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झाबुआ ‘गौ-नरसंहार’: 100 से ज़्यादा गौवंश का कत्ल, वन विभाग की जमीन पर कैसे चली ‘मांस की फैक्ट्री’? गौरक्षा प्रमुख सोहन विश्वकर्मा ने उठाए गंभीर सवाल ।

गौरक्षा प्रमुख सोहन विश्वकर्मा मिली कलक्टर और अधिकारियों से ।

मध्यप्रदेश में गौवंश की क्रूर हत्या: झाबुआ के जंगल में फैला खून और मांस के अवशेष, सवाल-दर-सवाल

झाबुआ, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश का झाबुआ जिला इस समय गौवंश के सामूहिक नरसंहार को लेकर उबल रहा है। जिले के सजेली नान्या सात (Sajeli Nanya Sat) के जंगल में हुए गौहत्या के सनसनीखेज खुलासे ने पूरे प्रशासनिक तंत्र की पोल खोल दी है। 7 दिसंबर को जब यह काला कारोबार सामने आया, तब से लेकर अब तक, हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं जो इस ओर इशारा करते हैं कि यह केवल गौहत्या नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और वर्षों पुराना काला धंधा था।

इस घटना की गंभीरता को समझते हुए बुधवार को क्षेत्रीय गौरक्षा प्रमुख सोहन विश्वकर्मा, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पदाधिकारियों के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। जंगल में मौजूद मंजर बेहद भयावह था—100 से भी अधिक गौवंश की क्रूरता से हत्या के निशान, तालाब में फेंकी गई गायों की खालें, जमीन पर जमा हुआ खून, और चारों तरफ बिखरे मांस के अवशेष। यह दृश्य साफ बता रहा था कि यह स्थान एक-दो दिन नहीं, बल्कि लंबे समय से अवैध कत्लगाह के रूप में इस्तेमाल हो रहा था।

प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक: कलेक्टर-एसपी से जवाब तलब

घटना स्थल से लौटने के तुरंत बाद, गौरक्षा प्रमुख सोहन विश्वकर्मा ने जिला प्रशासन से तत्काल मुलाकात की और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

  • शाम को चर्चाओं का दौर: पहले वीएचपी पदाधिकारी डीएफओ कार्यालय पहुँचे, जहाँ शाम 7 बजे एसपी शिव दयाल गुर्जर और एडीएम चंदर सिंह सोलंकी चर्चा के लिए पहुँचे। पदाधिकारियों ने स्पष्ट मांग रखी कि कलेक्टर को भी चर्चा के लिए बुलाया जाए।
  • कलेक्टर कार्यालय में मुलाकात: इसके बाद लगभग 7:30 बजे, प्रतिनिधि मंडल कलेक्टर कार्यालय पहुँचा और कलेक्टर से मिलकर दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

गौ रक्षा प्रमुख के गंभीर आरोप: धर्मांतरण, मीट माफिया और सबूतों को मिटाने की साजिश

गौ रक्षा प्रमुख सोहन विश्वकर्मा ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसने इस मामले की आंच को और तेज़ कर दिया है।

  1. मीट माफिया और धर्मांतरित लोगों की संलिप्तता: विश्वकर्मा ने स्पष्ट कहा कि इतने बड़े पैमाने पर चल रहे गौ मांस विक्रय के पीछे धर्मांतरित लोगों और संगठित मीट माफिया का हाथ हो सकता है। यह केवल गौहत्या नहीं, बल्कि एक आपराधिक गिरोह है।
  2. सबूत मिटाने के प्रयास: उन्होंने आरोप लगाया कि गौवंश के मांस और खून से सने अवशेषों को छुपाकर या हटाकर सबूतों को मिटाने की कोशिश की जा रही है, ताकि मामले की तह तक न पहुँचा जा सके।
  3. धार्मिक दुर्भावना का आरोप: उन्होंने कहा कि इस मांस को स्थानीय स्तर पर बेचने के साथ ही कई हिंदुओं को गौ मांस खिलाकर ‘दूषित’ करने की साजिश भी की गई होगी। इसका विक्रय पड़ोसी राज्य गुजरात और राजस्थान में भी होता रहा होगा।

