Bharat kund mahotsav 2025: झाबुआ के शारदा विद्या मंदिर की प्रस्तुति ने जीता दर्शकों का दिल

अयोध्या।अयोध्या की पवित्र भूमि पर चल रहे भरत कुंड महोत्सव 2025 का छठा दिन सांस्कृतिक भक्ति और भावनाओं से भर उठा, जब झाबुआ के शारदा..

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अयोध्या।
अयोध्या की पवित्र भूमि पर चल रहे भरत कुंड महोत्सव 2025 का छठा दिन सांस्कृतिक भक्ति और भावनाओं से भर उठा, जब झाबुआ के शारदा विद्या मंदिर के विद्यार्थियों ने “राम राज्याभिषेक एवं राम तांडव” पर आधारित अपनी भव्य नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। इस प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को इतना प्रभावित किया कि पूरे पंडाल में जयश्रीराम के नारे गूंज उठे।

देशभर से आए कलाकारों के बीच झाबुआ के 20 विद्यार्थियों के इस दल ने जब मंच संभाला, तो वातावरण में एक अद्भुत ऊर्जा और श्रद्धा का संचार हो गया। विद्यार्थियों ने भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की गरिमा, मर्यादा और भावनाओं को जिस जीवंतता से प्रस्तुत किया, उसने सबका मन मोह लिया। इसके बाद जब मंच पर राम तांडव की लय और ताल गूंजी, तो दर्शक स्तब्ध रह गए। प्रस्तुति के हर दृश्य में समर्पण, अनुशासन और भारतीयता की झलक स्पष्ट दिखाई दी।

यह पूरा आयोजन फाउंडेशन फॉर हॉलिस्टिक डेवलपमेंट, कोल्हापुर (महाराष्ट्र) के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने में रिया बारिया, स्नेहा नायडू, नेहा आचार्य और रोहित डावर का विशेष योगदान रहा। पूरी टीम का निर्देशन विद्यालय की संचालक किरण शर्मा, प्रेरणा  देखणे और प्राचार्य दीपशिखा तिवारी ने किया।

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विद्यालय के संचालक ओम शर्मा ने इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों और प्रशिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसी प्रस्तुतियाँ न केवल कला के विकास का माध्यम हैं बल्कि भारतीय संस्कृति और श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का सबसे सुंदर जरिया भी हैं।

उन्होंने कहा कि झाबुआ के विद्यार्थियों ने अयोध्या के मंच पर जो प्रदर्शन किया, वह पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। इससे यह भी सिद्ध होता है कि छोटे शहरों के युवा भी समर्पण और मेहनत से राष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

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शारदा विद्या मंदिर परिवार ने इसे विद्यालय के लिए गौरव का क्षण बताया और कहा कि यह प्रस्तुति विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और नैतिक मूल्यों के प्रति गहरा जुड़ाव पैदा करेगी।

भरत कुंड महोत्सव का यह दिन उस क्षण का साक्षी बना जब झाबुआ की धरती से उठे युवा कलाकारों ने रामायण की पवित्र कथा को मंच पर साकार कर दिया और यह साबित कर दिया कि कला जब भक्ति से जुड़ती है तो वह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि प्रेरणा बन जाती है।

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