Jhabua / झकनावदा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार (18 जनवरी 2026) को झकनावदा में ऐतिहासिक ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। हजारों की संख्या में जुटे समाजजनों के बीच “जय श्री राम” के उद्घोष से पूरा नगर गूंज उठा। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संघ-जनजाति कार्य के प्रांतीय संयोजक कैलाश अमलियार ने हुंकार भरते हुए कहा कि हिंदुओं की एकजुटता और गर्जना ऐसी होनी चाहिए कि विधर्मी भी कांप उठें।
इस सम्मेलन में जहाँ एक ओर आदिवासी संस्कृति की छटा बिखरी, वहीं दूसरी ओर नन्हे बच्चों ने नाटक के जरिए धर्मांतरण के कुचक्र का पर्दाफाश किया।
झकनावदा में भव्य कलश यात्रा और मयूर नृत्य बना आकर्षण का केंद्र
Virat Hindu Sammelan की शुरुआत एक भव्य कलश यात्रा से हुई। महिला मंडल द्वारा सिर पर कलश धारण कर, बैंड-बाजों की धुन और गरबा-रास के साथ यह यात्रा शनि मंदिर से शुरू हुई। मिस्त्री मोहल्ला, सदर बाजार और सीरवी मोहल्ला होते हुए यात्रा मधु कन्या नदी तट स्थित महाकाल मंदिर प्रांगण पहुंची।
आदिवासी नृत्य: आयोजन में Jhabua की पहचान यानी आदिवासी संस्कृति भी देखने को मिली। 8 मांदलों (पारंपरिक वाद्य यंत्र) की थाप पर युवाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में जमकर नृत्य किया।
आकर्षण का केंद्र: यात्रा में हनुमान जी और वानर सेना के वेश में कलाकारों ने अद्भुत प्रदर्शन किया।

आदिवासी संस्कृति का रंग: 8 मांदलों की थाप पर थिरके युवा
विराट हिंदू सम्मेलन में आदिवासी संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। आयोजन में विशेष रूप से 8 मांदलों (पारंपरिक वाद्य यंत्र) की व्यवस्था की गई थी। मांदल की थाप पर युवाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में उत्साह के साथ नृत्य किया, जिसने समां बांध दिया।
बच्चों ने नाटक से खोली ‘चमत्कारी पानी’ की पोल
सम्मेलन का सबसे भावुक और जागरूक करने वाला हिस्सा बच्चों द्वारा प्रस्तुत नाट्य रूपांतरण रहा। बालिकाओं और बच्चों ने नाटक के जरिए समाज को संदेश दिया कि कैसे भोले-भाले लोगों को लालच और चमत्कार के नाम पर धर्मांतरण के जाल में फंसाया जा रहा है।
नाटक का संदेश: नाटक में दिखाया गया कि जब एक बच्चा बीमार होता है और ओझा से ठीक नहीं होता, तो उसे चर्च ले जाया जाता है। वहां ‘फादर’ उसे पानी पिलाते हैं और वह ठीक हो जाता है। बाद में राज खुलता है कि उस पानी में दर्द निवारक (Painkiller) एलोपैथिक दवा मिली होती है, जिसे ‘चमत्कार’ बताकर धर्म बदला जाता है। बच्चों ने मंच से अपील की, “बीमारी के नाम पर होने वाले इस छलावे से बचें और अपनी संस्कृति न छोड़ें।”
पूर्वजों ने धर्म के लिए दिए हैं बड़े बलिदान: महंत रामेश्वर गिरी
श्रृंगेश्वर धाम के गादीपति महंत श्री रामेश्वर गिरी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि, “हमारे पूर्वजों ने मुगलों के आक्रमण सहे, लेकिन धर्म नहीं छोड़ा। हिंदू धर्म की रक्षा के लिए बड़े-बड़े बलिदान दिए गए हैं। आज हमें अपनी विरासत को सहेज कर रखना है। हिंदू धर्म ही विश्व का आधार है।”
हर घर में हो साप्ताहिक सत्संग: कैलाश अमलियार
मुख्य वक्ता कैलाश अमलियार ने अपने ओजस्वी भाषण में कहा कि, “हिंदू समाज को अब जागना होगा। हमें सप्ताह में कम से कम एक बार अपने घर में धार्मिक अनुष्ठान या सत्संग करना चाहिए। इससे बच्चों में अच्छे संस्कार आएंगे और वे गलत रास्ते पर नहीं जाएंगे।” उन्होंने उपस्थित जनसमूह को भारत माता की जय और वंदे मातरम के गगनभेदी नारे लगवाए।
कार्यक्रम का समापन: कार्यक्रम की शुरुआत मां भारती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। संचालन अरुण बैरागी ने किया और आभार प्रवीण बैरागी ने माना।
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