सवालों के घेरे में पुलिस, वन विभाग और स्थानीय निकाय

इस घटना ने पुलिस और वन विभाग की कार्यशैली पर सबसे बड़े प्रश्न खड़े किए हैं। यह कैसे संभव हुआ कि वन विभाग की जमीन पर, जिस पर वह अपनी एक इंच जमीन भी नहीं छोड़ने का दावा करता है, वहाँ वर्षों से यह ‘गौ मांस फैक्ट्री’ चलती रही और किसी को कानों-कान खबर नहीं लगी?

1. पुलिस और वन विभाग की ‘अनदेखी’

  • मिलीभगत या घोर लापरवाही? विश्वकर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस, वन विभाग और स्थानीय पंचायत की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। क्या सालों तक चला यह काला कारोबार इन विभागों की मिलीभगत से चल रहा था?
  • अधिकारी जांच की मांग: उन्होंने मांग की कि जो अधिकारी अपनी ड्यूटी में दोषी पाए गए हैं, उन पर भी तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाए।

2. सप्लाई चेन का राज और सुनियोजित गिरोह

घटनास्थल से बरामद एक डायरी ने इस पूरे कारोबार की रीढ़ को उजागर कर दिया है।

  • व्यापक वितरण नेटवर्क: डायरी से पता चला है कि गौ मांस की सप्लाई सिर्फ झाबुआ ही नहीं, बल्कि मेघनगर, थांदला, पेटलावद, अंतरवेलिया, कल्याणपुरा जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों में होती थी। इसमें कई लोगों के नाम और पते भी दर्ज हैं, जिन्हें यह मांस पहुँचाया जाता था।
  • सवाल: क्या यह सुनियोजित तरीके से चलने वाला एक संगठित गिरोह था, जो पूरे क्षेत्र में गौवंश की स्लॉटरिंग (Slaughtering) करके मांस बेचता था? सालों से चल रहे इस ‘काल कारोबार’ की भनक प्रशासन को क्यों नहीं लगी?

3. सत्ताधारी संगठन पर भी चुप्पी का सवाल

सवालों के घेरे में वे चेहरे भी हैं, जो सत्ताधारी संगठन से जुड़े होने का दम भरते हैं। जिस संगठन के पास जिला स्तर से लेकर पन्ना और शक्ति केंद्र तक मजबूत नेटवर्क है, उसे भी इस जंगल में चल रहे अवैध धंधे की जानकारी क्यों नहीं मिली?

मध्यप्रदेश में गौवंश कानून और आगे की राह

मध्य प्रदेश में मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 लागू है, जिसके तहत गौवंश की हत्या पूर्णतः प्रतिबंधित है और इसमें 7 से 10 साल तक की कैद का प्रावधान है।

  • विहिप की चेतावनी: विहिप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर ठोस और कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, और वन विभाग की जमीन पर अवैध रूप से बने चर्च/प्रार्थना स्थलों को नहीं हटाया गया, तो आने वाले दिनों में संगठन उग्र आंदोलन करेगा।
  • प्रशासन की अग्निपरीक्षा: अब यह मामला केवल गौहत्या का नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक शुचिता, कानून के शासन और धर्मांतरण जैसे गंभीर मुद्दों से जुड़ गया है। जिला प्रशासन के लिए यह एक बड़ी अग्निपरीक्षा है कि वह इस ‘सवाल के घेरे’ से कैसे बाहर आता है और गौवंश के हत्यारों को कानून के तहत न्याय दिलाता है।
गौरक्षा प्रमुख सोहन विश्वकर्मा मिली कलक्टर और अधिकारियों से ।