झाबुआ: सल्फास की गोली खाने से महिला की मौत, मेडिकल स्टोर संचालक गिरफ्तार, दुकान सील

पुलिस ने संचालक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, लापरवाही से मौत, और जहरीली वस्तु के अवैध भंडारण जैसी धाराओं में केस दर्ज किया है। साथ ही दुकान से संबंधित जरूरी दस्तावेज भी जब्त कर लिए हैं।

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झाबुआ के पास धर्मपुरी गांव की रहने वाली महिला रेखा की सल्फास की गोली खाने से मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि झाबुआ शहर के एक मेडिकल स्टोर पर दर्द की दवा लेने गई रेखा को गलत दवा दे दी गई, जो बाद में उसकी जान ले गई।

परिजनों के मुताबिक, रेखा को दांत में तेज दर्द हो रहा था। वह अपने पति के साथ झाबुआ शहर स्थित इंडिया मेडिकल स्टोर पर दवा लेने पहुंची थी। वहां मौजूद स्टाफ ने उसे कथित रूप से सल्फास की गोली दे दी। गोली लेने के लगभग आधे घंटे बाद ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। जब उसे अस्पताल ले जाया गया, तब डॉक्टरों ने जांच कर बताया कि महिला ने जहरीली सल्फास की गोली खाई है।

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मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई

मामला सामने आने के बाद परिजनों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। झाबुआ कोतवाली पुलिस ने इंडिया मेडिकल स्टोर के संचालक मनोज बबेल को हिरासत में ले लिया। साथ ही ड्रग इंस्पेक्टर गीतम पाटोदिया भी मौके पर पहुंचीं और उन्होंने मेडिकल स्टोर को सील कर दिया। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि सल्फास की गोली किसी भी मेडिकल स्टोर में बेचना कानूनन अपराध है, क्योंकि यह ड्रग लाइसेंस के तहत नहीं आती।

मेडिकल संचालक की सफाई और पुलिस की प्रतिक्रिया

संचालक का कहना है कि उनके कर्मचारी ने यह दवा गलती से दे दी और वह गोली उसके खुद के उपयोग के लिए रखी गई थी। हालांकि सवाल उठता है कि यदि दवा निजी उपयोग के लिए थी तो उसे स्टाफ के पास क्यों रखा गया, और उसने कैसे यह समझ लिया कि दांत दर्द की दवा मांग रही महिला को कीटनाशक देना है?

पुलिस ने संचालक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, लापरवाही से मौत, और जहरीली वस्तु के अवैध भंडारण जैसी धाराओं में केस दर्ज किया है। साथ ही दुकान से संबंधित जरूरी दस्तावेज भी जब्त कर लिए हैं।

व्यवस्था पर बड़े सवाल

यह घटना केवल एक लापरवाही नहीं, बल्कि झाबुआ जिले की मेडिकल दुकानों में फैली गड़बड़ियों को उजागर करती है। जिले में कई मेडिकल स्टोर बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट, किराए की डिग्री और बिना अनुभव वाले कर्मचारियों के सहारे चल रहे हैं। इससे लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है।

अब उठती हैं ये ज़रूरी मांगें:

1. जिले में सभी मेडिकल स्टोर्स की व्यापक जांच हो।

2. बिना योग्य फार्मासिस्ट के संचालन पर सख्त कार्रवाई हो।

3. मेडिकल स्टाफ का प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र अनिवार्य किया जाए।

4. किसी भी दुकान में कीटनाशक या प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री पर सख्त प्रतिबंध लागू हो।

मध्यप्रदेश में मेडिकल स्टोर संचालन से जुड़े प्रमुख नियम और गाइडलाइन:

1. ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के तहत मेडिकल स्टोर खोलने के लिए वैध ड्रग लाइसेंस जरूरी है।

2. दुकान पर एक पंजीकृत फार्मासिस्ट की मौजूदगी अनिवार्य है।

3. Schedule H, H1 और X की दवाएं बिना डॉक्टर की पर्ची के बेचना गैरकानूनी है।

4. कोई भी मेडिकल स्टोर कीटनाशक या सल्फास जैसी विषैली वस्तु नहीं रख सकता।

5. ड्रग इंस्पेक्टर को समय-समय पर निरीक्षण करने और लाइसेंस रद्द करने का अधिकार है।

6. फार्मासिस्ट की डिग्री/लाइसेंस को किराए पर देना प्रतिबंधित है।

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