अरूण पाटीदार, करवड़! झाबुआ जिले के पेटलावद विकासखंड के ग्राम करवड़ में आवारा सांड और पागल कुत्ते का डर लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले कई महीनों से यह आवारा सांड गांव में खुलेआम घूम रहा है और अब तक कई ग्रामीणों पर हमला कर चुका है। घायल लोगों को दाहोद और बड़ौदा तक इलाज के लिए जाना पड़ा है। इसके बावजूद अभी तक ग्राम पंचायत की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

स्कूल के बच्चों में सबसे ज्यादा दहशत है। रोज़ाना स्कूल आने-जाने वाले बच्चे इसी रास्ते से गुजरते हैं और आवारा सांड के कारण वे स्कूल जाने से घबरा रहे हैं। बच्चों के पालक भी लगातार चिंता में हैं कि कहीं यह सांड या पागल कुत्ता उनके बच्चों पर हमला न कर दे।

पंचायत की जिम्मेदारी, लेकिन जवाब—“हमारा काम नहीं”
ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की और मीडिया ने भी मामले को उठाया, लेकिन पंचायत कार्रवाई से बचती दिख रही है। जब पंचायत सचिव राजेंद्र रेड्डी से संवाददाता ने बात की, तो उन्होंने कहा—
“यह पशुपालन विभाग और वन विभाग के अंतर्गत आता है, पंचायत का काम नहीं है।”
लेकिन यह दावा आधा सच है और नियम इससे अलग बात बताते हैं।
ग्राम पंचायत की प्राथमिक जिम्मेदारी, आवारा पशुओं को पकड़ाना उन्हें गोशाला/पशु आश्रय स्थल में भेजना है। ग्राम पंचायत अपनी जिम्मेदारी से बचने का काम कर रही है!






