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क्या है रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम – जिसे जामली के ब्रजभूषण सिंह कर रहे हैं !

जामली, झाबुआ जिले का एक छोटा-सा गाँव, यहीं रहने वाले हैं ब्रजभूषण सिंह जामली, जिनका जिले में नवाचार की चर्चा हो रही है । एक..

क्या है रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम

जामली, झाबुआ जिले का एक छोटा-सा गाँव, यहीं रहने वाले हैं ब्रजभूषण सिंह जामली, जिनका जिले में नवाचार की चर्चा हो रही है । एक किसान जिनके मन में कुछ नया करने की जिज्ञासा हमेशा से थी। खेती तो सालों होती आ रही है, लेकिन वे कुछ ऐसा करने चाहते थे जो कुछ अलग हो, मछली पालन के बारे में विचार आया और फिर इसको लेकर नवाचार और नवीन तकनीकों के बारे में जानना शुरू किया ।

जिज्ञासा से शुरू हुआ सफर

“क्यों न मछली पालन को एक मौका दिया जाए?” लेकिन यह कोई साधारण तालाब में मछली पालने की बात नहीं थी। उनकी नजर गई रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) पर – एक ऐसी आधुनिक तकनीक, जिसमें कम पानी और कम जगह में मछलियाँ पाली जा सकती हैं। RAS पानी को शुद्ध कर बार-बार इस्तेमाल करता है, जिससे मछलियों को स्वच्छ वातावरण मिलता है और उत्पादन कई गुना बढ़ जाता है। यह तकनीक तिलापिया, रोहू, और कतला जैसी मछलियों के लिए आदर्श है।

ब्रजभूषण की जिज्ञासा ने उन्हें देवास और इंदौर की ओर खींचा। उन्होंने वहाँ के मछली पालकों से मुलाकात की, उनके फार्म देखे, और RAS की बारीकियाँ सीखीं। “जब मैंने देखा कि इतने कम पानी में इतनी मछलियाँ पाली जा सकती हैं, तो मेरा विश्वास बढ़ गया,” ब्रजभूषण ने बताया। उनकी यह उत्सुकता उन्हें मत्स्य विभाग के अधिकारियों के संपर्क में लाई।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना: सपनों को पंख

ब्रजभूषण की मेहनत को तब असली बल मिला, जब उन्हें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) का सहारा मिला। यह योजना, जो 2020 में शुरू हुई, मछली पालकों को तकनीकी और वित्तीय सहायता देती है। ब्रजभूषण को RAS यूनिट बनाने के लिए सब्सिडी और तकनीकी मार्गदर्शन मिला। मत्स्य विभाग के सहायक संचालक दिलीप सोलंकी ने उन्हें सिस्टम की स्थापना में मदद की। ब्रजभूषण ने अपने खेत में टैंक, बायोफिल्टर, और ऑक्सीजन पंप लगाए। उनका ध्यान पानी की गुणवत्ता, जैसे एमोनिया नियंत्रण और जल प्रवाह, पर था, ताकि मछलियाँ स्वस्थ रहें।

आला अधिकारियों ने किया दौरा ब्रजभूषण सिंह के प्रयासों का सराहा ।

जामली गाँव में एक खास हलचल थी। जिले के आला अधिकारी कलेक्टर के साथ ब्रजभूषण के निर्माणाधीन RAS यूनिट को देखने पहुँचे। अधिकारियों ने उनके काम की सराहना की और इसे झाबुआ के लिए एक मील का पत्थर बताया। ब्रजभूषण ने अपनी कहानी साझा की – कैसे एक जिज्ञासा ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया। अधिकारियों ने इसे कृषि के संबद्ध क्षेत्र में एक सतत मॉडल माना और अन्य किसानों को प्रेरित करने की बात कही।

क्या है  रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम - जिसे जामली के ब्रजभूषण सिंह कर रहे हैं !

अधिकारियों ने निर्देश दिए कि ब्रजभूषण और अन्य हितग्राहियों को हैदराबाद में प्रशिक्षण और एक्सपोजर विजिट का अवसर दिया जाए। “पानी में एमोनिया न बढ़े, जल का प्रवाह सही रहे, ये सब सीखना जरूरी है,” उन्होंने कहा। मत्स्य विभाग को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि ब्रजभूषण को तकनीकी प्रशिक्षण मिले, ताकि उनका मॉडल और मजबूत हो।

ब्रजभूषण का RAS यूनिट अभी निर्माणाधीन है, लेकिन यह पहले से ही गाँव वालों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। जामली के अलावा, मदरानी गाँव में भी RAS यूनिट बन रही है। ब्रजभूषण का सपना है कि उनका काम न केवल उनकी आजीविका को बेहतर बनाए, बल्कि झाबुआ के अन्य किसानों को भी मछली पालन की ओर आकर्षित करे।

ब्रजभूषण सिंह जामली के प्रयास और नवाचार झाबुआ के हर उस किसान के लिए प्रेरणा है, जो कुछ नया करना चाहता है। उनकी जिज्ञासा, सरकारी सहायता, और मेहनत ने साबित किया कि आदिवासी क्षेत्रों में भी आधुनिक तकनीक के साथ बड़े सपने देखे जा सकते हैं। RAS जैसे नवाचार और PMMSY जैसे समर्थन के साथ, झाबुआ मछली पालन का एक नया केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है। ब्रजभूषण का यह छोटा-सा कदम, जामली से शुरू होकर, पूरे झाबुआ के लिए मछली पालन के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

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