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सामूहिक विवाह में आदिवासी परंपरा की अनदेखी पर जयस ने जताया विरोध

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झाबुआ। जिले में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 27 मार्च को आयोजित होने वाले सामूहिक विवाह कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जय आदिवासी युवा शक्ति (JAYS) संगठन ने इस विवाह समारोह में आदिवासी रीति-रिवाजों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि आदिवासी परंपराओं का पालन नहीं किया गया, तो वे इस आयोजन का विरोध करेंगे।

जयस ने क्या उठाए सवाल?

जयस के जिला अध्यक्ष विजय डामोर और राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. हीरालाल अलावा द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि झाबुआ जिला 95 प्रतिशत आदिवासी आबादी वाला क्षेत्र है, जहां विवाह आदिवासी परंपराओं के अनुसार होते हैं। लेकिन सामूहिक विवाह में सरकारी प्रक्रिया के तहत फेरे, पंडित और हिंदू रीति-रिवाज थोपे जा रहे हैं, जो आदिवासी संस्कृति के खिलाफ है।

ज्ञापन में कहा गया है कि आदिवासी समाज में फेरे नहीं, बल्कि ‘तरी’ (आदिवासी विवाह की पारंपरिक रस्म) के अनुसार विवाह संपन्न होते हैं। लेकिन सरकारी सामूहिक विवाह आयोजन में आदिवासी युवाओं को हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे समाज में आक्रोश है।

सामूहिक विवाह में आदिवासी परंपरा की अनदेखी पर जयस ने जताया विरोध

जयस ने दी चेतावनी

जयस ने प्रशासन से मांग की है कि सामूहिक विवाह कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति के अनुसार ‘तरी’ रस्म को शामिल किया जाए और आदिवासी परंपराओं का सम्मान किया जाए। संगठन ने कहा कि अगर सरकार आदिवासी समाज की परंपराओं की उपेक्षा करती है, तो जयस संगठन विरोध प्रदर्शन करेगा और मुख्यमंत्री से इस विषय पर मिलने की मांग करेगा।

अब क्या होगा?

अब देखना होगा कि प्रशासन जयस की मांगों को स्वीकार करता है या नहीं। यदि सरकार सामूहिक विवाह में आदिवासी रीति-रिवाजों को शामिल नहीं करती, तो यह मुद्दा बड़ा आंदोलन बन सकता है।

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