुर निरीक्षक दिनेश रावत और उनकी टीम की सराहनीय भूमिका रही।

इस टीम ने सुलझाई गुत्थी

​कार्रवाई में टीआई दिनेश रावत के साथ उपनिरीक्षक ब्रिजेन्द्र छाबरिया, एएसआई कडेबसिंह मेडा, प्रधान आरक्षक राजेन्द्र (244), आरक्षक दिनेश (19), आरक्षक विवेक कुमार (163) और आरक्षक दिनेश भयडिया (607) का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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virendra singh rathore
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संस्थापक और संपादक है, 15 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं । नेशनल,रीजनल चैनल में रिपोर्टिंग का अनुभव । डिजिटल पत्रकार के रूप मे भी सक्रिय हैं.

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