झाबुआ (Jhabua Post): अक्सर देखा जाता है कि सड़क दुर्घटना के वक्त घायल व्यक्ति को अगर समय पर और सही इलाज मिल जाए, तो उसकी जान बचाई जा सकती है। पैसों की कमी या निजी अस्पतालों की आनाकानी अब किसी घायल की जान पर भारी नहीं पड़ेगी। सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोकने के लिए लागू की गई ‘पीएम राहत योजना’ (PM RAHAT Yojana) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए झाबुआ कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने कड़ा रुख अपनाया है।
गुरुवार (04 जून 2026) को कलेक्टर ने जिले के सभी निजी अस्पताल संचालकों की बैठक ली और स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क दुर्घटना में घायल किसी भी मरीज को इलाज देने से इंकार नहीं किया जा सकता।

क्या है ‘पीएम राहत योजना’ (PM RAHAT)?
केंद्र सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना 13 फरवरी 2026 से देशभर में लागू की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वित्तीय कारणों (पैसे न होने) से कोई भी दुर्घटना पीड़ित जीवनरक्षक उपचार से वंचित न रहे।
- मुफ्त इलाज: किसी भी श्रेणी की सड़क (स्टेट या नेशनल हाईवे) पर दुर्घटना होने पर पीड़ित को अधिकतम 1 लाख 50 हजार रुपये तक का ‘कैशलेस उपचार’ (Cashless Treatment) दिया जाएगा।
- 7 दिन की अवधि: यह लाभ दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों की अवधि तक मिलेगा।
- स्टेबलाइजेशन (Stabilization) नियम: सामान्य घायलों के मामलों में अधिकतम 24 घंटे तक, जबकि जीवन के लिए घातक और गंभीर मामलों में अधिकतम 48 घंटे तक जान बचाने वाला स्टेबलाइजेशन उपचार मुफ्त प्रदान किया जाएगा।
अस्पतालों के लिए TMS पोर्टल और रजिस्ट्रेशन लिंक
कलेक्टर डॉ. भरसट ने निजी अस्पताल संचालकों को दो टूक शब्दों में निर्देश दिए हैं कि जिले के सभी निजी अस्पताल इस योजना के अंतर्गत अनिवार्य रूप से खुद को एम्पैनल (Empanel) करें।
मुफ्त इलाज के बाद क्लेम (पैसा) प्राप्त करने और अस्पताल के पंजीयन के लिए भारत सरकार के पोर्टल का उपयोग करना अनिवार्य है: अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन एवं क्लेम हेतु (TMS Portal): https://tms.pmjay.gov.in योजना की विस्तृत जानकारी (सड़क परिवहन मंत्रालय): https://morth.nic.in
(अस्पताल संचालक ऊपर दिए गए TMS पोर्टल लिंक पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन और आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण कर सकते हैं। तकनीकी समस्याओं के लिए जिला स्तरीय टीम मदद करेगी।)
‘गोल्डन ऑवर’ न हो बर्बाद, आम जनता डायल करे 112
कलेक्टर ने सख्त हिदायत दी है कि घायल मरीज के अस्पताल आते ही सबसे पहले इलाज शुरू होना चाहिए। शुरुआती एक घंटा यानी ‘गोल्डन ऑवर’ (Golden Hour) जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि यदि कहीं सड़क दुर्घटना होती है, तो पीड़ित खुद, कोई राहगीर या मौके पर मौजूद कोई भी व्यक्ति तुरंत डायल 112 (Dial 112) पर कॉल कर सकता है। यहां से आपको तुरंत नजदीकी ‘नामित अस्पताल’ (Empanelled Hospital) की जानकारी और एंबुलेंस की सहायता मिल जाएगी।
इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. बी.एस. बघेल, महिला एवं बाल विकास विभाग की सहायक संचालक सुश्री वर्षा चौहान, सहायक संचालक बालूसिंह सस्तिया सहित जिले के तमाम डॉक्टर्स और निजी अस्पताल संचालक मौजूद रहे।
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